नरेन्द्र मोदी तीसरी बार PM कैसे बने? जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने संघ को दिया मास्टरप्लान, इनसाइड स्टोरी

फोकस भारत। उत्तर प्रदेश(uttar pradesh) बॉर्डर से महज 2 किलाेमीटर दूर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सीमा में चित्रकूट में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक आयोजित हो रही है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इस बैठक में पिछले 5 दिन से मंथन कर रहे है।  दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्य धाम में ये बैठक 9 जुलाई से 13 जुलाई तक आयोजित है।  हालांकि ये अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक हर साल जुलाई में होती है। इस बैठक में संघ से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रांत प्रचारक स्तर तक के प्रचारक भाग लेते हैं। अमूमन इस माीटिंग में संघ के प्रांत प्रचारक अपने अपने प्रांतों में संघ कार्यों का विवरण देते हैं और आने वाले कार्यक्रमों की योजना बनाते हैं। ये बैठक संघ की हर साल आयोजित होनी वाली 3 बड़ी बैठकों में से एक है। बाकी 2 बड़ी बैठकों में से एक मार्च में होली के पास होती है, जिसको अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा और दूसरी दिवाली के आस-पास होती है, जिसको अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक कहा जाता है।

चित्रकूट में मंथन का आज आखिरी दिन है। विश्वनीय सूत्रों के मुताबिक  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उस मास्टर प्लान का खाका खींचने में जुटा है, जिसके आधार पर आगे भाजपा और केंद्र सरकार को चलना है। इस मंथन के बाद सरकार कुछ बड़े फैसले भी ले सकती है। राजनीतिक विश्लेषक का मानना है कि  इन फैसलों पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य(jagadguru rambhadracharya) के सुझाव भी असर डाल सकते हैं। जगदगुरु चित्रकूट में स्थित धार्मिक और सामाजिक संस्था तुलसी पीठ के फाउंडर और मुखिया हैं। स्वामी रामभद्राचार्य विश्व हिंदू परिषद के भी नेता हैं। रामभद्राचार्य देश के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम स्वच्छता अभियान में कैंपेनर के रूप में पीएम के 9 रत्नों में  भी शामिल थे  । रामभद्राचार्य जब दो माह के थे तो उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। रामचरित मानस का गहन अध्ययन भद्राचार्य ने किया है। 2015 में इन्हें पद्म विभूषण सम्मान से भी नवाजा गया।​ रामानंद संप्रदाय के वर्तमान में 4 जगद्गुरु रामानंदाचार्यों में से एक रामभद्राचार्य हैं। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस के बारे में बोलने के लिए केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में इन्हें अधिकार प्राप्त है। रामभद्राचार्य राम इलाहाबाद हाई कोर्ट में चले जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में एक्सपर्ट के तौर पर भी शामिल थे।  दरअसल, 9 से 13 जुलाई तक चलने वाले इस मंथन से दो दिन पहले 7 जुलाई को संघ प्रमुख मोहन भागवत(mohan bhagwat) रामभद्राचार्य का आशीर्वाद लेने पहुंचे। जगद्गुरु ने गुरुमंत्र के तौर पर संघ प्रमुख को कुछ मुद्दे दिए।

 

 रामभद्राचार्य ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को कुछ मुद्दों पर विचार को कहा-

– जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। राज्य में चुनाव कराए जाने को लेकर बैठकें जारी हैं। जगद्गुरु ने कहा कि भारत के नक्शे में आधा-अधूरा कश्मीर नहीं, बल्कि पूरा कश्मीर जुड़ना चाहिए।

– धर्म परिवर्तन
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन को लेकर कार्रवाई जारी है। इस मसले पर रामभद्राचार्य ने कहा कि केंद्र को सख्त कानून बनाना चाहिए और ये काम जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।

– जनसंख्या नियंत्रण
जगद्गुरु ने कहा कि देश में मुस्लिमों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है और हिंदुओं की संख्या उस अनुपात में कम होती जा रही है। इसे देखते हुए जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जल्द से जल्द कानून बनना ही चाहिए।

– गोरक्षा
रामभद्राचार्य हिंदुओं के बीच धार्मिक महत्व रखने वाली गाय की रक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। उन्होंने गोवध को पूरी तरह से निषेध करने का मुद्दा भी भागवत को सुझाया।

– समान नागरिक संहिता

उन्होंने कहा कि देश के भीतर एक कानून होना चाहिए, फिर चाहे नागिरक किसी भी धर्म का क्यों न हो। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता तुरंत लागू किए जाने की जरूरत है।

– हिंदी राष्ट्र भाषा हो
रामभद्राचार्य ने मोहन भागवत से कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया जाए। इस मुद्दे पर मंथन के दौरान चर्चा की जानी चाहिए।

– रामायण
जगद्गुरु ने कहा कि रामायण को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाना चाहिए। मंथन के दौरान जुटे संघ के पदाधिकारी इसे लेकर कोई स्टैंड लें और सरकार इस पर जल्द कदम उठाए।

कोरोना की थर्ड वेव 

थर्ड वेव में संघ की चर्चा सेवा कार्यों के लिए होनी चाहिए। गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाए। हालांकि 

 

राजनीतिक विश्लेष कहते है कि  2019 में प्रधानमंत्री के शपथ समारोह की एक तस्वीर लगातार टीवी में दिखाई जा रही थी। इस तस्वीर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गेरुआ वस्त्र धारण किए हुए एक धर्म गुरु का हाथ पकड़कर उन्हें बैठाने के लिए ले जा रहे थे। ये अप्रैल 2018 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी करने वाले चित्रकूट के संत रामभद्राचार्य ही थे।  2020 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चित्रकूट आए थे, तब व्यस्त शेड्यूल के बावजूद उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से मिलने का वक्त निकाला था। उन्होंने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार भी प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद भी तभी दे डाला था।