सुमधुर की महफिल में जमकर बरसा काव्यरस

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फोकस भारत। नवांकुर कवियों को प्रोत्साहित करने में अग्रणी संस्था सुमधुर का पोएट्री रिसाइटल पर एक विशेष कार्यक्रम जयपुर के राजस्थान चैंबर ऑफ़ कॉमर्स भवन एम आई रोड, जयपुर के सभागार में 8 अक्टूबर रविवार को दोपहर 3 बजे रखा गया। आयोजक प्रवीण नाहटा ने बताया कि इसमें बरेली के ख्यातनाम युवा शायर मध्यम सक्सेना, इंदौर के युवा गीतकार अमन अक्षर तथा इटावा के डॉ. राजीव राज विशेष रूप से शामिल हुए। आरम्भ में कवियों को शॉल ओढ़ा कर सुमधुर काव्य सम्मान से सम्मानित किया गया। मेहमान कवियों के काव्यपाठ पर लोगों की जमकर दाद मिली। शायर मध्यम सक्सेना ने इस ग़ज़ल के जरिये लोगों को झूमने पे मजबूर कर दिया।

जितनी दिल की पहरेदारी होती है।
उतनी ही दिल को बीमारी होती है।।

दिल का रस्ता बिलकुल सीधा होता है।
दांये – बाएं दुनियादारी होती है।।

उन आँखों को काँटे भी गुल लगते हैं।
जिन पर तेरी ख़ुशबू तारी होती है।।

हम को सब से नज़र मिलाना आता है।
कुछ लोगो को इज़्ज़त प्यारी होती है।।

इसके बाद कवि अमन अक्षर ने

“तोड़कर कोई मानक नहीं आए है,
अपने हिस्से कथानक नहीं आए है,
जिन्दगी ने मुसलसल पुकारा हमें,
हम यहां तक अचानक नही आए है।।” इसके बाद डॉ राजीव राज़ ने
निकल आया अचानक ज्यों रुपहला चाँद बादल से।
कली ज्यों मुस्कराई है छुअन पर ओस के जल से।
उमस के बीच में सहसा लगी ठण्डी हवा बहने,
बजी है रागिनी सुमधुर तुम्हारी शोख पायल से।।
सुनाया तो महफिल में रंग जम गया।

इसके बाद कवि कर्नल अमरदीप ने
क्या तुम मेरी कविता पढ़ोगी
ढूँढोगी अपने अस्तित्व को
इन बिखरे बिखरे शब्दों में
और आत्मसात कर पाओगी
चंद पंक्तियों की सीमित पूँजी को
क्या तुम वाकई रह पाओगी
मेरी भावनाओं के दायरे में बँधकर
और जीवित कर दोगी
सुबह देखे गए लाख सपनों को…..
इसके बाद कवि भूदेव शर्मा ने
मैं कौन हूँ ,क्या हूँ,मेरा वजूद क्या है
ये मेरे गीत ही बतलाऐंगे
इस तरह गाऐंगे आप की महफिल में
आप के दिलों में अपनी यादें छोड जाऐंगे …..

इसके बाद माला रोहित कृष्ण नँदन ने प्रेम गीत
शब्दों में नहीं कह पाऊंगी
जो दिल में बसा है प्यार तेरा….

कवि रोहित कृष्ण नन्दन ने
प्रेम गीत
तुम्हें हमने सनम जब से निगाहों में छुपाया है
लबों ने गीत चाहत का तरन्नुम में सुनाया है,

कवि सोनू श्रीवास्तव ने
वो दिन भी याद है मुझको जो उसका साथ होता था,
वो मेरे पास होती थी मैं उसके पास होता था,
करोड़ो भीड़ में भी वो मुझे पहचान लेती थी,
वो मेरी खास होती थी मैं उसका खास होता था,

कवि सूर्यप्रकाश उपाध्याय ने
रातों की नींद उड़ती है,दिन का चैन नहीं बचता
इसीलिए ये इश्क मोहब्बत का खेल नहीं जँचता
अकेले हैं हम तो हँसी ना उड़ाओ मोहतरमा
गाँव का देसी घी है ये सबको नहीं पचता।।

कवि अरविन्द कुमावत ने
जिस जिसका आसमां उजड़ जाए
आए और ज़मीन से जुड़ जाए
हम सिक्के उछालें और इस तबीयत से
कि तारे एक एक कर झड़ जाएं

इसके बाद कवि के.के.सैनी ने
मोहल्ले वाले भी अब बतियाने लगे है
इश्क अपने भी अब फुसफुसाने लगे है
घरवालों को भला अब कौन समझाये
वो भी कुण्डलियाँ अब मिलाने लगे है

इसके बाद कर्नल अमरदीप सिंह,तपिश खंडेलवाल,शुभम शुक्ला,शक्ति बारेठ,अजीत शाह, शहरयार बेग,पीयूष शर्मा,जितेंद्र उत्साही,देवान्शी त्रिपाठी,ऋषि शर्मा,सुनील कुमार जश्न,शिवम तिवारी,अभिनव सक्सेना बरेली,मीनाक्षी माथुर,नीरा जैन,राजेश भटनागर,प्रियंका राजपुरोहित,निकेश कुमार,अवधेश दाधीच,प्राँजु,कमल किशोर,डॉ.निकिता त्रिवेदी,शिवानी जयपुर,हर्षित कुमार जोशी,संजय फौजदार सहित तक़रीबन 50 कवियों ने अपनी मनभावन काव्य प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रथम सत्र में प्रवीण नाहटा तथा दूसरे सत्र में सूर्यप्रकाश उपाध्याय ने किया।

कार्यक्रम में स्थानीय व अन्य शहरों से आये कवियों के अलावा श्रोताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। इसके लिए किसी प्रकार का कोई भी रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं रखा गया था। इस कार्यक्रम में तक़रीबन 130 लोग शिरकत करने आये। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य नवांकुर कवियों की प्रतिभा को एक मंच देना है। आने वाले समय में सुमधुर संस्था के कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं जिनकी जानकारी समय समय पर अवगत करा दी जायेगी।

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