सियासी दमखम का एक ही नारा- ‘तुम मुझे खून दो…’

  • सचिन पायलट का 43वां जन्मदिन
  • रक्तदान के जरिये होगा शक्ति प्रदर्शन !

फोकस भारत। राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट का 43वां जन्मदिन 7 सितम्बर को है। यूथ कांग्रेस ने उनकी घर-वापसी को यादगार बनाने के लिए प्रदेशभर में कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसके तहत सभी 33 जिलों में रक्तदान शिविर भी लगाये जा रहे हैं। सचिन पायलट के कारण पिछले दिनों 32 दिन तक राजस्थान की राजनीति में सियासी भूचाल चला। तमाम उठापटक के बाद आखिर कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और सचिन शांति के साथ लौट आए। हालांकि इस जाने और आने में उन्होंने पीपीसी चीफ का पद और डिप्टी सीएम की कुर्सी गंवा दी। लेकिन सचिन का दावा है कि उन्होंने अपनी पूरी बात केंद्र आलाकमान के सामने रखी है, जिस पर आश्वासन मिलने के बाद ही वे लौटे हैं। हालांकि तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जा चुका है और राजस्थान प्रभारी अजय माकन प्रदेश में कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच सुलह कराने की कोशिशों में भी जुटे हैं। लेकिन अब यह कहा जा रहा है कि सचिन पायलट के जन्मदिन के बहाने पायलट खेमा अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में है।

सचिन की छवि का सवाल है

अंदरखाने सचिन पायलट भी यही चाहते हैं कि प्रदेशभर में उनका जन्मदिन एक लोक-उत्सव की तरह नजर आए और उनकी छवि विराट रूप से पेश हो। राजस्थान के सियासी संकट का जिस तरह से पटाक्षेप हुआ उससे सचिन पायलट की छवि को तगड़ा झटका लगा। पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हीरो की तरह उभरकर आए, वहीं सचिन पायलट पर कई तरह के व्यक्तिगत हमले करके भी मुख्यमंत्री ने पार्टी में उनका स्वागत किया। लेकिन इस पूरी जंग में सचिन ने पाया तो कुछ भी नहीं पर पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम का पद और खो बैठे। राजनीतिक पंडित इस घटनाक्रम को लेकर कहते हैं कि राजनीति के खेल में सचिन पायलट मुख्यमंत्री के सामने बहुत बौने साबित हुए। अब सचिन पायलट के पास एक मौका है कि वे अपने समर्थकों के माध्यम से अपना जनाधार पेश करें, ताकि उनकी बात पर मुहर लग सके कि वे सीएम-कंटेंट हैं।

जन्मदिन पर रक्तदान संकल्प शिविर

किसी दौर में नेता स्वतंत्रता के लिए जनता से खून मांगा करते थे और आजादी दिलाने का वादा करते थे। बाद में आजादी मिल गई और खून देने का प्रचलन रक्तदान के तौर पर सामने आने लगा। सचिन पायलट ने अपने समर्थकों से पहले ही कह दिया है कि कोरोना के कारण वे कोई बड़ा आयोजन नहीं करना चाहते, लिहाजा कार्यकर्ताओं से रक्तदान संकल्प दिवस मनाने की ही अपील की है। पायलट ने यह भी साफ कह दिया है कि उनके आवास पर कोई मिलने भी न आए। उन्होंने कहा कि वे फेसबुक और ट्वीटर के माध्यम से ही लोगों से संवाद करेंगे।

33 जिलों में रक्तदान कैम्प के जरिए शक्ति प्रदर्शन

जहां तक पायलट समर्थित कार्यकर्ताओं की बात है, वे अपने नेता की छवि उजली करने के लिए जी-जान लगा देंगे। सभी 33 जिलों में रक्तदान शिविरों का कैम्प लगाने की बात चल रही है और सोशन गाइड लाइन का पालन करते हुए रक्तदान संग्रह का नया कीर्तिमान कायम करने का भी लक्ष्य रखा गया है। राजधानी जयपुर में जन्मदिन से दो-चार दिन पहले ही हर तरफ बड़े बड़े होर्डिंग्स लगा दिए गए थे। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर भी इस तरह के होर्डिंग देखे जा सकते हैं। जयपुर में एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर रक्तदान कैम्प चलेगा, साथ ही कार्यकर्ताओं की टीमें फल वितरण का भी काम पुरजोर तरीके से करेंगी। इसी तरह का कार्यक्रम व्यापक तौर पर टोंक में भी किये जाने की योजना है।

2019 में भी दिखाया था दमखम

पिछले जन्मदिन पर भी सचिन पायलट ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था। तब उन्होंने बयान दिया था कि मैने संघर्ष कर 21 सीट वाली कांग्रेस को पूर्ण बहुमत दिलाया है। यह एक तरह से सचिन की दावेदारी थी। पिछले साल सचिन के जन्मदिन पर अशोक गहलोत दिल्ली से सीधे जोधपुर निकल गए थे और मंदिरों में दर्शन कर रहे थे। तब सचिन को बधाई देने वालों का तांता लगा था और आधा दर्जन मंत्री उन्हें शुभकामना देने उनके आवास पर पहुंचे थे। इस बार खेल उल्टा हो गया है, एक तो कोरोना और ऊपर से सचिन ने दो बड़े पदों से भी हाथ धो दिया है।

क्या सचिन पर है अस्तित्व का संकट ?

एसओजी को सबसे शुरूआत में जो ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली थी, उसमें यह जिक्र था कि सचिन पायलट का भाग्य चमकने वाला है। सियासी घटनाक्रम में इस तरह कुछ इशारा भी किया। लगा कि गहलोत सरकार गिर जाएगी और भाजपा के सहयोग से सचिन सत्ता पर काबिज हो जाएंगे। लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत ने सत्ता में सेंधमारी न होने दी। सचिन के सितारे कैसे हैं, यह तो आने वाले वक्त में पता चलेगा लेकिन फिलहाल उन पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। अपनी खोयी चमक वापस पाने के लिए सचिन एक बार फिर ग्रामीण इलाकों और क्षेत्रों का रुख करेंगे। पायलट समर्थक विधायक वेदप्रकाश सोलंकी, इंद्रराज गुर्जर और मुकेश भाकर युवाओं को जोड़ने में जुटे हैं। युवाओं से संवाद कार्यक्रम करने का प्लान बनाया गया है। प्लान कितने कारगर होते हैं, यह भी समय ही तय करेगा।

सचिन पायलट का परिचय

सचिन पायलट का जन्म 7 सितम्बर 1977 को दिग्गज कांग्रेस नेता राजेश पायलट और रमा पायलट के घर हुआ था। सचिन बचपन से ही होनहार थे और एम्बीशियस थे। दिल्ली के एयरफोर्स स्कूल में पढ़ने और दिल्ली यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अमेरिका के पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के  व्हॉर्टन स्कूल में दाखिला लिया और एमबीए की डिग्री भी हासिल की। अमेरिका से लौटने के बाद सचिन ने 2002 में कांग्रेस ज्वाइन कर ली। 2004 में वे 26 साल की उम्र में दौसा से सांसद बनकर संसद पहुंचे। इसी साल उन्होंने कश्मीर के नेता फारूख अब्दुल्ला की बेटी सारा से विवाह किया। केंद्र सरकार में वे संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री भी रहे इसके अलावा गृह विभाग के स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य और नागरिक उड़्डयन मंत्रालय के सलाहकार समिति के सदस्य के तौर पर भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई। 2014 में उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। उस साल चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए डरावने थे और पार्टी 21 सीटों पर सिमट गई थी। दिसंबर 2018 में पायलट को डिप्टी सीएम बनाया गया। लेकिन हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चले मतभेद के बाद उन्हें डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ के पदों से हटा दिया गया।

रिपोर्ट- आशीष मिश्रा