वो कद्दावर नेता जिसकी मौत का सुराग आज 52 साल बाद भी नहीं लगा

फोकस भारत। जनसंघ के कद्दावर नेता दीनदयाल उपाध्याय का आज जन्मदिन है। एकात्म मानववाद और अंत्योदय दर्शन के प्रणेता दीनदयाल की आज जयंती है। वह कठिन परिस्थितियों के बीच धरती पर आए और मृत्यु रहस्य बनकर रह गई। उनका निधन रहस्यमय तरीके से हुआ, जिसका खुलासा आज 52 साल बाद भी नहीं हो पाया

 

रेलवे स्टेशन से शुरू हुई जिंदगी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 104 साल पहले मथुरा में हुआ था। चंद्रभान नांगला नामक गांव के निवासी भगवती प्रसाद उपाध्याय रेलवे में कर्मचारी थे। वह अपनी गर्भवती पत्नी रामप्यारी के साथ ट्रेन से घर लौट रहे थे, जब स्टेशन पर ही विषम परिस्थितियों के बीच 25 सितंबर 1916 को दीनदयाल उपाध्याय का जन्म हुआ। उनका बचपन बहुत ही विषम परिस्थितियों में बीता, जब 3 साल की आयु में ही पिता की मौत हो गई। इसके बाद मां का भी साथ केवल 7 वर्ष की अवस्था में ही छूट गया। इसके बाद पालन-पोषण और पढ़ाई लिखाई ननिहाल में रहकर हुई। आगरा और प्रयागराज से शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने नौकरी नहीं की। वह RSS के प्रचारक बन गए।

रहस्यमयी मौत
देश की आजादी के बाद उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर भारतीय जनसंघ की नींव रखी। 11 फरवरी 1968 की रात रेलवे यात्रा के दौरान मुगलसराय रेलवे जंक्शन के पास रहस्यमयी हालत में उनकी लाश मिली थी। आज तक उनकी मौत को लेकर खुलासा नहीं हो सका है।