मैं कुलधरा, सन्नाटे की चादर ओढ़कर सोता हूं, आओ मेरे पास

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जैसलमेर। एक दीवान के पाप और ब्राम्हणों के श्राप के चक्रव्यूह में लगभग 150 सालों से फंसा कुलधरा रोजाना जागता है और रूहानी ताकतों के साथ रहस्यमीय आवाजों को समेटे सन्नाटे की चादर ओढ़कर सोता है। ये गांव खंडहरों में खड़ा है, रूहानी ताकतें यहां अपने होने का अहसास कराती हैं और इशारों में चले जाने का हुक्म भी देती हैं।

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कुलधरा में बिताई सिकंदर की वो रात

दुनिया के प्रमुख हॉन्टेड स्पॉट में जगह बना चुका ये गांव जैसलमेर जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। 150 सालों से वीरान पड़ा ये गांव भूतों का निवास स्थान बन चुका है। इस गांव में रात में यहां जाने के नाम पर ज्यादातर लोगों के कदम रुक जाते हैं। पत्रकार सिकंदर शेख ने मिथकों की पड़ताल करने क लिए दिल्ली से आई पेरानॉर्मल सोसायटी की टीम के साथ कुलधरा में एक रात बिताई।

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अलौकिक शक्तियों के बारे में रिसर्च करती है पेरानॉर्मल सोसायटी

पेरानॉर्मल सोसायटी एक ऐसा संगठन है जो देश में अलौकिक शक्तियों के बारे में रिसर्च करता रहता है। पेरानॉर्मल सोसायटी को कुलधरा में भूतों की मौजूदगी होने की जानकारी पहले से ही थी, ये टीम इसकी पड़ताल के लिए जैसलमेर पहुंची। दिल्ली से आई इस टीम के लीडर गौरव तिवारी के साथ गुजरात से बिंदिया, शिरीष व दिल्ली से पारितोष, चिन्मय तिवारी व कई सदस्य भूतों की उपस्थिति जांचने के लिए उपकरणों के साथ यहां पहुंचे।

इलेक्ट्रोमैगनेटिक डिवाइस ‘‘ के-2 मीटर‘‘,  तापमान में उतार चढ़ाव के लिए ‘‘ इंफ्रारेड थर्मोमीटर, वातावरण में मौजूद आवाजें रिकॉर्ड करने के लिए ‘‘ ई.वी.पी डिवाइस‘‘ सहित कई उपकरण लेकर ये टीम कुलधरा पहुंची। टीम कुलधरा में रात को ठीक 12:15 बजे प्रवेश कर गई,  मंजर बड़ा ही  खौफनाक था, रोशनी के नाम पर हमारे पास टॉर्च थी।

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यहां कोई है, जो हमसे बात करना चाहता हैं

रिसर्च टीम के सदस्यों ने कुलधरा में अपने उपकरणों से काम करना शुरु कर दिया। डिवाइसों की असामान्य रीडिंग, तापमान में उतार- चढ़ाव से लग रहा था कि यहां पर कोई एनर्जी जरूर है, हम आपस में कहने लगे कि यहां कोई है, जो हमसे बात करना चाहता हैं।  हमने अदृश्य शक्ति से कहा कि उन्हें नुकसान पहुंचाने नहीं आए हैं, यदि वे कुछ कहना चाहते हैं तो हमसे बात करें, इतना कहने के बाद थोड़ी देर में सबकुछ सामान्य हो गया, सारे उपकरण अपने ढंग से काम करने लगे, लेकिन वहां के माहौल में डरावनापन था।

हम 40 आत्माएं हैं

थोड़ी देर में हम मंदिर की सीढ़ियों पर पहुंचे, वहां हमारा सामना एक अदृश्य शक्ति से हुआ, पहले की तरह यहां से आवाजें आने लगी।  गौरव के पास मौजूद डिवाइस ‘‘ के-2 मीटर ‘‘ ने भी संकेत देने शुरु कर दिए, डिवाइस की लाइटें कभी बंद और तो कभी जलने लगी, सचमुच डरावना माहौल बन गया था, सब परेशान हो गए।

हालांकि गौरव और शिरीष जो तमाम हॉन्टेड स्थानों पर जा चुके थे, इनके चेहरों पर कोई डर नहीं था, बाकी के चेहरों पर अजीब सा डर साफ नजर आ रहा था। टीम के सभी सदस्य आपस में कह रहे थे कि यहां कोई है, फिर एक आवाज आई कि हम 40 आत्माएं हैं।

कुलधरा भ्रमण के दौरान हमें कई स्थानों पर किसी चीज के होने का अहसास होता रहा। पेरानॉर्मल सोसायटी के लोग बहादुर थे, जो संकेत मिलने पर उसी दिशा में दौड़कर पहुंच जाते और पूछते यहां कोई है ? कोई हमसे बात करना चाहता है ? कुलधरा के रहस्य का पता लगाने के लिए हम रात को कई घंटे वहां रुके, हमें पूरा विश्वास हो गया कि यहां रूहानी ताकतें हैं।

पालीवालों के पलायन के बाद भूतों का बसेरा

भूत-प्रेत के किस्से कहानियां पर कोई विश्वास करता है, कोई नहीं करता है और अब हम आपको बताते हैं पालीवालों के पलायन किए गए उस कुलधरा का इतिहास के बारे में, जहां आपको सामने खड़ा हुआ भूत भी मिल सकता है, जो आपसे बात करने लग जाए। इस गांव को श्रापित माना जाता है, रात में यहां कोई ठहरने की सोचकर ही कांपने लगता है, कहा जाता है कि इस गांव में भूतों का बसेरा है।

अय्यास दीवान ने किया वीरान !

कुलधरा के वीरान होने की वजह एक दीवान को माना जाता है। करीब 150 साल पहले जैसलमेर रियासत में सालम सिंह नाम का एक अय्यास दीवान हुआ करता था, इस दीवान ने एक बार इस गांव की खूबसूरत लड़की को कुएं पर पानी भरते देख लिया और वह उसकी सुन्दरता से इतना मोहित हो गया कि गांववालों को लड़की से शादी करने का प्रस्ताव दे डाला।

इज्जत की खातिर एक रात में 84 गांव खाली

कुलधरा के लोगों को दीवान का प्रस्ताव नागवार गुज़रा। गांव के ब्राह्मणों ने अपनी बेटी की शादी इस अय्यास से नहीं होने देने की ठान ली, लेकिन ये बेचारे किसान उस दीवान से लड़ नहीं सकते थे, इसलिए इन्होंने फैसला किया कि हम सब अपनी इज्जत की खातिर गांव को ही छोड़ देंगे और एक रात में ही कुलधरा के साथ 84 गांव खाली हो गए।

हमारे बाद यहां कोई बस नहीं सकेगा

ये साधन संपन्न लोग एक रात में ही अपने हज़ारों परिवारों को लेकर पलायन कर गए और जाते वक्त एक ऐसा श्राप दे गए जो ये इलाका आज भी झेल रहा है। ये श्राप था कि, “हमारे बाद यहां कोई बस नहीं सकेगा ” और ऐसा ही हुआ, आज तक इन गांवों में कोई बस नहीं सका  और रात को तो यहां कोई रुकता भी नहीं है।

बारातियों को लूटा और मार दिया

वरिष्ठ इतिहासकार नंदकिशोर शर्मा इस बारे में एक बताते हैं कि ” जब जैसलमेर का व्यापार खत्म हो गया तो यहां डाकुओं का बोलबाला चरम पर था, वे इतने निर्दयी थे कि धन के लिए लोगों के हाथ-पैर तक काट देते थे। एक बार इन लुटेरों ने एक बारात को लूटा और सभी बारातियों को मार दिया, जिनकी आत्माएं यहां भटकती हैं।

जब ब्राह्मण ने देखे उल्टे पैर

नंदकिशोर शर्मा एक और उदाहरण देते हुए कहते हैं कि, ” एक ब्राहमण जब कई साल पहले रात में यहां से होकर गुज़रा तो वह बारात देखकर वहां रुक गया। बारातियों ने उसका स्वागत किया, लेकिन जब ब्राहमण ने उन लोगों के पैरों की तरफ देखा तो वो सब उलटे मुड़े हुए थे, तब उसे लगा कि वह भूतों की बारात में फंस गया है। जब आत्माओं को ये लगा कि ब्राहमण उनका राज जान चुका है, तो उन्होंने उसे बहुत सारी दक्षिणा देकर इस शर्त के साथ छोड़ दिया कि वो उनके पैरों की तरफ नहीं देखेगा, देखेगा तो सारी दक्षिणा कोयला बन जाएगी। थोड़ी दूर जाने पर जब ब्राह्मण ने पलट कर देखा तो वहां से बारात गायब हो चुकी थी,  ऐसे कई प्रमाण कुलधरा के बारे में मिलते हैं।

विमल भाटिया की आंखों में कैद वो पल

अपवाद छोड़ दें तो पत्रकार का पेशा कभी अंधविश्वास पर यकीन नहीं करता। जैसलमेर के वरिष्ठ पत्रकार विमल भाटिया को कुलधरा में ऐसा भयानक अनुभव हुआ कि वो आज भी उस घटना को याद कर कांपने लगते हैं। कुलधरा की सच्चाई जानने के लिए दो साल पहले वो जब इस जगह पर गए तो उनसे किसी ने टॉर्च मांगी, उन्होंने टॉर्च दी तो अदृश्य शक्ति टॉर्च के साथ बावड़ी में गिर गई। आज भी विमल उस पल को याद कर एक ही बात कहते हैं “वहां कुछ तो है।”

महारानी साहिबा के लिए सुझाव

रहस्यों की गुत्थी सुलझाने के लिए कुलधरा बहुत लोग जाते हैं। जैसलमेर विकास समिति इस हॉन्टेड प्लेस के रख-रखाव का कामकाज देखती है। वैसे राजस्थान सरकार ने भी बजट में कुलधरा के कायाकल्प के लिए लगभग चार करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, वो अलग बात है कि ये बजट कुलधरा तक कितने समय में पहुंचेगा। वहीं जयपुर के पास भी भूतों का भानगढ़एक हॉन्टेड जगह है, जहां रात में जाने पर पाबंदी है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चाहें तो गंभीर होकर कुलधरा और भूतों का भानगढ़ को पर्यटन में खास जगह देकर राजस्व बढ़ोतरी के अलावा लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है। हमारा सिर्फ सुझाव है, बाकी करना तो सरकार को ही है।

गाड़ी पर बच्चों के हाथों के पंजों के निशान

अब फिर से पेरानॉर्मल सोसायटी की जांच पर लौटते हैं। ये टीम अपने उपकरणों से जांच रही थी कि क्या वाकई यहां आत्माएं रहती हैं तो एक चौंकाने वाला दृश्य भी सामने आया कि इनकी एक गाड़ी पर बच्चों के हाथों के पंजों के निशान बन गए, जबकि वहां हमारे साथ कोई भी बच्चा नहीं था, इस बात को लेकर भी सनसनी फैल गई।

पेरानॉर्मल सोसायटी के टीम लीडर गौरव तिवारी का कहना है कि वे अब तक विश्व के 500 हॉन्टेड जगह देख चुके हैं, अकेले अमेरिका में करीब 200 हॉन्टेड स्थानों की यात्रा कर चुके हैं और भारत में भी लगभग 250 अदृश्य अलौकिक शक्तियों वाले स्थानों पर जा चुके हैं। ऐसी कई जगहों पर उनका इन शक्तियों से आमना- सामना भी हुआ है, उपकरणों की डिवाइसों ने इन शक्तियों की आवाजें रिकॉर्ड की हैं और फोटो भी लिए हैं।

तिवारी दावे के साथ कहते हैं कि कुलधरा में 100 प्रतिशत अलौकिक शक्तियों का बसेरा है, वे इस स्थान पर पहले भी आ चुके हैं, उस समय भी उन्हें शक्तियों की मौजूदगी का अहसास हुआ था। इस बार भी कुलधरा में अलौकिक शक्तियों की आवाजें रिकॉर्ड की गईं, फोटो लिए और  इस रहस्य की गांठें खोलते हुए मैं वापस जा रहा हूं।

ग्राउंड जीरो से सिकंदर शेख की रिपोर्ट