अनकही दास्तान: राजनीति में दोस्ती की मिसाल डॉ. दिगम्बर सिंह और राजेन्द्र राठौड़

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फोकस भारत। राजनीति में कहते है कि कोई किसी का दोस्त नहीं होता है। यहां सब मौकापरस्त होते है। लेकिन राजस्थान की राजनीति में दिवंगत डॉ दिगम्बर सिंह और राजेन्द्र राठौड़ ने दोस्ती की मिसाल कायम की है। इनकी दोस्ती के किस्से हमेशा चर्चा के विषय रहे। क्योंकि दोनों नेताओं ने एक -दूसरे कि मुश्किल घड़ी में हमेशा साथ दिया।

राजस्थान के पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता डॉ दिगम्बर सिंह का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके अजीज दोस्त राजेन्द्र राठौड़ दोस्त के निधन के बाद सिसकते रहे अस्पताल में आम तौर पर भाजपा पर किसी तरह का भी कोई सियासी संकट आया हो राजेन्द्र राठौड़ बड़ी आसानी से अपने तर्कों से सरकार को बचाने का काम करते नजर आतें हैं। लेकिन आज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ अस्पताल में अपने दोस्त के निधन के बाद सिसकते नजर आये। आम तौर पर किसी भी मामले पर मीडिया पर मजबूती से सरकार का पक्ष रखने वाले राठौड़ मीडिया के सामने बोल भी नहीं सके। किसी अपने को खोने का दर्द राठौड़ की आंखो में साफ नजर आ रहा था।

दरअसल, राजेन्द्र राठौड़ की दिगम्बर​ सिंह के साथ दोस्ती जग जाहिर है। दिगम्बर सिंह ने जब अमेरिका में कैंसर का इलाज करवाया था तो राठौड़ अमेरिका भी गये थे और आज भी सुबह चार बजे से वो अस्पताल में ही थे। राजेन्द्र राठौड़ दिगंबर सिंह को अपना भाई मानते थे, वे कई बार मंचों से ये भी कह चुके थे मैं सौभाग्यशाली हूं कि दिगंबर मेरे दोस्त हैं। निधन पर राठौड़ ने कहा, ये मेरे लिए पारिवारिक क्षति है, उनकी क्षति को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। डॉ. सिंह एक अच्छे इंसान, चिकित्सक और राजनीतिज्ञ होने के साथ साथ एक बेहतर दोस्त के रुप में जाने जाते है। दारिया एनकाउंटर मामले में जब राजेन्द्र राठौड़ को जेल हुई थी, उस समय डॉ. सिंह अपने दोस्त के साथ मजबूती के साथ खड़े नजर आए थे।

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