फोकस भारत/जयपुर। राजस्थान में गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर को लेकर वसुंधरा सरकार सवालों के घेरे में है। गैंगस्टर के एनकाउंटर के बाद से ही आनंदपाल के परिजन मामले में सरकार और पुलिसअधिकारी और नेताओं पर फेक एनकाउंटर करवाने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। नतीजन गैंगस्टर के एनकाउंटर के 14 दिन बाद भी उसके शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है।
अभी भी आनंदपाल के पैतृक गांव सांवराद में उसका शव डीप फ्रीजर में रखा हुआ है। जिसके चलते इलाके में तनाव भी बना हुआ है। वसुंधरा सरकार इस बात से खुश थी कि लंबे समय पुलिस कस्टडी से फरार आनंदपाल को मार गिराने पर उसका नाम होगा लेकिन सरकार के सामने आनंदपाल मरने के बाद बड़ी मुसीबत बन कर उभरा है।
सरकार अगर सीबीआई जांच की अनुशंसा करती है तो सूबे में सीएम राजे से लेकर कई राजनीति और ब्यूरोक्रेसी के कई दिग्गजों और मंत्रियों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है।जिसके बाद कई दिग्गजों को सीबीआई के सवालों से गुजरना पड़ेगा। अगर ये एनकाउंटर फेक भी नहीं हुआ तब भी इन दिग्गजों को कुछ सवालों का जवाब देना होगा। सूबे पर पहले ही दारिया एनकाउंटर को लेकर कई लोग परेशानी से गुजरे हैं। हालांकि अभी तक हुए घटनाक्रम में आनंदपाल की पत्नी राजकंवर ने रतनगढ़ कोर्ट में जो परिवाद दायर किया है उसके मुताबिक ये मामला अगर सीबीआई को जाता है कई लोगों की परेशानी बढ़ सकती है जिनमें सूबे के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से लेकर राजनेता भी शामिल हैं।
सीबीआई जांच से इनकी बढ़ेगी परेशानी-
1. सीएम वसुंधरा राजे- खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए भी सीबीआई जांच से परेशानी खड़ी हो सकती है। सबसे पहले तो उन्हें इस मामले के चलते केन्द्र के सामने झुकना पडे़गा क्योंकि सीबीआई केन्द्र के अधीन है। साथ ही वसुंधरा राजे इस एनकाउंटर के बाद कई राजपूत नेताओं ने सीएम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाएं हैं। सबसे पहले तो सीएम को डायरेक्ट गृहमंत्री से भी पहले इस मामले की जानकारी कैसे लगी। क्या वसुंधरा राजे ही खूद इस ऑपरेशन को लीड कर रहीं थीं। अगर ऐसा था तो क्यों गृहमंत्री के रहते हुए सीएम को एनकाउंटर जैसे ऑपरेशन को लीड करना पड़ा।जैसे सवाल सीएम की नींद उड़ा सकते हैं।
2. पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़- आनंदपाल की पत्नी की ओर से दर्ज करवाए गए परिवाद में लगाए गए आरोपों के मुताबिक कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद बद्री जाखड़ भी परेशानी में आ सकते हैं। परिवाद में सीधे तौर पर ये आरोप है कि पाली के पूर्व सांसद बद्री जाखड़ और डीजीपी दिलीप जाखड़ ने आनंदपाल को बीकानेर जेल में जान से मारने की कोशिश की थी।
3.गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया- राजस्थान के वर्तमान गृहमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी इस एनकाउंटर को लेकर शुरू से ही सवालों के घेरे में है। परिजनों का आरोप है कि एनकाउंटर का गृहमंत्री को पता ही नहीं था ये कैसे हो सकता है। इतनी बड़ी घटना की सूबे के गृह मंत्री को पता नहीं होना ही अपने आप में संदेहास्पद है। दूसरा गृहमंत्री ने खूद मीडिया में बयान देकर इस मामले की पुष्टि की है कि वे सो रहे थे लेकिन देर रात सीएम ने घटना की जानकारी देते हुए बधाई दी। अब सवाल ये भी है कि गृह मंत्री को सीएम जानकारी दे कर बधाई दे रही है जबकि मामले की जानकारी गृहमंत्री की ओर से सीएम को दी जानी चाहिए थी, यानि की कहीं ना कहीं पुलिस का प्रोटोकॉल सिस्टम तोड़ा गया आखिर ये क्यों हुआ। यानि पुलिस के कुछ चुनिंदा अधिकारी जो एनकाउंटर को लीड कर रहे थे वे सीधे सीएम के संपर्क में थे। वैसे कटारिया पहले भी सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को लेकर चर्चित रह चुके हैं।
4.मंत्री राजेन्द्र राठौड़ – वसुंधरा सरकार के मंत्री राजेन्द्र राठौड़ को लेकर भी राजपूत नेताओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। सामने आए कुछ लोगों के ऑडियो टेप में भी राठौड़ को लेकर चर्चाएं हैं। राठौड़ का नाम पहले ही दारिया एनकाउंटर में भी लिया जा चुका है जिसके चलते उनकी परेशानी फिर बढ़ सकती है।
5. मंत्री युनुस खान – सीएम के सबसे विश्वस्त माने जाने वाले राज्य के मंत्री युनुस खान और आनंदपाल के बीच संबंधों को लेकर कई बार विपक्ष ने भी आरोप लगाए हैं। हालांकि एनकाउंटर के वक्त युनुस खान देश से ही बाहर थे लेकिन जेल में आनंदपाल से मुलाकात को लेकर उन पर पहले से ही विपक्ष के आरोप रहे हैं। बाद में आनंदपाल के फरार होने को लेकर भी युनुस खान चर्चाओं में रहे। दरअसल युनुस खान डीडवाना से विधायक हैं जिन पर कांग्रेस विधानसभा चुनावों में भी आनंदपाल से नजदीकियों केो आरोप लगा चुकी है। आंनदपाल का पैतृक गांव सांवराद हालांकि लाडनू विधानसभा में आता है लेकिन ये पूरा इलाका डीडवाना से नजदीकी के चलते राजपूत समाज में डीडवाना तहसील में आनंदपाल का वर्चस्व वाला माना जाता रहा है। डीडवाना से ही युनुस खान चुनाव जीतते आएं हैं। ऐसे में उन्हें भी कई सवालों से दो चार होना पड़ सकता है कि क्या इस एनकाउंटर की पहले से ही उन्हें जानकारी थी।
एनकाउंटर से जुड़े ये सवाल जो मांग रहे जवाब-
1.आनंदपाल का एनकाउंटर अगर सही है तब भी ये सवाल है जिसका जवाब प्रदेश की जनता को नहीं मिल पाया है कि आनंदपाल के एनकाउंटर आखिर लीड कौन कर रहा था और किसके आदेश से गोली चलाई गई।
2. एनकाउंटर की जानकारी गृहमंत्री से पूर्व सीएम को कैसे लगी? किसके कहने पर पुलिस अधिकारियों ने पुलिस का चैनल तोड़ते हुए सीधे सीएम को जानकारी दी? आखिर सीएम ने मोबाइल पर गृहमंत्री को एनकाउंटर की बधाई क्यों दी? क्या ये पहले से तय था कि एनकाउंटर ही किया जाना है।
3.आखिर एसओजी के इमानदार अधिकारी और आपीएस अधिकारी दिनेश एम.एन. को भी इस एनकाउंटर की जानकारी क्यों नही थी। उन्होंने भी मीडिया को बताया है कि उन्हें बाद में जानकारी मिली की आनंदपाल का एनकाउंटर हो गया है।
4.एनकाउंटर के बाद नियमों को दरकिनार कर आननफानन में पोस्टमार्टम असक्षम अस्पताल में क्यों करवाया गया और किसके कहने पर ऐसा किया गया?
5.एनकाउंटर के बाद जांच दिनेश एमएन जैसे उच्चाधिकारियों को नहीं सौप कर एनकाउंटर में शामिल निचले अधिकारियों को ही किसने सौंपी?
6. आनंदपाल सिंह के दो बार हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में आखिरी इतनी भिन्नता कैसे है?
7.क्या एनकाउंटर से पहले आनंदपाल की किसी की फोन पर बात हुई थी वो आखिर कौन है?
8.सरकार सीबीआई जांच में इतनी देरी क्यों कर रही है?अगर एनकाउंटर पूरी तरह सही है तो फिर सरकार को सीबीआई से जांच करवाने में क्या डर?
9.आनंदपाल के सूबे में किन-किन नेताओं से रिश्ते थे इसका पर्दाफाश क्यों नहीं हो रहा है?
10.क्या ये सही है कि कुचामन के सीआई विद्याप्रकाश चौधरी को आनंदपाल ने एनकाउंटर से कुछ दिन पहले ही महंगी फारच्युनर गाड़ी गिफ्ट की थी। ऐसे में विद्याप्रकाश की जांच अब तक क्यों नहीं शुरू की गई?जबकि विद्याप्रकाश पर खुले आम आनंदपाल के परिजन आरोप लगा चुके हैं। और भी कई सवाल हैं जो आनंदपाल सिंह के मामले को लेकर सोशल मीडिया में चर्चाओं में हैं।