फोकस भारत। राजस्थान की राजधानी जयपुर की मशहूर फैशन डिजाइनर ने अपनी कड़ी मेहनत और जुनून से फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में एक अलग मुकाम हासिल किया है। कीर्ति सिंह के संघर्ष से सफलता की दास्तां बेहद ही दिलचस्प है। फेसबुक का इस्तेमाल व्यापार बढ़ाने के लिए किया औऱ आज इसी प्लेटफॉर्म के जरिए पूरी दुनिया में कीर्ति के बनाए ट्रेडिशनल आउटफिट्स खूब पसंद और सराहा जा रहा है। तो आईए जानते है फैशन डिजाइनर कीर्ति सिंह कच्छवाह की जिंदगी के अनछुए पहलू।

ये हमारी बेटियां नहीं, बेटे है
18 साल की उम पिता स्व. महेन्द्र सिंह कच्छवाह को एक एक्सीडेंट में खो दिया था । परिवार में बड़ी बेटी होने की वजह से जिम्मेदारी कीर्ति पर थी। लेकिन कीर्ति ने हार नहीं मानी और दो छोटी बहनों और एक भाई की जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। कीर्ति बताती है कि पापा कहते थे कि ये हमारी मेरी बेटिया नहीं बल्कि बेटे है।

शून्य से शिखर तक
बचपन में कीर्ति को अपनी डॉल की की ड्रेस डिजाइन करने बेहद पसंद था। डॉल की ड्रेस और ज्वैलरी डिजाइन करती थी। बस इस हुनर को हॉबी से प्रोफेशन बना लिया। कीर्ति ने ग्रेजुएशन किया है । कीर्ति का मानना है कि आपके पास हुनर है तो आपको किसी डिग्री की जरुरत नही है। आज कीर्ति सिंह ने अपनी कड़ी मेहनत और जज्बे के दम पर देश ही नही बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। महज 28 साल की उम्र में फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में मुकाम हासिल किया है। जहां उनके काम और उनके नाम से जाना जाता है। कीर्ति कहती है कि मुझे खुशी और गर्व है कि मैंने जो भी किया अपने दम पर किया और आज लोग मुझे मेरे काम और नाम से जानते है। मेरी डिजाइंस को लोग पसंद करते है यहीं मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।

फेसबुक ने बदली जिंदगी
सोशल मीडिया को जहां टाइमपास की नजर से देखा जाता है । उसी प्लेटफॉर्म का सही उपयोग कर एंटरप्रेन्योर बनी है कीर्ति सिंह। कीर्ति अपने सुनहरे सफर का ज्रिक करती है कि आज से 5 साल पहले मैंने फेसबुक का इस्तेमाल अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए किया। मैंने अपने डिजाइन आउटफिटस की फोटो खिंच कर फेसबुक पर डाले। लोगो को मेरे डिजाइंस पसंद आने लगे और फेसबुक पर ही मुझे ओर्डर मिलने लगे। शुरुआत में फेसबुक पर मेरे 500 लोग जुड़े , लेकिन आज वर्ल्ड वाइड डेढ लाख लोग जुडे है। मेरे द्वारा बनाए ट्रेडिशनल आउटफिट्स को विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है। और खूब पहना जा रहा है। विदेशों में राजस्थान के ट्रेडिशनल आउटफिट्स को वियर किया जा रहा है। कीर्ति आगे बताती है कि मैंने अपना सारा बिजनेस घर से ही चलाया बस अभी कुछ महीने पहले ही स्टोर की शुरुआत की है। मेरा मानना है कि सोशल मीडिया गलत और सही दोनों है। आप पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल कैसे करना है। फेसबुक बड़ा प्लेटफोर्म है जहां चेटिंग और टाइमपास नहीं करके इसका इस्तेमाल अपने स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। भरोसे और क्वालिटी को कायम रखना जरुरी है। फेसबुक ने अभी कुछ दिनों पहले मेरी सक्सेज स्टोरी भी की है।


ट्रेडिशनल आउटफिट्स है पहचान
कीर्ति सिंह बताती है कि फैशन डिजाइनिंग मेरा जुनून है। मैंने हमेशा अपने क्लाइंट्स के विश्वास को कायम रखा है। जो डिजाइंस उन्हें फेसबुक पर दिखाई जाती है वो ही डिजाइंस उन्हें दी गई। मैंने हमेशा कहा अगर पसंद नहीं आए तो आप रिर्टन कर देना । क्योंकि मुझे अपने काम पर पूरा भरोसा है। क्वालिटी से कभी समझोता नही किया। । 18 घंटे काम किया और रात में भी विदेशी क्लाइंट्स को उनकी क्यूरिज के जवाब दिए । कीर्ति की पहचान ट्रेडिशन आउटफिट्स है। पोशाक, सिफ़ोन साड़ी। कीर्ति कहती है कि मैं राजपूती ट्रेडिशन के साथ ही सभी ट्रेडिशन के आउटफिट्स बनाती हूं। जूलरी भी डिजाइंस करती हूं। कीर्ति सिंह राजस्थान की परम्परा को संजोने और संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।

पूरे परिवार की एक ही जगह होगी श़ॉपिंग
कीर्ति का आगे प्लान है कि एक फैमिली की एक ही जगह ट्रेडिशनल आउटफिट्स प्रोवाइड कराए जाए। जहां पैरेंट्स के साथ बच्चों के लिए भी ट्रेडिशनल आउटफिट्स मिले। कीर्ति ब्राइडल के साथ ही ग्रूम के भी आउटफिटस डिजाइन कर रही है।

मां है मेरी प्रेरणा
कीर्ति बताती है कि मां फूल कंवर ही मेरी आदर्श और प्रेरणा है। मां ने हमेशा गाइड और इंस्पाक तिआ। हमे पूरी मेहनत और ईमानदारी से आगे बढ़ने की सीख दी । कहां कभी रुकना नही है बस आगे बढ़ो। जब पिता को खोया तो मां को रिश्तेदार कहते थे कि 3 बेटिया है अब इनकी शादी कर दो। लेकिन नहीं मां ने कहा कि जब तक मेरी बेटिया अपने पैरो पर खड़ी नही हो जाती तब तक नही करुंगी इनकी शादी।मां को आज गर्व है कि उनकी बेटी ने अपने दम पर मुकाम हासिल किया है। उनकी बेटिया किसी पर निर्भर नही बल्कि आत्मनिर्भर है।
कमाई का कुछ हिस्सा जरुरतमंदो पर खर्च
कीर्ति सिंह बताती है कि हर साल कमाई का कुछ हिस्सा वो अलग से रखती है और उसे जरुरतमंदों पर खर्च करती है। कीर्ति सिंह उन पैरेंट्स के इलाज के लिए पैसे खर्च करती है जिन्हें उनके परिवार ने घर से बाहर निकाल दिया। कीर्ति कहती है कि जिनके पास पास पैरेंट्स होते है उन्हे उनकी कद्र नही होती लेकिन जिनके पास नहीं होते उन्हे उनकी अहमियत का अहसास है।