फोकस भारत/लखनऊ।उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद से ही दलितों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं। योगी की पुलिस भी दलितों पर अत्याचार की घटनाओं में कार्रवाई करने के बजाय अपराधियों को ही बचाने में जुटी है। सहारणपुर के बाद यूपी के मुरादाबाद में दलित छात्र गुलशन की हत्या मामले को लेकर भी यूपी पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है। लखनऊ के यमवन कॉलोनी में रहने वाले दलित मिशनरी किशोर कुमार पगला के बेटे गुलशन की हत्या दबंगों ने हाल ही में की थी। जिसके बाद से ही पगला बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं लेकिन उनकी सुनवाई योगी राज में नहीं हो पा रही है। बेटे की मौत से गमगीन किशोर कुमार पगला आज भी प्रशासन से न्याय की आस लगाए बेठे हैं लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की चौखट पर रोज किशोर कुमार अपने बेटे की आत्मा को न्याय दिलाने और हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए माथा पीट रहे हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

कैसे हुई दलित छात्र गुलशन की हत्या –
न्याय की आस में पथराई आंखे लिए मृतक गुलशन के पिता किशोर कुमार कहते हैं कि 23 जून की बात है मैं बाबा साहेब के संदेशों को गीतों में गाकर लोगों को जागरूक करता हूं और उस दिन भी बिहार की तरफ कार्यक्रम के सिलसिले में गया हुआ था। मेरा बेटा गुलशन जो कि बीटेक का स्टूडेंट था घर पर सोया हुआ था। लेकिन अचानक रात को घर से गायब हो गया। किशोर आशंका जताते हैं कि हो सकता है उसका अपहरण हुआ हो। सुबह 4 बजे के करीब गुलशन की मां जब जगी तो उसने देखा बेटा अपने बिस्तर पर नहीं था। फोन करने पर गुलशन ने कहा मैं कहीं हूं, जल्द आ जाऊंगा। उसके बाद उसका मोबाइल स्वीच ऑफ हो गया और बात नहीं हुई। लेकिन जब गुलशन नहीं लौटा तो गुलशन की मां ने थाने में इसकी इतला दी। लेकिन थानाधिकारी ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई और गुमशुदगी दर्ज करने के बजाय घरवालों को ये कह कर वापिस भेज दिया कि बच्चा है कहां जाएगा आ जाएगा।
किशोर कुमार पगला के मुताबिक पहले हमारे पड़ौस में ही रहने वाली महिला शालू सिंह का का एक मैसेज 27 जून मेरी बेटी सुमन भारती के मोबाइल पर आया कि लोग आएंगे मारने। इसके बाद उसी रात करीब बजे शालू सिंह के मोबाइल से ही बेटी के मोबाइल पर एक फोन आया जिसमें बेटे गुलशन की आवाज थी। वो कह रहा था मम्मी से बात कराओ। जैसे ही बेटी फोन को चालू रखकर उसकी मम्मी से बात कराने के लिए उठी। वह फोन कट गया और फिर कभी उस नंबर से फोन नहीं आया और ना ही उस नंबर पर वापिस फोन लगा।

उस दिन के बाद 7 जुलाई को महू जनपथ के चिरैयाकोट थाने से फोन आया। पुलिस ने बताया कि आपके बेटे गुलशन की लाश मुरादाबाद के मझौला थाने में रखी है। जिसकी पहचान आधार कार्ड से हुई है। किशोर को जब ये पता चला तो सबसे पहले उन्होंने अपनी पत्नी सपना से बात कर गुलशन के बारे में पूछा। तब उन्हें बेटी ने पूरी बात बताई। किशोर कुमार पगला के मुताबिक इस घटना के बाद उनकी पत्नी सपना ने शालू सिंह को फोन कर गुलशन के बारे में पूछा तो शालू सिंह ने बताया कि उसने गुलशन को मौसी के यहां छोड़ दिया अब उन्हें पता नहीं है कि वह कहां है।
गुलशन की डेड बॉडी से उठे सवाल –
गुलशन के पिता का आरोप है कि पुलिस ने पूरे मामले की सच्चाई को दबाते हुए हत्या को आत्महत्या में तब्दील कर दिया। गुलशन की लाश पर चोट के निशान थे जो ये बताते हैं कि उसकी मौत आत्महत्या से नहीं हुई वरन उसे मारा गया। किशोर ये भी आरोप लगाते हैं कि उनके बेटे की लाश जिस घर से बरामद हुई वह कई दिनों से बंद था और उसके बाहर ताला लगा था। ऐसे में ये आत्महत्या कैसे हो सकती है। गुलशन को लेकर शालू सिंह की क्या भूमिका है और पुलिस ने अब तक शालू सिंह से पूछताछ क्यों नहीं की।
पुलिस का पक्ष-
पूरे मामले को लेकर फोकस भारत से बात करते हुए मुरादाबाद के एसएसपी प्रत्येंद्र सिंह ने बताया कि जिस दिन ये शव पुलिस ने बरामद किया था मैने बतौर एसएसपी मुरादबाद में उसी दिन काम संभाला था ऐसे में पूरी जानकारी मैं अभी नहीं दे सकता फिर भी आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि पूरे मामले की जांच निष्पक्षता से होगी और जो भी दोषी हैं उन्हें पुलिस कड़ी सजा दिलवाएगी।