अशोक गहलोत के ‘काले मास्क’ का क्या है राज़ ?

  • अशोक गहलोत कुछ दिन से नज़र आ रहे काले मास्क में
  • काला रंग मुख्यमंत्री को प्रिय, लेकिन काला मास्क किस भाव का प्रतीक ?

फोकस भारत। काले रंग का सियासी महत्व क्या है ये कोई राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सीखे। हो सकता है कि किसी ने ध्यान नहीं दिया हो लेकिन यह दिलचस्प है कि राजस्थान में सचिन पायलट की बगावत के बाद जब पार्टी के कुछ नेता प्रदेश से बाहर होटल में बाड़ाबंद होकर बैठक गए और प्रदेश की सियासत बहुमत के आंकड़े, खरीद-फरोख्त, फोन टेप, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट, राजभवन और विधानसभा के जंजाल में उलझ गयी। तब बिना किसी शोर-शराबे और एलान के अशोक गहलोत ने अपने पहनावे में एक हल्का सा चेंज किया। उन्होंने काला मास्क पहनना शुरू कर दिया।

अशोक गहलोत और उनका काला मास्क

पिछले महीने से शुरू हुए राजस्थान के राजनीतिक संकट पर देशभर के मीडिया की निगाहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक तरफ कोरोना संकट से जूझ रहे थे, तो दूसरी ओर वे कह रहे थे कि राज्यसभा चुनाव के वक्त से ही प्रदेश में हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश की जा रही है। एसओजी को मिली टेप के बाद जारी नोटिस को लेकर सचिन उखड़ गए और अपने समर्थित विधायकों को लेकर मानेसर जा बैठे। तब तक अशोक गहलोत सफेद-आसमानी मास्क या बिना मास्क भी मीडिया के सामने आते रहे। लेकिन जब मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उलझा, स्पीकर के नोटिस पर रोक लगाई गई और राज्यपाल की ओर से जब बार बार सत्र आहूत करने की फाइल लौटाई गई तो अशोक गहलोत काले मास्क में नजर आने लगे।

राज्यपाल के फाइल लौटाने से नाराज़ गहलोत

फेयरमोंट होटल में अशोक गहलोत ने जमीन पर बैठकर अपनी नाराजगी जताई। वे राजभवन के व्यवहार से भी खफा नजर आए थे। फेयरमोंट होटल में वे काले मास्क में नजर आए। उसी दिन उन्होंने कहा था कि राज्यपाल अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनेंगे तो जनता राजभवन का घेराव करेगी, और ऐसा हुआ तो सरकार की जिम्मेदारी नहीं होगी।

पीसीसी कार्यालय में डोटासरा के पदभार ग्रहण में काला मास्क

सचिन पायलट की बगावत से अशोक गहलोत खासे आहत हुए। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने अपना दर्द भी बयान किया था। कहा था कि जब सचिन छोटे थे तब उनके परिवार से गहलोत के अच्छे रिश्ते थे। पार्टी ने सचिन पायलट को उनकी उम्र के मुताबिक बहुत कुछ दिया। संगठन का मुखिया बनाया, उप मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन पायलट ने ठीक नहीं किया। डोटासरा के पदभार ग्रहण समारोह में पीसीसी में काला मास्क लगाए गहलोत भाजपा पर खूब भड़के, उन्होंने कहा कि कोरोना काल में एमपी में रातों रात सरकार गिरा दी गई, राजस्थान में कोशिशें हुई, विधानसभा सत्र आहूत करने को लेकर व्यवधान पैदा किए गए। अब जो भी हो, जितना भी समय लगे हमारे जांबाज तैयार हैं।

मीडिया के सामने काला मास्क

29 जुलाई और फिर 31 जुलाई को अशोक गहलोत मीडिया के सामने आए और हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर भाजपा पर खूब भड़के। उन्होंने कहा कि विधायकों के घरवालों से सुनने में आया है कि विधायकों की खरीद का रेट बढ़ गया है, अब अनलिमिटेड ऑफर किया जा रहा है। इसी दिन उन्होंने असंतुष्ट विधायकों से ये आग्रह भी किया कि वे जब भी विधानसभा का सत्र हो उसमें आएं और कार्यवाही में हिस्सा लें।

अशोक गहलोत को पसंद है काला रंग

काले मास्क के जरिये अशोक गहलोत ने हो सकता है कि अपने अंदर का दबा हुआ विरोध और पीड़ा को व्यक्त किया हो, लेकिन बड़ी बात ये है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को काला और सफेद दोनों रंग बेहद प्रिय हैं। अशोक गहलोत को कुर्ते पर काली जैकेट में हजारों बार देखा गया है। इसके अलावा वे  अपनी जैकेट के रंग में ज्यादा प्रयोग नहीं करते। सर्दियों में उनके मफलर का रंग भी काला ही होता है। साथ ही खास अवसरों पर उन्होंने बंद गले का काला जोधपुरी सूट भी खूब पहना है।

वसुंधरा पर किया था ‘काले रंग’ को लेकर करारा तंज

बात है नवंबर-दिसंबर 2018 की, बीकानेर में अशोक गहलोत कई किसान सम्मेलन अटेंड कर रहे थे। वसुंधरा राजे के उसी शासनकाल में गंगानगर जिले में किसानों पर हुए लाठीचार्ज पर वे लगातार उस समय मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे को कोस रहे थे। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा था कि वसुंधरा राजे को काला रंग पसंद नहीं है। गंगानगर में किसानों ने मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए थे इस पर उन किसानों पर लाठीचार्ज किया गया था। गहलोत ने किसान सम्मेलन में कहा था कि काला रंग दिखाकर विरोध जताना जनता का अधिकार है और इसलिए वसुंधरा को काला रंग पसंद नहीं है।

‘जादूगर’ का काला जादू

गौरतलब है कि अशोक गहलोत के पिता एक जादूगर थे और जादूगरी की कला में काला जादू विश्वविख्यात होता है। काले जादू को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं और कई तरह के टोटकों से भी इसे जोड़ा जाता है। वैसे तो अशोक गहलोत विज्ञान पढ़े लिखे राजनेता हैं, साथ ही कानून की भी उन्होंने पढ़ाई की है। लेकिन जादूगर फैमिली से बिलॉन्ग करने के कारण क्या काले मास्क के इस्तेमाल के पीछे उनका कोई सियासी टोटका हो सकता है, जबकि उन्होंने अपने काले मास्क को लेकर कभी कोई टिप्पणी भी नहीं की है।

बहरहाल, अशोक गहलोत को राजस्थान का गांधी कहा जाता है। याद कीजिए गांधी जी में राष्ट्रवाद  विचार कब पनपे थे। दक्षिण अफ्रीका में मोहन दास के साथ अंग्रेज अधिकारियों ने रंगभेद किया था। अंग्रेज काले रंग से चिढ़ते थे। इसीलिए उन्होंने श्यामवर्णी मोहन दास करमचंद गांधी को रेल के डिब्बे से निकाल फेंका था। अमेरिका में भी 46 साल के एक अश्वेत जार्ज फ्लॉयड की पुलिस कस्टडी के मौत के बाद श्वेत-अश्वेत को लेकर न केवल नई बहस शुरू हो गई बल्कि तमाम संगठनों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया, यह प्रदर्शन अब तक जारी है और दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। राम और कृष्ण में आस्था वाले देश में भी भगवान के श्यामवर्णी होने का गुणगान भजनों में किया जाता रहा है। कुल मिलाकर अशोक गहलोत के काले मास्क के पीछे क्या मुख्यमंत्री के कुछ ऐसे मनोभाव जो सतह पर नहीं आ रहे हैं, काले मास्क के उस तरफ एक समंदर है जिसमें तूफान तो है, लेकिन शब्द नहीं हैं। गोया कि काला मास्क ही मुख्यमंत्री के भीतरी बवंडर की तस्वीर है।

रिपोर्ट- आशीष मिश्रा