ट्रांसजेंडर प्रिया पाटिल बनीं भारत के पहले LGBT पॉलिटिकल सेल की प्रमुख

फोकस भारत। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  ने  अपने ‘एलजीबीटी’ (समलैंगिकों और ट्रांसजेंडर के लिए) प्रकोष्ठ का गठन किया और इस तरह का कदम उठाने वाला देश का पहला राजनीतिक दल होने का दावा किया। महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन मंत्री और प्रदेश राकांपा अध्यक्ष जयंत पाटिल और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने प्रकोष्ठ की घोषणा की तथा एलजीबीटी समुदाय के सदस्यों के साथ समान व्यवहार की वकालत की। उन्होंने ट्रांसजेंडर प्रिया पाटिल को इस प्रकोष्ठ की प्रदेश इकाई का प्रमुख नियुक्त किया। प्रिया पाटिल के अलावा प्रकोष्ठ में 13 अन्य पदाधिकारी होंगे।

कौन है प्रिया पाटिल
3 जुलाई 1987 को मुंबई से सटे वसई-विरार में एक लड़के के रूप में जन्मीं प्रिया का बचपन कठिनाइयों में बीता। 9 साल की उम्र में उन्हें एहसास हुआ कि वह एक आम बच्चे से कुछ अलग हैं और जब वे 10 साल की थीं तो उनके पिता उन्हें और उनकी मां को छोड़कर चले गए।
आर्थिक तंगी झेलते हुए वे 13 की हुईं तो समाज, परिवार और उनकी मां भी उनके खिलाफ हो गईं। उनका लड़कियों के साथ रहना परिवार को पसंद नहीं था और एक दिन मां ने धक्का देकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। प्रिया पाटिल ने आगे बताया कि घर से निकलने के बाद वे मुंबई के विरार रेलवे स्टेशन पर आ गईं। यहां करीब एक साल तक रहीं। इस दौरान कई बार दो-तीन दिन तक खाना नहीं मिलता था। लोगों की जूठन खाई और कई बार यौन उत्पीड़न का शिकार भी हुईं। एक साल तक उनके पास सिर्फ एक ही कपड़ा था और नहाने के बाद उसके सूखने तक वो बिना कपड़ों के झाड़ियों में छिपी रहती थीं। 2002 में विरार रेलवे स्टेशन पर ही उनकी मुलाकात ट्रांसजेंडर कम्युनिटी से जुड़े कुछ लोगों से हुई और पेट भरने के लिए उनके साथ ट्रेन में भीख मांगना, लोगों के घरों में बधाइयां देने जैसे काम प्रिया ने शुरू किया। प्रिया बताती है कि वो  एक एनजीओ से जुड़ीं और फिर साल 2017 में बीएमसी की कुर्ला वेस्ट वार्ड-166 से नगर निगम का चुनाव लड़ा। हालांकि, इसमें उनकी हार हुई। लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मार्च 2019 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की।

 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने क्यों बनाया एलजीबीटी प्रकोष्ठ 
राकांपा से जुड़ने के बाद हुए चुनावों में प्रिया पाटिल ने पार्टी को मजबूत करने का काम किया और घर-घर जाकर वोट मांगे। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के मद्देनजर लगे लॉकडाउन के बीच उन्हें ऐसी जानकारी मिली कि उनके समुदाय से जुड़े लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। कई लोगों को उनके मकान मालिकों ने घरों से निकाल दिया है।समुदाय से जुड़े लोगों तक आर्थिक मदद पहुंचाने के साथ उन्होंने आगे ऐसा न हो इसलिए बारामती से सांसद सुप्रिया सुले से मुलाकात की और पार्टी में ट्रांसजेंडर सेल शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को और आगे बढ़ाते हुए सुप्रिया सुले ने इसमें एलजीबीटी कम्युनिटी से जुड़े लोगों को शामिल करने की बात कही। इस तरह से देश का पहला एलजीबीटी सेल बनकर तैयार हुआ। राजनीति में आने के सवाल पर प्रिया का कहना है कि, “लोग जिस तरह से हमें देखते हैं हम उससे बिलकुल अलग हैं। उनके नजरिए को बदलने की जरुरत है। राजनीति में कोई नहीं है जो किन्नरों के हितों के लिए अलग से काम करे।”