बड़ा विकट है राजस्थान में 99 का ‘बलवान भंवर’ !

  • 99 के फेर में गहलोत सरकार 
  • माकपा तय करेगी सरकार का भविष्य ?

फोकस भारत। गहलोत सरकार भंवर में तो है, क्योंकि उनके वरिष्ठ विधायक मास्टर भंवरलाल गुड़गांव के वेदांता में वेंटिलेटर पर हैं और इधर सरकार वेंटिलेटर पर है। ये सियासी भंवर इसलिए भी बलवान है क्योंकि माकपा विधायक बलवान पूनियां सरकार के समर्थन का मौखिक दावा तो करते हैं लेकिन माकपा के दोनों विधायकों का रुख ऐन वक्त पर किधर रहेगा ये खुद सरकार भी नहीं जानती। राजस्थान की राजनीति में सदन के मैदान पर शतक लगाने से भी काम नहीं चलेगा। फिलहाल गहलोत सरकार नर्वस नाइंटी का शिकार होती नजर आ रही है। गहलोत सरकार की ओर से कभी 102 विधायकों के साथ की बात की जाती है, कभी 105 तो कभी 109, लेकिन हकीकत ये है कि गहलोत सरकार 99 के फेर में फंसी हुई है। इससे बढ़कर नर्वस नाइंटी का शिकार तो क्रिकेटर भी नहीं होते हैं।

गहलोत खेमे की असल संख्या कितनी ?

सूत्रों से पुख्ता ख़बर तो ये मिल रही है कि गहलोत कैंप में विधायकों की टोटल संख्या 101 है। लेकिन बहुमत होने के बावजूद गहलोत इसे सदन में साबित नहीं कर पाएंगे। उसका बड़ा कारण ये है कि एक विधायक मास्टर भंवरलाल बेहद बीमार हैं, वे गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं लिहाजा उनके वोट की उम्मीद भी नहीं है। उनके वोट को हटा दिया जाए तो आंकड़ा 100 पर अटकता है। सीपी जोशी स्पीकर हैं लेकिन वे मताधिकार का सदन में तभी प्रयोग कर पाएंगे जब पक्ष विपक्ष दोनों बराबर की स्थिति पर अटक जाएं। इसलिए स्पीकर का वोट निकाल दें तो यह संख्या 99 रह जाती है।

माकपा पर टिकी सरकार की उम्मीदें

माकपा के दो विधायक हैं और वे अभी किसी भी पाले में नहीं हैं। गहलोत खेमे को वोटिंग के समय इन विधायकों के तटस्थ रहने का भी डर सता रहा है। यही डर पायलट खेमे को भी है कि अगर वोटिंग हुई तो ये विधायक सरकार का ही साथ देंगे। इनमें से एक विधायक बलवान पूनिया गहलोत के साथ राजभवन में नजर आए थे, राज्यपाल के खिलाफ नारेबाजी में भी दिखे थे लेकिन वे बाड़ाबदीं में शामिल नहीं हुए। न तो जयपुर में और न ही जैसलमेर में। ऐसे में गहलोत का डर वाजिब है। बाड़ेबंदी के बाहर वे आज़ाद हैं और यह अवसर उनके विरोधी नहीं चूकना चाहेंगे।

पायलट खेमे को तोड़ने की कोशिश

अब तक स्थिति बिल्कुल कगार पर अटकी हुई है। ऐसे में दोनों तरफ से तीन-तेरह के दावे भी किए गए। पायलट खेमे ने दावा किया गहलोत खेमे के 13 विधायक उनके संपर्क में हैं और बाड़ाबंदी खुलने पर वे उनका साथ देंगे, तो वहीं गहलोत खेमे का दावा था कि पायलट गुट के 3 विधायक उनके पक्ष में वोट करेंगे। फिलहाल सूत्रों के हवाले से खबर है कि पायलट खेमे के नेताओं से लगातार संपर्क साधकर उन्हें अपने खेमे में लाने की कोशिश की जा रही है।

बहरहाल, एक तरफ सरकार ने जैसलमेर में अपने विधायकों की किलेबंदी कर दी है तो दूसरी तरफ पायलट खेमा भी टस से मस होता दिखाई नहीं दे रहा है। राजस्थान की राजनीति में अब 5 अगस्त के बाद ही कोई मोड़ नजर आएगा। क्योंकि अभी केंद्रीय भाजपा अयोध्या में भूमि पूजन के काम में व्यस्त है। हो सकता है राम मंदिर की शिला पुजने के बाद राजस्थान में नई सियासत की नींव खोदी जाए।

रिपोर्ट – आशीष मिश्रा