‘पायलट’ का फोकस अब फील्ड के दौरों पर, ‘क्राउड कैप्चर’ छवि बरकरार रखने की कोशिश

Sachin Pilot- राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं। तीन दिन पहले पायलट ने दिल्ली में टेरिटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना) में कैप्टन पद पर प्रमोशन के बाद कॉम्बैट यूनिफॉर्म में ड्रिल में हिस्सा लिया। इसके एक दिन बाद रविवार को टोंक के धांस गांव में डेढ़ मिनट में 51 मीटर लम्बा साफा बांध सभी को हैरत में कर दिया। अब बात पायलट के अलवर जिले के बानसूर दौरे की। यहां एक जगह पर समर्थकों की ज्यादा संख्या देखकर पायलट अपनी एसयूवी से निकले और उछलकर बोनट पर चढ़ गए। खड़े होकर समर्थकों का अभिवादन किया। पायलट काे उछलकर एसयूवी पर चढ़ने के बाद समर्थकों ने उन्हें घेर लिया और उनके समर्थन में नारेबाजी करते रहे।दरअसल सचिन पायलट रविवार को टोंक में अपने विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर कई जगह कार्यक्रमों में शामिल हुए। टोंक दौरे के अगले ही दिन सोमवार को अलवर के बानसूर के मुगलपुर गांव में शहीद की मूर्ति अनावरण समारोह में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। बानसूर तक पायलट का समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जगह स्वागत किया।

 राजनीतिक विश्लेषक कहते है कि  पायलट का फोकस अब फील्ड के दौरों पर है। आने वाले दिनों में भी पायलट के कई क्षेत्रों में दौरे बन रहे हैं। जिलों के दौरे कर पायलट समर्थकों को मजबूती से जोडे़ रखना चाहते हैं। सात साल कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहने के दौरान पायलट का हर जिले में नेटवर्क और समर्थकों की अच्छी खासी संख्या है। पायलट उन समर्थकों को ही जोड़े रखने के लिए फील्ड के दौरे कर रहे हैं। सचिन पायलट को कांग्रेस में भीड़ खींचने की योग्यता वाले चुनिंदा नेताओं में माना जाता है। क्राउड कैप्चर वाली छवि को पायलट बरकरार रखने के प्रयास में हैं। फील्ड दौरों के पीछे भी यही रणनीति मानी जा रही है।