Focus Bharat

2 दोस्तों का यह स्टार्टअप सीधे खेतों से फल और सब्ज़ियां उपलब्ध करवा रहा है, मुख्यमंत्री कर चुकी है सम्मानित

फोकस भारत। विपरीत हालात और संसाधनों का अभाव, आम इंसानों के लिए असफलता का बहाना भी बन सकते हैं और सबब भी। लेकिन मेहनत को ही एकमात्र विकल्प समझने वाले शख़्स के लिए ये चीज़ें, कभी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकतीं। कुछ ऐसी ही कहानी है दो दोस्तों की। जिन्होने 15 लाख के पैकेज को छोड़कर ऑनलाइन कंपनी की नींव रखी। आज इस कम्पनी का सालाना ढाई करोड़ का टर्नओवर है।

सीएम वसुंधरा राजे ने किया स्टार्टअप को सम्मानित

जिंदगी में कुछ नया करने के जज्बे और जुनून के दम पर किसानों उनकी फसल का उचित दाम देने के साथ ही लोगो को ताजी और क्वालिटी के फल और सब्जिया उपलब्ध करा रहे है।राजस्थान की राजधानी जयपुर आधारित स्टार्टअप, फ़्रेशोकार्ट्ज़ ऐग्री प्रोडक्ट्स। यह एक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस है, जहां पर किसानों के उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है और सप्लाई चेन को छोटा करते हुए ग्राहकों को बेहतर उत्पाद, कम क़ीमतों में उपलब्ध कराए जाते हैं।

स्टार्टअप: फ़्रेशोकार्ट्ज़
फ़ाउंडर्स: राजेंद्र लोरा और नागेंद्र यादव
शुरूआत: 2016
आधारित: जयपुर
कामः ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्राहकों को सीधे किसानों से जोड़ना

दो दोस्तों ने कड़ी मेहनत से लिखी कामयाबी की काहनी

कंपनी के फ़ाउंडर्स, राजेंद्र लोरा और नागेंद्र यादव, दोनों ने ही हायर एजुकेशन के लिए 25 साल की उम्र में अपना गांव छोड़ा था। राजेन्द्र बताते है कि गांव छोड़ने के बाद से ही उनके ज़हन में ख़्याल था कि पढ़ाई पूरी करने के दौरान वह किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कोई उपयोगी काम ज़रूर करेंगे। राजेंद्र, राजस्थान के नागौर ज़िले के गांव गुगडवार के रहने वाले हैं और उनका परिवार प्याज़ की खेती करता था। राजेंद्र ने आईआईआईटी (जबलपुर) से ग्रैजुएशन किया और इसके बाद वह काम के लिए मुंबई चले गए। वहीं नागेंद्र ने स्कूल की पढ़ाई गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से की है। स्टार्टअप शुरू करने से पहले वह एक मल्टी नैशनल कंपनी में काम करते थे। राजेन्द्र और नागेन्द्र दोनों अच्छे दोस्त है। दोनों मिलकर इस स्टार्टअप की नींव रखी।

एक घटना ने दिया स्टार्टअप को जन्म

राजेंद्र ने बताया कि एक बार मैं मुंबई में बेहद महंगे दामों पर प्याज़ ख़रीद रहा था। मैंने उसी समय अपने पिता जी को फोन लगाकर पूछा कि गांव में प्याज़ के दाम कैसे चल रहे हैं। पता चला कि शहर में गांवों की अपेक्षा दोगुने दाम पर प्याज़ बेचा जा रहा है। मैंने अपने कॉलेज के समय के दोस्त नागेंद्र को फोन लगाकर इस अंतर के बारे में बताया। लंबी चर्चा के बाद, हमने निष्कर्ष निकाला कि बाज़ार में बिचौलियों की वजह से ऐसा हो रहा है, जिसका नुकसान ग्राहक भुगत रहे हैं।

ऐसे रखी स्टार्टअप की नींव

राजेंद्र ने बताया कि वह नागेंद्र के साथ जयपुर गए और वहां के बाज़ारों की स्थिति पर रिसर्च की। राजेंद्र कहते हैं कि जयपुर में बिचौलियों की स्थिति बेहद ख़राब थी और लोगों तक सामान भी अच्छा नहीं पहुंच रहा था और उन्हें क़ीमत भी ज़्यादा चुकानी पड़ रही थी। पूरी रिसर्च के बाद 2016 में फ़्रेशोकार्ट्ज़ ऐग्री प्रोडक्ट्स की शुरूआत हुई। दोनों ने मिलकर एक ऐसा तकनीक-आधारित ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया, जिसकी मदद से ग्राहकों और किसानों को सीधे तौर पर जोड़ा जा सके। आप फ़्रेशोकार्ट्ज़ की मोबाइल ऐप या वेबसाइट के ज़रिए फल और सब्ज़ियां वगैरह ऑर्डर कर सकते हैं। फ़्रेशोकार्ट्ज़ स्टार्टअप ग्राहकों की मांग के आधार पर सीधे खेतों से सामग्री मंगवाता है और कम से कम क़ीमत पर ग्राहकों तक पहुंचाता है।

ऐसे बदला स्टार्टअप को मुनाफे में

राजेन्द्र कहते है कि किसानों से ख़रीदे गए फलों और सब्ज़ियों को बेचना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण काम था। हम दोनों ने तय किया कि वे पहले बड़े ख़रीददारों को टार्गेट करेंगे। उन्होंने सबसे पहले होटलों, रेस्तरां, कैफ़े, रीटेलर्स और कैटरर्स से संपर्क करना शुरू किया। राजेंद्र कहते हैं, “हमारा एक ही लक्ष्य है कि फलों और सब्ज़ियों के सेक्टर में बेहद लंबी सप्लाई चेन के चलते होने वाले नुकसान को कम करना। फ़िलहाल भारत में खेतों से बाज़ार तक पहुंचने में नुकसान का प्रतिशत, 35% है। हम तकनीक की मदद से इस जटिल सप्लाई चेन को मैनेज करते हुए, पूरे देश में नुकसान के इस स्तर तो 5 प्रतिशत की दर तक लाने की कोशिश कर रहे हैं।

200 किसान और 100 से ज्यादा ग्राहक

राजेन्द्र बताते है कि उनका प्लेटफ़ॉर्म फ़िलहाल 200 किसानों और बिज़नेस टू बिज़नेस सेक्टर में 100 से ज़्यादा ग्राहक जुटा चुका है। ग्राहकों में आईटीसी होटल्स, हिल्टन जयपुर, कान्हा स्वीट्स जैसे कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं। फ़्रेशोकार्ट्ज़ के मुताबिक़, एक ही साल में कंपनी ने 2 करोड़ रुपए का आंकड़ा छू लिया। राजेंद्र बताते हैं कि कंपनी का मासिक रेवेन्यू 25 लाख रुपए तक है और कंपनी अभी मुनाफ़े में चल रही है। फ़्रेशोकार्ट्ज़ फ़िलहाल 20 लोगों की टीम के साथ काम कर रहा है। साथ ही,

भावी योजनाए

कंपनी का लक्ष्य है कि अगले साल तक सालाना रेवेन्यू को 10 करोड़ रुपए के आंकड़े तक पहुंचाया जाए। भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए राजेंद्र ने बताया कि कंपनी का लक्ष्य है कि अगले दो सालों में 60 करोड़ रुपए का बिज़नेस किया जाए और पास के गांवों में कलेक्शन सेंटर खोले जाएं। राजेंद्र ने जानकारी दी कि हम राजस्थान के बाहर के किसानों को भी अपने साथ जोडेंगे। हम किसानों को प्रशिक्षण देंगे। ताकि उन्हें बता सके कौनसा उत्पादन करने से उनको फायदा होगा साथ ही उत्पादन भी क्वालिटी का होगा। इसके लिए हम काम कर रहे ताकि किसानो को जानकारी दी जा सके।

CM राजे ने किया सम्मानित
फ़्रेशोकार्ट्ज़ को राजस्थान सरकार का पूरा सहयोग मिला। राजस्थान सरकार प्रदेश के स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए आईस्टार्ट नाम से एक इनक्यूबेशन प्रोग्राम चलाती है। फ़्रेशोकार्ट्ज़ को भी इस प्रोग्राम का फ़ायदा मिला। आईस्टार्ट की मदद से फ़्रेशोकार्ट्ज़ को को-वर्किंग स्पेस और विशेषज्ञों की सलाह का भरपूर सहयोग मिला। सरकार ने फ़्रेशोकार्ट्ज़ को 20 लाख रुपयों का भामाशाह टेक्नो फ़ंड और 10 लाख रुपयों का मार्केट असिस्टेंस फ़ंड मुहैया कराया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी इनके इस प्रयास की सराहना की और सम्मानित भी किया।