हैंड वॉश क्यों है हेल्थ के लिए जरूरी, जानिए डॉ. भगवती चूंडावत से

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फोकस भारत। हैंड वाशिंग को हैंड हाइजीन भी कहा जाता है। स्वस्थ जीवन के लिए यह स्वयं को वैक्सीन प्रदान करना और उचित तकनीक है। हमारे शरीर में संक्रमण के खतरे के लिए हाथ सबसे प्रमुख और सीधे स्रोत का कार्य करते हैं। एक स्वस्थ जीवन के लिए हाथों का साफ रहना सबसे आवश्यक है। इसके लिए हमें स्वयं और हमारे बच्चों को इस प्रक्रिया से जोडऩा चाहिए, साथ ही इसे एक आदत की तरह अपनाना चाहिए। इसे एक आनुवांशिक लक्षण (गुण) की तरह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में बढ़ाना चाहिए।

हैंड वाशिंग के प्रमुख लाभ:
बहुत प्रकार के संक्रमणों से हमारी रक्षा करना।
संक्रमण को फैलने से रोकना।
संक्रमण के कारण मृत्यु और मृत्यु दर में कमी।
असाध्य रोगों जैसे- एचआईवी, एमएसआरए (मेथिसिलिन रेजिस्टेंस स्टेफीलोकोसी ऑरस) और ड्रग रेजिस्टेंस के प्रसार पर प्रभावी रोक लगाना।
बच्चों में डायरिया और इनफ्लुएंजा जैसे संक्रमणों पर रोक लगाना।

जोखिमयुक्त समय जब आपको हैंड वाशिंग को हमेशा अपनाना चाहिए-
खाना पकाने के दौरान, पहले और बाद में।
खाना खाने से पहले और खाने के बाद।
छींकने के बाद।
खेलने के बाद।
बाहर से घर आने के बाद।
मरीजों को छूने से पहले और छूने के बाद।
शौच क्रिया से निवृत्त होने के बाद।
किसी भी प्रकार की चोट का ट्रीटमेंट करने से पहले और ट्रीटमेंट के बाद।
बच्चों के डायपर बदलने के बाद।
बच्चों के शौचकर्म के बाद उनकी सफाई के बाद।
नाक साफ करने, खांसी होने तथा छींक आने के बाद।
जानवरों और उनके खाने को छूने के बाद।
पालतुओं से स्नेह के बाद।
कचरे को छूने के बाद।
डस्टिंग, कमरे, कार, मशीनों व यंत्रों की सफाई के बाद।
हैंड वाशिंग के लिए पांच प्रमुख चीजें-
वैट-लैदर-स्क्रब-रिंस-ड्राई

सबसे पहले कुहनियों को नीचे रखते हुए हाथों को गर्म पानी से धोएं, इसके बाद नल बंद कर दें। अब डिस्पेंसर से लगभग पांच मिलीलीटर मात्रा में साबुन (लिक्विड फॉर्म में) लें और झाग बनाने के लिए हाथों को रगड़ें। ध्यान रखें कि ये झाग हाथों के पीछे की ओर, उंगलियों के पोरों पर, नाखूनों के नीचे की ओर, कलाइयों समेत हाथों पर अच्छी तरह लगना चाहिए। अब हाथों को २० से ३० सेकंड तक अच्छी तरह रगड़ें और उन्हें गर्म पानी से साफ करें। इसके पश्चात हवा में सुखाएं और साफ तौलिए से साफ कर लें। इस प्रक्रिया के बाद हाथों पर मॉश्चराइजर का उपयोग करें। हमेशा हाथ धोने के लिए साबुन और गर्म पानी का उपयोग करें।

गर्म पानी से हाथ धोने के लाभ-
यह हाथों के रोमछिद्रों को खोल देता है, जिससे हाथों की सभी जगहों से तेल, धूल के कण, बैक्टीरिया आदि निकल जाते हैं। इसके लिए हमेशा डिस्पेंसर से साबुन को लिक्विड फॉर्म में ही काम में लें। यह हाथों को संक्रमण से बचाने का सबसे कारगर तरीका है। इस प्रक्रिया के लिए बिना पानी वाले अल्कोहल रब जैल या ग्लिसरीन, जिसमें लगभग ९५ प्रतिशत इथेनॉल होता है, का उपयोग किया जा सकता है। ९५.५ प्रतिशत अल्कोहल, एमआरएसए, एचआईवी, टीबी, आरएसवी, राइनोवायरस सहित अन्य जीवाणुओं को ३० सेकंड में हाथों से दूर कर देता है।ट्रैवलिंग के दौरान हमें हाथों की सफाई के लिए अल्कोहल आधारित सेनिटाइजर का उपयोग करना चाहिए।सभी तरह के बैक्टीरिया का सफाया करने के लिए हाथों को सुखाना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, साथ ही हाथों की सुरक्षा के लिए क्रीमयुक्त मॉश्चराइजर का उपयोग करना चाहिए। बैक्टीरिया की पूरी तरह सफाई के लिए हाथों को कम से कम ३० सेकंड तक अवश्य धोएं। ७० प्रतिशत तक अल्कोहल युक्त जैल का उपयोग करने और हाथों को ३० सेकंड तक साफ करने से ९९.९७ प्रतिशत तक बैक्टीरिया मर जाते हैं। इसके अतिरिक्त यदि हाथों की सफाई एक मिनट तक की जाए, तो ९९.९९ प्रतिशत तक बैक्टीरिया मर जाते हैं।
हैंड वाशिंग प्रक्रिया का लगातार दोहरान करने से ऑबेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही हाथों में घाव भी हो सकते हैं, इसलिए इसके अत्यधिक दोहरान से बचना चाहिए।

हैल्थकेयर क्षेत्र में कार्य करने वाले वर्कर के लिए डब्लूएचओ का माय फाइव मॉमेंट ऑफ हैंड हाइजीन कैंपेन-
मरीज को छूने से पहले।
किसी भी प्रकार की साफ-सफाई से पहले।
मरीज को छूने के बाद।
मरीज के आसपास के क्षेत्र को छूने के बाद।
शरीर से निकले किसी भी तरह के स्राव के संपर्क में आने के बाद।

TRIAD ऑफ हैल्थ हाइजीन-
वर्ष में दो बार शरीर की सफाई।
साबुन से हैंड वाशिंग प्रक्रिया को अपनाना।
फ्लोराइड पेस्ट से दांतों की सफाई।
इस प्रक्रिया को देश के प्रत्येक बच्चे को सिखाकर ही भारत को रोग मुक्त बनाया जा सकता है।

डॉ. भगवती चूंडावत अपनी इस पहल को अपने एनजीओ शुभशक्ति संस्थान के माध्यम से समाज में जागरूकता लाने के लिए आगे बढ़ा रही हैं।