शिक्षा को समर्पित मानसिंह का जीवन, युवाओं को दिखा रहे नई राह

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

फोकस भारत।जब खुद पढ़ाई कर रहे थे तब एक सीनियर के एक विचार ने उनकी जिंदगी के मायने ही बदल दिए। बीएससी फर्स्टईयर की पढ़ाई के दरमियान ही युवाओं में शिक्षा की अलख जगाने और उनके विकास के लिए रखी ‘युवाम’ की नींव।निशुल्क शिविर लगा कर हजारों युवाओं की बदली जिंदगी और बने शिक्षा के सजग प्रहरी। ऐसी ही धुन की धनी शख्सियत है राजस्थान में जन्मे मानसिंह शेखावत(man singh shekhawat )। जिन्होंने टीचिंग को हॉबी बनाकर कायम की नजीर।

गांव की पगडंडी से निकल कर तय की मंजिल

मानसिंह शेखावत बताते है कि मेरा जन्म साधारण परिवार में हुआ। राजस्थान के सीकर जिले के पीथलपुर गांव में हुआ। मेरी प्रारम्भिक शिक्षा गांव पीथलपुर और अजीतगढ़ में हुई। आगे की पढ़ाई मध्यप्रदेश के ग्वालियर में की। पिताजी की नौकरी ग्वालियर में थी तो मेरी आगे की पढ़ाई वहीं हुई।

 

पढ़ाई के दौरान रखी ‘युवाम’ की नींव

युवा सृजन -राष्ट्र निर्माण की मूल भावना को अपना लक्ष्य बनाकर युवाओं के लिए कुछ बेहतर करने की ठानी। मानसिंहबताते है कि  मध्यप्रदेश रतलाम में जब हॉस्टल में रहकर बीएससी फर्स्टईयर की पढ़ाई कर रहे थे तब हमारे सीनियर दादा पारस सकलेचा की प्रेरणा औऱ् सहयोग से हमने मिलकर साल 1977 में युवाम की नींव रखी। ये दादा का विचार औऱ आईडिया था,जिसकी वजह से युवाम( yuwam) की नींव रखी गई। शुरु में रतलाम के आस -पास के गांवों में हमने निशुल्क प्रशिक्षण शिविर लगाए। कई वर्कशॉप आयोजित की। जिसमें युवाओं को अंग्रेजी के उच्चारण से लेकर सम्पूर्ण विकास पर ध्यान दिया।  हम जब गांव से आए और हमने महसूस किया कि गांव से जब युवक शहर में जाता है तो कैसे अपने आपको देखता है। अंग्रेजी भाषा के ज्ञान की कमी की वजह से कॉम्पीटीशन एग्जाम में पीछे रह जाता है। उसी पीड़ा से हम गुजरे तो बस निश्चय कर लिया की युवाओं के विकास के लिए कुछ करना है। बस फिर ये कारवां बढ़ता गया। मध्यप्रदेश में युवाओं को निशुल्क पढ़ाने के बाद साल 1988 में राजस्थान का रुख किया।

 

 

युवाओं के विकास को समर्पित जिंदगी

जयपुर, कोटा,बीकानेर, उदयपुर, जोधपुर ,बांसवाड़ा , सीकर सहित कई जगह फ्री इंग्लिश इम्प्रूवमेंट के शिविरों का आयोजन किया। मान सिंह कहते है कि हमारे यहां से फ्री में पढ़ कर निकले युवाओं ने एक कड़ी बना ली और वो अपनी जगह युवाम को आगे बढ़ाते गए।देश के कौने कौने में युवाम ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। दिल्ली, मध्यप्रदेश,राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र ,उतरप्रदेश ,छतीसगढ के कई शहरों और गांवों में निशुल्क प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए है। जयपुर- श्रीमाधोपुर के आस पास के कई गांवों में निशुल्क शिक्षा की युवाम ने  ज्योति फैलाई।  राजस्थान आने के बाद मानसिंह शेखावत ने जयपुर में साल 1988 से 2006 तक फ्री क्लासेज लगाई। मानसिंह कहते है कि बीएससी –एमए की डिग्री लेने के बाद मेरी बैंक में नौकरी लग गई। लेकिन नौकरी के दरमियान भी युवाम के मिशन को जारी रखा।

 

बैंक की नौकरी छोड़कर ‘युवाम’ को आगे बढ़ाया

मानसिंह कहते है कि इतने सालों तक निशुल्क एजुकेशन देने के बाद कई लोगों ने मुझे कहा आप फ्री में शिक्षा देना बंद करे। और मुझे भी लगा की फ्री एजुकेशन को सस्ते में आंका जाता है । इस वैश्वीकरण के दौर में युवाओं की एक सोच बन गई है की अगर निशुल्क है तो क्वालिटी खराब होगी। इसी वजह से हमने साल 2010 में इसका व्यावसायीकरण किया। साल 2010 में मैंने अपनी बैंक की नौकरी से रिटायर्मेंट लिया और युवाम को कोर्पोरेट सोशल रेस्पोंसेबिलिटी(सीएसआर) से जोड़ा।

 

 

टीचिंग मेरी हॉबी और जुनून

मानसिंह कहते है कि युवाम एक गैर राजनीतिक संगठन है । हमने आज तक किसी से कोई चंदा नही लिया है। टीचिंग मेरी हॉबी है। आप भी तो अपने शौक के लिए जेब से पैसे खर्च करके उसे पूरा करते है बस मैंने भी यहीं किया।  मेरा मानना है कि जुआ खेलना, शराब पीना और भी बुरी आदतों को छोड़कर अगर हमारा शौक ऐसा हो कि उसे पूरा करने में समाज का भला हो तो इससे बड़ा काम कुछ भी नही। युवाओं में शिक्षा की अलख जगाना मेरा एक जुनून था जिसे मैंने पूरी शिद्दत के साथ जीया।

 

मुनाफे का बड़ा हिस्सा ग्रामीण परिवेश के युवाओं पर खर्च

मानसिंह बताते है कि आज हमारे मुनाफे का बड़ा हिस्सा ग्रामीण बच्चों के विकास के लिए खर्च किया जाता है। दिव्यांग बच्चों को आज भी निशुल्क शिक्षा दी जा रही है। बीपीएल को हम उचित डिस्काउंट देते है। मध्यप्रदेश के रतलाम के करीब 25 गांवों में आज भी निशुल्क शिक्षा जारी है। इसके अलावा राजस्थान के कई गांवों में हम निशुल्क एजुकेशन कैंप आयोजित कर रहे है। श्रीमाधोपुर में 900 लड़कियों ने एक साथ फ्री इंग्लिश एजुकेशन कैम्प में भाग लिया।

 

टीचर, लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर

मानसिंह एक बेहतर टीचर होने के साथ ही लेखक भी है। उन्होंने इंग्लिश इम्प्रूवमेंट की कई किताबें लिखी है। मानसिंह कहते है कि मैंने अपने टीचिंग के अनुभवों को बस शब्दों पिरोया ताकि युवाओं की हेल्फ हो सके।  इसके अलावा उन्हें एक मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी देखा जा रहा है। युवाओं को सही करियर चुनने और जिंदगी में सही रास्ते पर चलने के लिए मानसिंह मोटिवेट कर रहे है। हालांकि मानसिंह अपने आप को एक टीचर के रुप में देखना पसंद करते है। कहते है कि आप मुझे शैक्षणिक प्रेरक कह सकते है।  इसके अलावा समाज सेवा के भी कई कार्य करवा रहे है।

 

स्वामी विवेकानंद है आदर्श

मानसिंह कहते है कि स्वामी विवेकानंद मेरे आदर्श है।  उनसे हमेशा प्रेरणा मिली। उन्होंने  कहा है कि ‘उठो, जागो  और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ने प्राप्त हो जाए।‘ मेरा मानना है कि स्वामी विवेकानंद देश के सभी युवाओं के प्रेरणास्त्रोत है। क्योंकि उन्होंने जो बाते कही वो सटीक है। युवाओं के लिए लक्ष्य प्राप्ति का सबसे बड़ा साधन है। आज के दौर में कथा-कथित मोटिनेशनल स्पीकर उन्हीं की बातों को दोहराते है। स्वामी विवेकानंद से बड़ा युवाओं के लिए कोई भी प्रेरणास्त्रोत नही हो सकता है।

⁠⁠⁠⁠

‘युवाम’ का जल्द ऑनलाइन फ्री पोर्टल होगा

मानसिंह कहते है कि अब हमारा गोल युवाम को टेकनिकल साउंड करना है। हम जल्द ऑनलाइन फ्री पोर्टल लॉंच करेंगे। जिससे पूरे भारत के बच्चे दूरदराज बैठकर भी निशुल्क शिक्षा हासिल कर सके।

 

युवाओं को मैसेज

मानसिंह शेखावत युवाओं के मैसेज देते है कि युवा अपना लक्ष्य तय करे और अच्छी संगत अच्छी बनाए, जिससे उनमें वैचारिक प्रदूषण ना फैले। युवा  अपनी क्षमता को पहचाने उसका सद उपयोग करे ।

 

(कविता नरुका से बातचीत पर आधारित)