फोकस भारत। जयपुर जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पवन गोयल एक बिजनेस टाइकून और मिलनसार समाजसेवी राजनेता के तौर पर जाने जाते हैं। आमजन की समस्याओं के लिए संघर्ष करने और समाजसेवा से लोगों का दिल जीतने वाले पवन गोयल मालवीयनगर सीट से कांग्रेस पार्टी के प्रबल दावेदार हैं। गोयल ने फोकस भारत की संपादक कविता नरूका से बातचीत के दौरान अपनी जिंदगी के अनछुए पहलुओ पर विस्तार से चर्चा की। गोयल ने कहा कि अगर पार्टी ने टिकट दिया तो चुनाव जरुर लडूंगा। पेश है पवन गोयल से हुई बातचीत के प्रमुख अंश –
शून्य से शिखर तक
साधारण परिवार में जन्मे पवन गोयल के पिता का पेट्रोलियम का कारोबार था। किराए के मकान से पिता ने जयपुर में शुरुआत की । उसके बाद उनके हार्ड वर्क और ईमानदारी ने कारोबार को बढ़ाया। पवन गोयल कहते है कि ग्रेजुएशन के बाद मैंने भी पिताजी और बड़े भाईसाहब के साथ पेट्रोलियम के कारोबार को आगे बढ़ाया। मैंने नई ऊर्जा के साथ जोखिम लिया। क्योंकि पिताजी ने सिखाया था कि साधारण काम तो सभी करते है लेकिन काम वहीं है जिसमें जोखिम हो। मैंने जोखिम उठाने के साथ ही अपनी कड़ी मेहनत से खुद को साबित करने की कोशिश की। लेकिन पवन गोयल यहीं नहीं रुके उन्होंने साल 2002 में कुछ नया करने के लिए रियल एस्टेट का कारोबार शुरु किया । कुछ सालों में ही पवन ने राघव प्रोपर्टी के कारोबार को जयपुर में ख्याति के पायदान तक पहुंचा दिया। पवन गोयल कहते है कि पेट्रोलियम के बिजनेस के वक्त एक शख्स ने मुझसे कहा था कि ये तो पिता का सेट बिजनेस था । प्रोपर्टी में कुछ करके दिखाए तो माने। वो बात चुभ गई । इसी तरह स्कूल के वक्त जब मैं 10वीं में था , तब किसी ने अपने होटल में रुतबा दिखाया था। वो बात मेरे जेहन में थी। फिर जब प्रोपर्टी का कारोबार सफल हुआ तो मैंने साल 2008 में होटल बिजनेस की नींव रखी। रॉकलैंड होटल से शुरुआत की और उसके बाद सफारी होटल की नींव रखी।
होम फ्रेंडली फील को प्राथमिकता
पवन गोयल बताते है कि हमने कभी क्वालिटी से समझोता नहीं किया। होटल सफारी कम समय में ही जयपुर का जाना-माना नाम है इसके पीछे वजह है कि हमने यहां आने वाले लोगों को होटल में होमली फील दिया।
बड़ा सोचो-बड़े सपने देखो
पवन गोयल की जिंदगी का फलसफा है कि जिंदगी में बड़ा सोचने के साथ ही बडे सपने देखने चाहिए। गोयल बताते हैं कि कड़ी मेहनत और जज्बे के साथ काम किया जाए तो असंभव कुछ भी नहीं है।
पिता है मेरे आदर्श
मेरे पिता रामावतार जी ही मेरे पहले गुरू और मार्गदर्शक है, साथ ही मेरे बड़े भाई प्रमोद गोयल हमेशा से मेरे अच्छे दोस्त के तौर पर साथ रहे हैं। पिताजी की दिनचर्या से आज भी मैं प्रभावित हूं, समय पर उठना, समय की कद्र करते हुए काम करना औऱ जब व्यापार करना है तो उस वक्त सिर्फ व्यापार करना। पिताजी की ये ही सीख मुझे हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है और मेरी सफलता का मंत्र है। ये ही वजह है कि काम के साथ ही में समाज सेवा और एनजीओ के जरिए आज सक्रिय भूमिका निभा रहा हूं।अपना सेवा संस्थान और स्वरकोकिला संस्थाओं के जरिए मुझे समाज सेवा में जरूरतमंदों की मदद कर के मन को शांति मिलती है।
खुद के लिए निकाले समय
मैंने व्यक्तिगत समय को कभी नहीं मारा और ना ही उसे जाया होने दिया। पिताजी ने ही बताया कि इंसान चाहे कितना ही व्यस्त हो खुद के लिए भी जीना चाहिए। जिससे हमेशा तरोताजा रहता है। पवन गोयल के मुताबिक स्कूल के दिनो से ही वे खेल से जुडे़ रहे हैं। पहले हॉकी और बिलियर्ड जैसे खेल खेलते थे लेकिन समय के साथ उनकी रूचि गोल्फ में हुई तब से वे हमेशा गोल्फ खेलते हैं।साथ ही गोयल गायन में भी रूचि रखते हैं। गोयल कहते हैं कि व्यस्ततम दिनचर्चा के बावजूद भी अपने शोक के लिए समय निकालते हैं। गायन का शौक लगा तो गोयल ने इसके लिए बाकायदा क्लब बना दिया । जिसमें पुरूषों के लिए रामा क्लब और महिलाओं के लिए अलग से स्वर कोकिला का गठन किया।जो आज काफी प्रसिद्ध है।
सफलता में जीवनसाथी का अहम योगदान
पवन गोयल अपनी धर्मपत्नी निधी गोयल को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं । वे कहते हैं कि आप को जीवन में आगे बढ़ना है और घर को समय देने के साथ ही समाजसेवा के लिए भी समय देना पड़ता है ऐसे में जीवनसंगीनी के सहयोग के बिना ये सब असंभव होता है। वे कहते हैं कि ये सब करने के लिए जीवनसंगीनी का हमेशा साथ मिला।
स्कूल से ही है लीडरशीप
पवन गोयल कहते हैं कि वे स्कूल समय से ही हेडब्वाय के रूप में लीडरशीप से जुड़ गए थे और बाद में कॉमर्स कॉलेज से उन्होंने छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। राजनीति से जुड़ने का बीज उसी समय से उनमें अंकुरित हुआ। हालांकि उस दौरान घरवालों ने इसे लेकर नाराजगी जताई। जिसके बाद में कॉलेज समय के बाद व्यापार से जुड़ गया। इसके बाद राजीव अरोड़ा जी के संपर्क में आया और कांग्रेस पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता बना। आज पार्टी के प्रति निष्ठा और काम का ही परिणाम है कि मुझे जयपुर जिला कांग्रेस कमेटी में उपाध्यक्ष बनाया गया। जिसका निर्वाहन मैं पूरी निष्ठा के साथ कर रहा हूं।
चुनाव लड़ने का सबको अधिकार-
गोयल कहते हैं कि मालवीय नगर विधानसभा से मैं हमेशा से ही जुड़ा रहा हूं और जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर मैने काम किया है। विधानसभा के लोगों के लिए हमेशा संघर्ष करता रहा हूं और उनकी समस्याओं को उठाने का काम किया है। मालवीय नगर विधानसभा अग्रवाल बाहुल्य सीट है। जिसमें अगर मुझे वैश्य समाज के प्रतिनिधि के तौर पर टिकट मिलती है तो कांग्रेस पार्टी की जीत कोई नहीं रोक सकता है। मुझे व्यापारियों के साथ ही समाज के हर वर्ग का समर्थन मिलेगा जो मेरे लिए काफी पॉजीटिव है। वही ये भी है कि मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं पार्टी जो भी आदेश देगी उसे पूरा करूंगा।