जयपुर/ फोकस भारत। कहते हैं कि कोई भी शुभ काम हो हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सबसे पहले याद किया जाता है । भगवान गणेश के बिना शादी के कार्ड की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन नए दौर में दलित और बौद्ध धर्मावलंबियों में परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही है। अब दलित समाज में शादी या जन्मदिन के मौकों पर दिए जाने वाले कई निमंत्रण पत्रों पर संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर और बुद्ध की तस्वीरों पर उनके प्रेरक वाक्य भी छापे जा रहे हैं। जाहिर है आपने ऐसे निमंत्रण पत्र पहले नहीं देखे होंगे। जयपुर के रहने वाले सरकारी सेवा रिटायर्ड अमृत सिंह के बेटे की शादी के निमंत्रण पत्र के कवर पत्र पर डॉ.भीमराव अंबेडकर और बुद्ध की तस्वीरों के साथ ही सभी के मंगल की कामना है साथ ही नमो बुद्धाय, जय बहुजन और जय भीम का नारा लिखा है।

अंदर खोलते ही सबसे पहले बहुजन नायकों की तस्वीरें इस निमंत्रण पत्र की खास बात है। जिस पर कहीं ‘हम भूल ना जाएं जाएं हमारे महापुरूषों और अपने इतिहास को ‘ की हिदायत के साथ ही धर्मिक भगवानों की तस्वीरों के बजाय नारायणा गुरू, संत रविदास, संत कबीर, तथागत बुद्ध,ज्योतिबा फूले, संत गाडगे, संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर और बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की तस्वीरे छपी है।

इस निमंत्रण पत्र के अंदर के पृष्ठों पर एक तरफ डॉ. अंबेडकर का दिव्य संदेश छापा गया है। वहीं दूसरी तरफ विवाह का कार्यक्रम है। लेकिन कहीं भी इसमें किसी भी हिंदू देवी देवताओं की तस्वीर आपको नजर नहीं आएगी।

इस निमंत्रण पत्र के कवर पेज के आखिरी पन्ने पर कांशी राम स्मारक की तस्वीर दी गई है।

गौरतलब है कि 1 फरवरी की शादी का ये कार्ड बहुजन समाज के परिवर्तन को बयां कर रहा है जिसमें मिथकों को तोड़ कर एक नई पहचान बनाने की कोशिश साफ नजर आ रही है। हालांकि ये एक व्यक्तिगत मुद्दा ही है कि कौन किस तरह से शादी का कार्ड छपवाए ।
अब एक ओर कार्ड को देखिए जो नेशनल दस्तक पत्रिका के संपादक अशोक दास की शादी का है जो बिहार राज्य में 12 फरवरी 2017 को होनी है । इस कार्ड में भी तथागत बुद्ध और डॉ भीम राव अंबेडकर की तस्वीरें छापी गई है जो इस कार्ड को बाकी से अलग बनाती है। साथ ही शादी में आने पर आगतुंक आसपास के बौद्ध स्थल भी देख सकें इसके लिए उनका विस्तार से वर्णन किया गया है। इतना ही नहीं इस निमंत्रण पत्र में शादी में पहुंचने वाले मेहमानों के लिए ट्रेनों का विवरण भी दिया गया है। लेकिन गणेश आउट हो गए हैं।

बाबासहाब का सपना भारत बोध्दमय करनेका….शुरू होगया……परिवर्तन आवश्य होगा….बोध्द धम्मही मानवता का सही मार्ग है…
चलो बुध्द की ओर।।। यही सच्चा जीवन मार्ग है ।