सोनियां गांधी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में शामिल नहीं होंगे नीतीश!

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फोकस भारत/पटना। बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष इन दिनों राष्ट्रपति चुनावों में महागठबंधन के खिलाफ एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को खुले आम सपोर्ट करने का एलान कर सुर्खियों में है। इसके बाद से ही बिहार में लालू यादव और कांग्रेस के साथ उनके गठबंधन पर आंच आने के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं अब नीतीश के विपक्ष के उपराष्ट्रपति प्रत्याशी के चयन के लिए बुलाई गई बैठक में भी भाग नहीं लेने की अटकलों से राजनीतिक सुर्खियां तेज हो गई है।

माना जा रहा है कि नीतीश कुमार एकबार फिर विपक्षी दलों झटका देने वाले हैं। वह उपराष्ट्रपति पद के साझा उम्मीदवार पर रणनीति बनाने के लिए 11 जुलाई को दिल्ली में आयोजित होने वाली 17 पार्टियों की बैठक में शामिल नहीं होंगे। दरअसल, 11 जुलाई को ही जेडीयू ने अपने पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक पटना में बुलाई है। ऐसे में उनकी पार्टी के विपक्ष की बैठक में हिस्सा न लेने की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। हालांकि अभी तक सीएम नीतीश कुमार की ओर से सोनियां गांधी अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में शामिल होने या नहीं होने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेता शरद यादव इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। वहीं इस बात के भी आसार है कि नीतीश यूपीए खेमे के उम्मीदवार को देखकर ही समर्थन कर दें। दूसरी ओर बीजेपी की ओर से नीतीश कुमार को अपने खेमे में लाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। बीजेपी की ओर से इसे देखते हुए बिहार से ही उपराष्ट्रपति प्रत्याशी की घोषणा की जा सकती है।

सियासी हलकों में इस बात की भी चर्चाएं हैं कि अप्रैल महिने में ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात करके सीएम नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करने की अपील की थी। लेकिन पिछले महीने उन्होंने अपने बयान से पलटी मारकर विपक्ष को तगड़ा झटका देते हुए एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का ऐलान किया था। इतना ही नहीं सीएम नीतीश कुमार यूपीए की प्रत्याशी मीरा कुमार के बिहार पहुंचने पर मिले भी नहीं।

दरअसल बिहार में लालू यादव पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सीबीआई के छापे के बाद जेडीयू की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है लेकिन जिन आरोपों को लेकर सीबीआई की जांच हो रही है उन्हें लेकर साल 2008 में जेडीयू ने ही आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। उस दौरान बिहार लालू और नीतीश आमने सामने थे। लेकिन बाद में नीतीश कुमार ने बीजेपी से 17 साल पुराना गठबंधन तोड़कर लालू यादव और कांग्रेस से गठबंधन करते हुए बिहार में महागठबंधन बनाया था। जिसकी बदौलत ही पीएम मोदी और बीजेपी को बिहार में हार का मुंह देखना पड़ा था। अब अटकलें है कि नीतीश फिर से बीजेपी के खेमे में जा सकते हैं।