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Viral Audio : ‘एनकाउंटर से बचना है, तो BJP नेता को मैनेज कर लो’, जानिए UP पुलिस कैसे करती है एनकाउंटर मैनेज

प्रतीकात्मक फोटो

फोकस भारत। उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के लिए लगातार एनकाउंटर जारी है, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए तेजी से वायरल हुए इस ऑडियो क्लिप ने यूपी में एनकाउंटर के नाम पर चल रहे खेल को बेनकाब कर दिया है। एक हिस्ट्रीशीटर और पुलिस अधिकारी के बीच की बातचीत के ऑडियो से खाकी और गुंडों के बीच साठगांठ का पर्दाफाश हो गया है। दरअसल कुछ ही दिन पहले झांसी में लेखराज और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी। करीब आधे घंटे की फायरिंग में लेखराज अपने साथियों और बेटों के साथ भागने में कामयाब रहा था। इस एनकाउंटर के बाद मऊरानीपुर थाना प्रभारी सुनीत कुमार और हिस्ट्रीशीटर लेखराज के बीच टेलीफोन पर यह बातचीत हुई। वायरल हुए इस ऑडियो में झांसी के मऊरानीपुर थाने के प्रभारी सुनीत कुमार और इलाके में आतंक का पर्याय बन चुके पूर्व ब्लॉक प्रमुख लेखराज के बीच बातचीत है। वायरल हुए इस ऑडियो ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस द्वारा किए जा रहे एनकाउंटर के तरीके पर सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल उठने लगे हैं कि क्या योगी की पुलिस एनकाउंटर को भी मैनेज कर रही है? दूसरा अहम सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस अपनी मनमर्जी के मुताबिक, जिसे चाह रही है उसे ठिकाने लगा रही है और जिसे चाह रही है बचा ले रही है? क्या यूपी हिस्ट्रीशीटर एनकाउंटर में अपनी जान बचाने के लिए नेताओं को खुश कर रहे हैं? कम से कम इस बातचीत से तो यही नजर आता है। करीब 8 मिनट 33 सेकंड के इस ऑडियो ने पुलिस महकमे में खलबली मचाकर रख दी है

पढ़िए वायरल हुए इस ऑडियो की पूरी बातचीत-:

SHO सुनीत कुमार- आपके ऊपर 60 मुकदमा है. आप एनकाउंटर के सबसे फिट केस हैं पूरे यूपी में. आप मान लीजिए अपने आप को, हां. ये अपने आपको मानकर चलिए आप. भाजपा सरकार है अब आपकी मदद कौन करेगा, ये आप जानो कि आप अपने आपको कैसे बचाते हो. आप, आपका लड़का, आपके चार लड़के, आपके जितने गुर्गे हैं बीस पचास सब, मतलब कि सब. सिस्टम हैं ना, समझ ही नहीं रहे हो

हिस्ट्रीशीटर लेखराज- हां, सब मारे जाएंगे

सुनीत कुमार- हां, दो मिनट में मार देंगे पट पट पट. अब सरकार के हिसाब से सिस्टम को देखते हुए अपना काम कीजिए

लेखराज- अरे मदद करो यार, मदद करो

सुनीत कुमार- आप मेरी मजबूरी समझिए, ठीक. मैंने आपको बता दिया कि संजय दुबे जिलाध्यक्ष ठीक, राजीव सिंह परीक्षा, दोनों आदमी को मैनेज कीजिए

लेखराज- सुनील सिंह किसी से कम हैं हैं क्या

सुनीत कुमार- अरे नहीं नहीं, आप मेरी बात सुनिए, मेरी बात सुनिए, प्लीज. आप मेरी बात समझिए

लेखराज- तो तुम्हें क्या डाकखाने ही भेज दें. डाकखाने ही भेज दें इंस्पेक्टर बनाकर

सुनीत कुमार- अरे हम लोग तो अपराधी ही रहे शुरू से और रहेंगे, जिंदगी भर अपराध किए, जाने कितनी हत्याएं हैं हाथ में, जाने कितनी बार जेल काटे. सारा सिस्टम है अपने पास. कोई टुच्चा लभंगा ना थोड़े ही हैं. देखिये इतिहास हमारा बहुत खराब है और भविष्य अच्छा है, हम ये कहना चाहते हैं

लेखराज- अरे भैया हमारी मदद करो बस, जो है…

सुनीत कुमार- अरे मदद आपकी मदद ऊपर वाला कर रहा है, ठीक. मेरी बात सुनिए, आप बढ़िया आदमी हैं, अच्छे आदमी हैं, सिस्टम वाले आदमी हैं

लेखराज- नहीं, नहीं! इतने दिन आप रहे, कोई गलत काम है हमारा, आप बताइए?

सुनीत कुमार- गलत काम कहीं कुछ नहीं होता है, आप समझिये… नहीं.. मेरी बात को. पिछले 14 सालों में भाजपा सरकार से पहले गितने एनकाउंटर हुए जिले में, प्रदेश में, नहीं हुए? बसपाई, सपाई सब सिस्टम चल रहा है. आप समझ ही नहीं रहे हैं किसी चीज को. दौर है, दौर तो दौर ही ना होता है, फिर तो झोंको अब, झोंको तो झोंको सब सिस्टम है. सिस्टम तो ऊपर से नीचे… एसटीएफ भी है, सब लगे हैं पूरी टीम है. अब अगला नंबर आपका है. का बताएं आपको अब

लेखराज- अच्छा, अच्छा

सुनीत कुमार- आपकी लोकेशन वोकेशन सब ट्रेसआउट हो रही है. और अगर दस बीच पचास आदमी आपके साथ नहीं होंगे तो कोई बड़ी बात नहीं है लोग लगे हुए हैं

लेखराज- अच्छा! सब मार दिए जाएंगे

सुनीत कुमार- आप देखो, चीजों को समझो… अच्छा आदमी वही होता है, होशियार, जो समय के साथ खुद को ढाल लेता है

लेखराज- सही बात है

सुनीत कुमार- अब समय विपरीत तो अपने हिसाब से भैया

लेखराज- अच्छा तो अधिकारी कह रहे हैं कि एनकाउंटर कर दो

सुनीत कुमार- अरे भाई! अब फोन पर तो आपको सब चीज नहीं बता सकते. चीजों को समझिए आप. आप बहुत ही बुद्धिमान आदमी हैं, 60 साल उमर हो गई आपकी. 70 मुकदमा, 80 मुकदमा, 90 मुकदमा है. भगवान चाहेगा कि ऐसा कुछ ना हो जाए, मतलब कोई बात ना हो जाए कि बच्चे अनाथ हो जाएं. सबके बच्चे अनाथ हो जाएं

लेखराज- अरे भाई, चलो भाई! मदद करो यार तुम तो यार

सुनीत कुमार- अरे हम क्यों फोन पर बात कर रहे हैं आपसे

लेखराज- तुम्हारी मदद जिंदगी में ना कर पाएं, लेकिन तुम तो मदद करो यार, नाती नाता हैं, सब हैं…

सुनीत कुमार- अरे वही तो, सब आफत हो रही है ना, समस्या तो वही है. हम तो खुद करना चाहते हैं. इसलिए खाली हाथ हम गए. सुबह सुबह खाली हाथ हम गए. चीजों को देखिए, अच्छा बुरा कुछ भी है

लेखराज- जी, जी…

सुनीत कुमार- सब राजकाज है. समय, परिस्थिति अच्छी-बुरी आती जाती हैं. ठीक है! सबका समय होता अच्छा बुरा

लेखराज- तो संजय दुबे लगे हैं. अरे यार, इंस्पेक्टर इतना बड़ा है

सुनीत कुमार- अरे नहीं! सब कुछ, सब कुछ है. आप समझो, बट बट मैनेजमेंट जैसे सपा सरकार थी, सपा सरकार में भी आप जेल गए, गए कि नहीं, गए बताइये

लेखराज- तो तुम्हें डाकखाने ही भेज दें क्या?

सुनीत कुमार- अरे! आप मेरी बात सुनिए, सपा सरकार में आप जेल गए कि नहीं, पप्पू सेठ के रहते हुए. हां या ना में बताइए?

लेखराज- हूं, हूं. नौकरी बचाते हैं सब लोग

सुनीत कुमार- नौकरी कहां, नौकरी कोई नहीं बचाता, नौकरी वौकरी तो सब ऊपर वाले के सहारे चलती है