फोकस भारत/जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन प्रभारी) और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की राजनीति और कांग्रेस में चल रही अंदरूनी चर्चाओं को लेकर बेबाकी से मीडिया के सवालों के जवाब दिए।
मैं थासूं दूर कोणी हूं
अशोक गहलोत ने कहा कि ऐसे लोग जिसका फायदा कराना चाहते हैं उसी का नुकसान करा देते हैं और इससे पार्टी को भी नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में हम सभी बड़े प्यार मोहब्बत से रहते हैं। चार साल से हरियाणा,पंजाब,हिमाचल,पंजाब सभी जगह कहीं ना कहीं नेताओं में एक दूसरे के खिलाफ वक्तव्य और बयान आए हैं, लेकिन राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ कोई बयान नहीं दिए हैंं, लेकिन फिर भी कुछ लोग इसे मतभेद कहते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया के कुछ लोग कभी मुझे गुजरात भेजते हैं, कभी पंजाब भेजते हैं, कभी राज्यसभा भेज देते हैं, कभी दिल्ली भेज देते हैं, लेकिन मैंने कहा है कि मैं थासूं दूर कोणी हूं, अब आप समझ जाएं, समझदार को इशारा काफी होता है, जो ना समझें वो अनाड़ी हैं।
आरएसएस ने 100 सालों में कब रखा उपवास ?
अशोक गहलोत ने कहा कि 45 साल से मैं आरएसएस और इन लोगों को ट्रैक कर रहा हूँ जब से मैंने राजनीति शुरू की है।
ये लोग दलित विरोधी थे, गांधीजी के खिलाफ थे, कभी किसी महापुरुष का इनकी जुबान पर नाम तक नहीं आया। आज ये गांधीजी का नाम लेते हैं, सरदार पटेल को अपना रहे हैं। उपवास गांधीजी का सिखाया हुआ था, ये जो कभी गांधीजी का नाम लेते नहीं थे आज उपवास कर रहे हैं! आरएसएस के 100 साल होने आए हैं, 100 सालों में कब उपवास किया इन्होंने? बीजेपी ने उपवास रखा कभी? आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस का जो रास्ता था उसे ये फॉलो कर रहे हैं बीजेपी का भी कांग्रेसीकरण कर रहे हैं ये लोग।ये लोग श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जो सोच थी क्या उसपे अटल हैं? जब इन्होने देखा की उनके आधार और विचारों पर हम कभी सत्ता में नहीं आ सकते तो इन्होने गांधी को याद किया, पटेल को याद कर रहे हैं और अब उपवास कर रहे हैं।प्रधानमंत्री खुद उपवास कर रहे हैं। वो टाइम आएगा… आप देखना एक जमाना आएगा जब ये पंडित नेहरू को भी अपना नेता मान लेंगे जैसे गांधी को माना है और पटेल को माना है।
राजस्थान में सरकार का इकबाल खत्म
अशोक गहलोत ने प्रेस काफ्रेंस में कहा कि राजस्थान में सरकार का इकबाल खत्म हो गया है, ब्यूरोक्रेसी में कोई डर के मारे काम करने को तैयार नहीं है। भाजपा सरकार के मंत्री जनता के बीच जाने से कतराते है क्योंकि उनको वहां भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है और मंत्री ये कह रहे की अब वोट मत देना…. लेकिन ये बात तो आगे लिए है पिछ्ला जो वोट जो विश्वास करके दिया है उसका हिसाब कौन देगा?