फोकस भारत/उदयपुर। झीलों की नगरी कहलाने वाले राजस्थान के उदयपुर शहर में चल रहे राष्ट्रीय महिला आर्ट फेस्टिवल में कला के अलग-अलग अंदाज देखने को मिल रहे हैं। 18 मार्च से 24 मार्च तक चलने वाले इस शिविर में बड़ी संख्या में महिला आर्टिस्टों ने अपनी कला के जौहर दिखाए। इस आर्ट फेस्टिवल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करीब 25 महिला आर्टिस्ट शामिल हो रही है।
18 मार्च को इस फेस्टिवल का शुभारंभ उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने किया। ये आयोजन राष्ट्रीय ललित कला अकादमी नई दिल्ली और मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।समारोह को संबोधित करते हुए किरण माहेश्वरी ने कहा कि प्रदेश में विजुअल मीडिया और फिल्म निर्माण की शिक्षा के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जयपुर में फिल्म मैकिंग का इंस्टीट्यूट जल्द ही शुरू किया जा रहा है जहां मल्टीमीडिया, एनिमेशन और फिल्म मेकिंग की शिक्षा दी जाएगी। उन्होंने महिला कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि महिला कलाकारों के लिए परिवार के विभिन्न दायित्वों के बीच भी कला साधना निरतंर जारी रखना मुश्किल कार्य है। उन्होंने कला जगत की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिये हरसंभ्व प्रयास करने का भरोसा दिलाया। किरण माहेश्वरी ने शिविर के प्रतिभागियों को स्थानीय कलाओं जैसे मिनिएचर, मेवाड़ की लघु चित्र शैली, पिछवाई कला और मौलेला आर्ट से उनके कलाकारों को रुबरु करवाने का सुझाव दिया।


इस दौरान समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जे. पी. शर्मा ने कहा कि चित्रकला में राष्ट्र की मनोदषा व्यक्त होती है। स्त्रियों में कलात्मक अभिव्यक्ति के प्रति जन्मजात रुझान होता है। वे जन्म से ही कलाकार होती हैं। कलाकार भावों की अभिव्यक्ति अपने चित्रों के माध्यम से करता है और समाज को संदेश देता है।
सत्र को संबोधित करते हुए ललित कला अकादमी नई दिल्ली के प्रशासक सी.एस.कृष्णा शेट्टी ने बताया कि ललितकला अकादमी की स्थापना के बाद से यह पहला अवसर है जब महिला चित्रकारों का कोई इस तरह का फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है।
इस दृष्टि से उदयपुर और राजस्थान को हमेषा याद किया जाएगा। उन्होंने इस शिविर के आयोजन के लिए मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति बहुत कलरफुल है और सबको बहुत आकर्षित करती है। अकादमी के इस शिविर में देश के कोने-कोने से आनेवाले कलाकार विविध संस्कृतियों के प्रतिनिधि भी हैं। इस अर्थ में यह शिविर कला-कर्म के साथ ही महान भारतीय संस्कृति को समझने का अवसर भी उपलब्ध कराता है। इस दौरान प्रतिभागियों के साथ ही वरिष्ठ चित्रकार प्रो.सुरेश शर्मा,चित्रकार संदीप कुमार मेघवाल, प्रो.मदन सिंह समेत बड़ी संख्या में शोधार्थी और कलाप्रेमी मौजूद रहे । संयोजक ने बताया कि राष्ट्रीय महिला कला उत्सव 2017 के तहत इस सात दिवसीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में प्रतिदिन कलाकारों के कृतित्व, रचना पक्ष और कला मूल्यों का स्लाइड शो के माध्यम से प्रदर्शन किया जाएगा।