क्या अब विश्वास मत की तैयारी ?

  • व्हिप नोटिस पर हाईकोर्ट का फैसला किसके पक्ष में ?
  • सचिन गुट को तीन दिन की राहत
  • विश्वास मत से बहुमत साबित करने जा रहे गहलोत ?

फोकस भारत। क्या गहलोत अब विश्वास मत के जरिए बहुमत साबित करने की तैयारी कर रहे हैं। कवायदें तो इसी तरफ इशारा कर रही हैं।  राजस्थान में सियासी समीकरण ऐसे उलझे हैं कि सुलझने का नाम ही नहीं ले रहे। सचिन पायलट समेत 19 विधायकों के विधानसभा नोटिस मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट अब 24 को फैसला सुनाएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्पीकर से आग्रह किया है कि वे 24 जुलाई तक विधायकों पर किसी तरह की कार्रवाई न करें या नोटिस के जवाब का दबाव न बनाएं।

इधर, हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी और उधर फेयरमोंट होटल में विधायक दल की बैठक चल रही थी, इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मीटिंग बुला ली। माना जा रहा है कि गहलोत विश्वास मत के जरिए बहुत साबित कर देंगे।

न्यायिक घटनाक्रम-

  • गुरुवार, 16 जुलाई – सचिन गुट ने व्हिप नोटिस के खिलाफ HC में याचिका दायर की, दोपहर 3 बजे सुनवाई हुई। अमेंडमेंट कॉपी   नहीं होने पर 15 मिनट में ही कार्रवाई टली, 5 बजे मामला खंडपीठ को ट्रांसफर। रात 8 बजे मामला शुक्रवार तक के लिए टला।
  • शुक्रवार, 17 जुलाई – दोपहर 1 से शाम 4.30 तक सुनवाई, HC की अपील-स्पीकर 20 जुलाई तक न करें बागियों पर कार्रवाई
  • सोमवार, 20 जुलाई- दोनों पक्षों ने अपनी अपनी दलीलें दीं, कार्रवाई मंगलवार तक के लिए टली
  • मंगलवार, 21 जुलाई- फैसला सुरक्षित रखा गया, स्पीकर से आग्रह 24 जुलाई तक न करें कार्रवाई
  • शुक्रवार, 24 जुलाई- सुनाया जा सकता है बागियों के नोटिस पर फैसला।

दलीलें-

पायलट पक्ष-  विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को विधायकों को नोटिस का जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया जाना चाहिए था, दल-बदल कानून का नाम लेकर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि दल बदला नहीं गया है। शिकायत के दिन ही नोटिस भेज दिया, बिना ठोस वजह बताए नोटिस जारी किया गया, बसपा विधायक कांग्रेस में आए, उस शिकायत पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई। सरकार गिराना अलग बात है और मुख्यमंत्री बनाना अलग बात है। विधानसभा के बाहर किसी गतिविधि को दल बदल विरोधी अधिनियम का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। विधानसभा सत्र भी नहीं चल रहा, तो व्हिप का कोई अर्थ नहीं।

स्पीकर पक्ष- स्पीकर ने बस नोटिस भेजा है, अयोग्य नहीं ठहराया। पायलट गुट की याचिका प्री-मैच्योर है, खारिज होनी चाहिए।

कैबिनेट की बैठक में हो सकता है ये-

गहलोत सरकार विश्वास मत के जरिए बहुमत साबित कर सकती है। कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है, इसमें आगे की रणनीति पर फैसला हो सकता है, मंत्रिमंडल विस्तार पर भी चर्चा हो सकती है। गहलोत बहुमत साबित कर पाए तो छह महीने तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

रिपोर्ट- आशीष मिश्रा