नारी सशक्तिकरण की मिसाल रुक्क्षमणी कुमारी

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फोकस भारत। यूं तो राजपरिवार के लोग हमेशा से ही आम लोगों में आकर्षण का केन्द्र रहे हैं । लेकिन जयपुर के पास ही चौमू के पूर्व राजघराने की बहु रूक्क्षमणी कुमारी अपने काम और समाज सेवा के चलते चर्चाओं में हैं। वे कम उम्र में अपने जीवनसाथी को खोने के बाद टूटी नहीं, बल्कि मजबूती के साथ परिवार को संबल दिया और आज बच्चों और महिलाओं के विकास के लिए अथक प्रयास कर रही है। राजस्थान में रुक्क्षमणी कुमारी की ओर से चलाए जा रहा स्टार शू प्रोग्राम चर्चाओं में रहा है। फोकस भारत की संपादक कविता नरूका ने कई मुद्दों को लेकर रुक्क्षमणी कुमारी से चर्चा की । पेश है प्रमुख अंश –


जिंदगी का यू टर्न
रुक्क्षमणी कुमारी गुजरात के देवधर से ताल्लुक रखती हैं। राजनीतिक महौल रूक्क्षमणी को विरासत में मिला। वे बताती हैं कि उनके दादाजी गुजरात राज्य के स्पीकर रहे और पिताजी ठा. मानसिंह वाघेला गुजरात में विधायक। मेरी शादी राजस्थान के चौमू घराने में हुई। मेरे पति आदित्य सिंह भारतीय सेना में थे। 2011 में कश्मीर में शहीद हो गए। उस वक्त मेरी उम्र महज 32 साल थी। एक छोटे बच्चे और परिवार संभालना बड़ी चुनौती थी। लेकिन मैंने अपने आप को आपको मजबूत किया और परिवार के साथ समाज सेवा की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हूं।


पिता है मेरे आदर्श
रुक्क्षमणी कुमारी कहती है कि मेरे पिताजी मेरे आदर्श रहे है। बचपन में जब मुझे पॉकेटमनी मिलती थी तब उन पैसों से मिठाई और टॉफी खरीदकर मैं बांट देती थी। जो मजा बांटने में है वो कहीं नही। दूसरों से शेयर करके मुझे बेहद खुशी मिलती थी। शायद बचपन से जो आदत मुझमें आई । वो आगे चलकर समाजसेवा में बदल गई है।

स्पोर्ट्स पर ध्यान दे सरकार –
रुक्क्षमणी कुमारी की एजुकेशन अहमदाबाद और उसके बाद अजमेर के मेयो कॉलेज से हुई। स्पोर्टस लवर रूक्क्षमणी कुमारी गर्व के साथ कहती है कि वे स्कूल में हैण्डबॉल टीम की कैप्टन रहीं और नेशनल गेम्स में गुजरात का नाम रोशन किया। उनका मानना है कि सरकार को स्पोर्ट्स पर ध्यान देना चाहिए। वर्तमान में रुक्क्षमणी कुमारी राजस्थान विमन फुटबॉल एसोसिएशन की अध्यक्ष है। और लगातार राजस्थान में विमन फुटबॉल को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक सिर्फ क्रिकेट ही खेल नही है। बाकी खेल भी है जिसमें महिलाओं की भागीदारी जरुरी है और सरकार को इसे लेकर ध्यान देना चाहिए। हमारी लड़कियों को खेल का माहौल देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना हम सब की जिम्मेदारी बनती है।


स्टार फाउंडेशन
रुक्क्षमणी कुमारी को स्टार्स शुरू से ही पसंद थे । लेकिन राजस्थान में उन्होंने साल 2016 में स्टार फाउंडेशन नामक एक गैर लाभकारी संस्था की नींव रखी। स्टार फाउंडेशन महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए काम कर रहा है। रूक्क्षमणी कुमारी बताती हैं कि इस संस्थान के जरिए वे सरकारी स्कूलों में अब तक करीब 5 हजार बच्चों को जूते पहना चुके है। वे कहती हैं कि जब भी शहर या गांव में गरीब बच्चों को वे नंगे पांव ही स्कूल जाते हुए देखती थी तो उन्हें लगता था इन बच्चों की हेल्प होनी चाहिए। उनका चलाया स्टार शू प्रोजेक्ट राजस्थान में सरकारी स्कूलों में तेजी से काम कर रहा है। रुक्क्षमणी कुमारी बताती है कि बच्चों को सिर्फ जूते देने से ही हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती है। हम उन बच्चों से बाते करते है हमारा मकसद सिर्फ शू पैकेट बांटना नही है बल्कि यह एक अवेयरनेस प्रोजेक्ट है।

स्टार महिला रोजगार प्रोजेक्ट
रुक्क्षमणी कुमारी के मुताबिक जल्द ही महिलाओं को रोजगार देने और स्कील डवलपमेंट के लिए उनकी और से स्टार महिला रोजगार प्रोजेक्ट शुरु किया जा रहा है। सबसे पहले इसकी शुरुआत चौमू के आनन्दपुरा गांव से की जा रही है। बाद में दूसरों गांवों को इससे जोड़ा जाएगा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्किल्स डवलपमेंट पर काम किया जाएगा। जिसमें कई तरह के कोर्सेस रखे जाने की उनकी योजना है जिसमें कैंडल मेकिंग, सिलाई , साबुन बनाना जैसे कुटीर उद्दोग का बढ़ावा देने की दिशा मे काम किया जाएगा। महिलाओं को हाथों हाथ अपने काम का मेहनताना भी दिया जाएगा। अगर महिलाएं सशक्त बनेगी तो विकास में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले पाएगी और वे फिर किसी की मोहताज नहीं रहेगी।


महिला बोलेगी, तो बदलेगी सोच
महिला जागरूकता को लेकर रुक्क्षमणी कुमारी नजरिया बिल्कुल साफ है। उनका मानना है कि अगर सरकारें वुमन सेफ्टी नहीं दे पाती है तो महिलाओं को वोट नहीं देना चाहिए। जब तक महिला बोलेगी नही तब तक उनके प्रति समाज और सरकारों की सोच नही बदलेगी। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरुक होना होगा और अत्याचार के प्रति आवाज उठानी होगी। तब ही सही मायनों में महिला सशक्तिकरण हो सकेगा।

सितारे है दिल के करीब
रुक्क्षमणी कुमारी बताती है कि मुझे बचपन से ही स्टोर्स पसंद है। आसमान में मुझे तारों को देर तक निहारना शुरू से ही अच्छा लगता था। फिर जब मेरे पति शहीद हो गए तब अपने बेटे को हमेशा यहीं कहती तुम्हारे पापा स्टार थे। आज भी मैं आसमान में स्टार्स देखना नहीं भूलती। इसिलिए जब मैंने जरुरतमंदो की सहायता के लिए गैर सरकारी संगठन बनाया उसका नाम स्टार फाउंडेशन रखा। यह मेरे पति को समर्पित है। और यही वजह है कि मैंने हाथ पर स्टार्स गुदवा रखे हैं ।

मौका मिला तो राजनीति मैं आऊंगी –
राजनीति में आने के सवाल पर वे सोचकर बोल पड़ती है कि चौमू का विकास मेरी पहली प्राथमिकता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से कूछ ही दूरी पर होने के बावजूद चौमू का विकास नहीं हो पाया है। और चौमू को वो पहचान नहीं मिल पाई जिसका वो हकदार था। इसका खामियाजा आम आदमी को भी भुगतना पड़ता है कि उनके इलाके में मूलभूत समस्याओं पर भी पूरी तरह ध्यान नहीं दिया जाता है। वे कहती है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुझे मौका मिला तो जरुर मैं राजनीति में आऊंगी।

मैं हर दिन योगा करती हूं
रूक्क्षमणी कुमारी खिलाड़ी होने के नाते शुरू से ही अपनी सेहत को लेकर संजीदा रही है। वे कहती है कि खेल हमें जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं और मैने फिट रहना स्कूल टाइम से ही खेल के जरिए सीखा। तभी से हमेशा योगा और मेडिटेशन मेरी दिनचर्या का हिस्सा है। आपके माइंड को स्थिर रखने और ऊर्जा के लिए यह जरुरी है। तनावभरी जिंदगी में ये आपको भरपूर सहोयग करता है। योग आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से आपको मजबूत करता है।