RJ रविन्द्र से जानिए ‘पंच की बात’-कुछ और नहीं ये है हू तु तु तु

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फोकस भारत। RJ रविन्द्र सिंह से जानिए ‘पंच की बात’ में  कुछ और नहीं ये है हू तु तु तु

लक भी चला जूनियर बच्चनवा का तो कबड्ड़ी में उससे पहले तो एक्टिंग एबी के साथ कबड्ड़ी खेल रही थी के आऊं के नहीं , अब कहीं जाकर एेश भाभी की सांस में सांस आयी के पतिदेव कहीं तो बिज़ी हैं।लोग लुगाई ‘लीग’ के मज़े ले रहे है तभी तो टांग खींचने वाला खेल साल में दो बार आयोजित और प्रायोजित होने लगा , अच्छा शुरु से ही ख़ास बात ये रही इस पारम्परिक खेल की कि कौई दूसरा जब तीसरे पर चढ़ता है तो चौथे को मज़ा आता है , कभी कभी तो चौबे को भी आ जाता है पर आजकल चौबे तब ही जाता है जब कबड्ड़ी का टिकट फ्री में मिलता हैं।
पहले बेचारा कबड्ड़ी भी क्रिकेट देखा करता था पर अचानक से सभी खिलाड़ियों की ज़िंदगी में पैसा,ऐड़,बाॅलीवुड़, भ्रमण सब एक साथ आ गये इस चक्कर में कई खिलाड़ी तो पहले ही आउट हो गये ,ना भैया ना इतना नहीं संभाला जाता पहले वाला ही कबड्ड़ी ठीक था मिट्टी में खेल कर आते , हारने वाली टीम जीतने वाली टीम को दूध पिलाती फिर उसी मैदान में गिल्ली ड़ंड़ा शुरु हो जाता अब महंगे भाव के जूतों में पांव नहीं ड़ाला जाता।
जब तक सांस नहीं टूट जाती थी पहले वाला खिलाड़ी पाले से बाहर नहीं आता था , अब तो पीछे बैकग्राउंड़ म्यूज़िक चलता है , एंकर ऐसे चिल्लाता है जैसे उसकी परफोर्मेंस के बाद उसे गोल्ड़न ग्लोब मिलने वाला हो , ऐसे में किसी मनचली नें प्लेयर को आई लव यू चीखकर बोल दिया तो काॅन्सन्ट्रेशन की बत्ती तो वैसे ही लग जाती हैं। जब सामने हो बला की खूबसुरत तू तो काहे का हू तू तू।
जिस लीग में भी बाॅलीवुड़ एंट्री मारता है एल तो पीछे लग ही जाते हैं जैसे IP’L’, CC’L’, PK’L’ हालात ये हैं लोग ज्योतिष अंकल के पास और जाते हैं पूछते हैं मैच कब शुरु करना चाहिये , अंकल जी भी यही बोलते हैं जब घड़ी के कांटो से ‘एल’ बन जाए तब शुरु कर दीजियेगा , आजकल तो वो लोग भी हिट हैं जिनके नाम के बीच में एल लगा हो जैसे ड़िरेक्टर आनंद ‘एल’ राय जिन्होनें रांझना , तनु वेड़स मनु बनायी , इनकी भी हर फिल्म में हीरो हीरोइन के चक्कर में कबड्ड़ी ही खेल रहा है।
कबड्ड़ी का मैच इसलिए भी इंट्रैस्टिंग लगता हैं क्योंकि छोटा होता हैं और शुरु भी 8 बजे होता हैं , आदमी मूड़ में जाकर(मूड़ से मेरा मतलब मूड़ से ही है)सीट ढूंढ़कर जैसे ही बैठता है मैच खत्म होना शुरु कर देता हैं फिर वही आदमी दो कि़मी़ चलकर अपनी गाड़ी ढूंढ़ता है , देरी से घर आने पर ये अलग बात है कि उसके भी ‘एल’ ही लगते है पर वो मेनेज कर लेता है।
अपने जयपुर की आधी जनता मैच देखने इसिलिए जाती है काश एबी के साथ इक सेल्फी मिल जाए ताकि तुरन्त वो एफबी और इंस्टा पे अपलोड़ हो और जिनको नहीं मिले वो लोड़ में आ जाए , आधे लोग टी शर्ट के चक्कर में रहते हैं कि बस एबी दे दें और वो मैच में पहन के आ जाएं ताकि ‘फैमिली’ वाॅट्सएप ग्रुप में जीजाजी को थम्सअप और तालियां मिल जाएं और ससुर जी से नेग और तारीफ कि वाह जंवाई सा आपने तो कमाल कर दिया , कभी हमें भी मिलाओ तो आपकी मम्मी जी मेरे साथ थोड़ी कम कबड्ड़ी खेले।
कुल मिलाकर गुलाबी नगरिया तैयार है फिर एक बार कबड़्ङी खेलने के लिए क्योंकि कईयों को खिंचवाने में मज़ा आता है कईयों को खींचने में “टांग”