सत्ता संगठन के समन्वय में फेल हो गए अविनाश पांडे ?

  • अविनाश पांडे ने किए एक के बाद एक ट्वीट
  • क्या सत्ता संगठन में तालमेल करने में फेल रहे
  • संगठन पदाधिकारी लगातार दे रहे इस्तीफे
  • सचिन पायलट की मंशा भी नहीं भांप पाए
  • क्या ट्वीट के भरोसे बचेंगे कार्रवाई से ?

 

फोकस भारत। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे सत्ता और संगठन के तालमेल में पूरी तरह फेल साबित हुए। अब उन्हें आलाकमान का डर सता रहा है। एक के बाद एक ट्वीट कर वे अपनी गर्दन बचा रहे हैं। प्रदेश प्रभारी के तौर पर फेल होने के बाद क्या अब वे गहलोत या आलाकमान की टेढी नजर से बच पाएंगे कहना मुश्किल है। गहलोत सरकार तुरंत फैसले कर रही है और कठोर कार्रवाई कर अपना रुख भी साफ कर दिया है। राजस्थान में सत्ता और संगठन में तालमेल की प्रमुख जिम्मेदारी अविनाश पांडे की थी, इसके लिए राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से आठ सदस्यीय समन्वय समिति बनाई गई थी।

समन्यव समिति की फरवरी में हुई थी बैठक

इस साल के दूसरे ही महिने में समन्वय समिति की बैठक भी हुई। लेकिन समिति यह भनक भी न लगा सकी की सचिन पायलट इतना बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं और उनके साथ लगभग 20 विधायक भी पार्टी से बगावत करने के मूड मे हैं। सत्ता पक्ष और संगठन के पदाधिकारियों के आपस की बात को समझना और उनमें तालमेल कराना ही इस समिति का काम था। लेकिन पांडे जी पूरी तरह विफल रहे।

गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही तालमेल नहीं

सत्ता और संगठन का तालमेल कांग्रेस में उसी समय से नहीं दिखा जब से गहलोत मुख्यमंत्री बने। राजभवन में ‘हमारा नेता कैसा हो, सचिन पायलट जैसा हो’ के नारे लगे तभी समझ जाना चाहिए था, नहीं समझे और अब परिणाम भुगत रहे हैं। साल  भर तक जब गहलोत और पायलट गुट भीतर ही भीतर सुलगते रहे तब जाकर सोनिया ने जनवरी 2020 में समन्वय समिति बनाई और अविनाश पांडे को जिम्मेदारी दी। समिति में गहलोत, पायलट, महेंद्रजीत मालवीय, दीपेंद्र सिंह शेखावत, हेमाराम चौधरी, मास्टर भंवरलाल और हरीश चौधरी शामिल थे। न जाने यह समन्वय समिति जोड़ने के लिए बनाई गई थी या तोड़ने के लिए।

फिलहाल समन्वय समिति के ही तीन सदस्य बागी होकर मानेसर जा बैठे। अब जो पार्टी का विनाश हुआ है, तो अविनाश जी से सवाल तो पूछे जाएंगे। हो सकता है आलाकमान नाराज होकर उन्हें राजस्थान के भार से मुक्त कर दे।

बहरहाल, अभी भी पायलट ट्वीट कर ऐसा जता रहे हैं जैसे वे संगठन को बचाने के लिए जी जान से लगे हुए हैं, उन्होंने ट्वीट किया- पायलट के लिए पार्टी के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं, भगवान उन्हें सदबुद्धि दें, उन्हें गलती समझ आए और वे भाजपा के मायावी जाल से बाहर निकल आएं।

इससे पहले उन्होंने ट्वीट किया – राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश कार्यकारिणी, समस्त विभागों, प्रकोष्ठ को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही नए प्रदेश कार्यकारिणी, विभागों एवं प्रकोष्ठों का गठन किया जाएगा।

साथ ही अपने नेताओं को आगाह करते हुए भी एक एक ट्वीट कर डाला- कांग्रेस अध्यक्ष श्री गोविंद सिंह डोटासरा जी की अनुमति के बिना कोई भी कांग्रेसजन मीडिया से संवाद नहीं करे

अब वे कितनी ही कोशिश करें, चिड़िया खेत चुग चुकी है। शायद अविनाश पांडे का पछताना बाकी है।

रिपोर्ट- आशीष मिश्रा 

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