फोकस भारत। अंग्रेजी को लेकर इतना बड़ा हौवा खड़ा कर दिया गया है कि हिंदी में रोजगार की कितनी संभावनाएँ हैं इस पर हम ध्यान देना भी मुनासिब नहीं समझते। आज स्थिति यह है कि हिंदी भाषा के अच्छे जानकारों की कमी बढ़ती जा रही है। माँग बहुत अधिक है पर पूर्ति हेतु योग्य आवेदक नहीं मिल रहे हैं। स्कूल व कॉलेज स्तर पर पढ़ाने वाले अध्यापक-प्राध्यापक भी हिंदी भाषा को लेकर जागरूक नहीं हैं। विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि विद्यार्थी हिंदी से बीए, एमए, पीएचडी कर तो लेते हैं पर उनमें हिंदी भाषा को लेकर सही समझ विकसित नहीं हो पाती।
हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ
आगे हम हिंदी भाषा की महत्ता और हिंदी में रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। यह बताने की कोशिश करेंगे कि यदि आप बाकी विषयों की तरह हिंदी को भी गंभीरता पढ़ते हैं; व्याकरण सम्मत, सरल अच्छी हिंदी लिख और बोल लेते हैं तो आपको नौकरी की तलाश में दर-दर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हिंदी में रोजगार की अनंत संभावनाएं हैं। समय के साथ-साथ कुछ पारम्परिक संभावनाओँ के अलावा हिंदी जानने वालों के लिए कई नए अवसर खुल गए हैं।
पारम्परिक माध्यम है अध्यापन
अध्यापन रोजगार का सबसे पुराना माध्यम है। ज्यादातर विद्यार्थियों को इस पुराने माध्यम की जानकारी है। अध्यापन के क्षेत्र में अपना करियर बनाने वालों के लिए अनगिनत अवसर हैं। बी.ए., बी.एड. करने के बाद टी.जी.टी. अध्यापक बना जा सकता है। आज टी.जी.टी. अध्यापकों की माँग पूरे देश में है। सिर्फ तमिलनाडु को छोड़कर प्रत्येक प्रदेश में आठवीं तक के विद्यार्थियों को हिंदी भाषा की शिक्षा देना अनिवार्य है। एम.ए., बी.एड. करने के बाद पी.जी.टी. अध्यापक बना जा सकता है। पी.जी.टी. टीचरों की मांग भी कम नहीं है। एम.ए. हिंदी में 55 प्रतिशत अंक लाने और नेट निकालने के बाद एम.फिल., पी.एच.डी. करने से महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाने की योग्यता हासिल हो जाती है। हिंदी प्रध्यापकों की नियुक्तियाँ गैर हिंदी भाषी प्रदेशों में भी होती हैं। इनका कार्य सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले गैर हिंदी भाषी कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने में सक्षम बनाना होता है।
अनुवाद के क्षेत्र में अपार अवसर
अनुवाद का कार्य हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। अनुवादक दो भाषाओं के बीच पुल का काम करता है। दुनिया के किसी भी भाषा में जो ज्ञान-विज्ञान मौजूद है उसे अपनी भाषा में अनुवाद के द्वारा लाना और अपने नागरिकों को लाभान्वित करना किसी भी देश की सरकार के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। विज्ञान का भंडार अंग्रेजी भाषा में है। यदि आप अंग्रेजी भाषा की जानकारी के साथ-साथ हिंदी भाषा का ज्ञान रखते हैं तो यह कार्य आपके लिए महत्वपूर्ण हो जाता है और रोजगार का माध्यम भी बनता है। आज प्रत्येक सरकारी विभाग में अनुवादक का पद होता है। इस पद पर काम करते हुए कनिष्ठ से वरिष्ठ तक पहुंचने के अवसर मिलते हैं। वेतन भी बहुत अच्छा होता है। गृहमंत्रालय के अधीन केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो है जो अनुवाद प्रशिक्षण भी देता है। इसके अलावा पीजी डिप्लोमा कोर्स करके भी अनुवादक के रूप में नौकरी पा सकते हैं।
इसके अलावा विदेशी साहित्य के अनुवाद का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। अंग्रेजी के लेखक हों अथवा अन्य किसी भाषा के सभी हिंदी में अपनी रचनाएं प्रकाशित करवा रहे हैं। क्योंकि हिंदी भाषा का बाजार बहुत बड़ा है। ऐसे में हिंदी के अलावा किसी अन्य विदेशी भाषा के साहित्य का अनुवाद करके भी पैसा कमाया जा सकता है।
अनुवादक को गैर सरकारी कार्यालयों में भी नौकरी की असीम संभावनाएं होती हैं। यदि हिंदी भाषा के साथ-साथ किसी विषय पर अच्छी पकड़ हो तो अनुवादक की महत्ता और सैलरी दोनों बढ़ जाती है। भारत सरकार के अधीन वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग काम करता है। यहाँ पर हिंदी और अन्य सभी भारतीय भाषाओं के वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दों को पारिभाषित और नए शब्दों का विकास किया जाता है। यहाँ भी अंग्रेजी की जानकारी के साथ हिंदी भाषा में कुशल लोगों के लिए रोजगार के अवसर हैं।
इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट माध्यमों में रोजगार के अवसर
आज बड़ी संख्या में पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं। बहुत सी पत्र-पत्रिकाएं अंग्रेजी व हिंदी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होती हैं। इन दोनों में अधिकतर खबरें और रचनाएं एक दूसरे में अनुवाद के माध्यम से प्रकाशित की जाती हैं। अखबारों में विज्ञान, तकनीक व विदेशी खबरों का अनुवाद अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कर प्रकाशित किया जाता है। यदि दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ है तो मीडिया के प्रिंट माध्यम में नौकरी की कोई कमी नहीं है।
आज करीब हजार से अधिक टीवी चैनल हैं जिन पर हिंदी में कार्यक्रम प्रकाशित होते हैं। यहां तक कि कार्टून नेटवर्क, डिस्कवरी-नेशनल ज्योग्राफी चैनल को भी हिंदी में कार्यक्रम बनाने पड़ रहे हैं। हिंदी का बाजार इतना वृहत है कि इन विदेशी चैनलों को भी हिंदी में कार्यक्रम बनाकर प्रसारित करने को मजबूर होना पड़ा है। अंग्रेजी के अलावा यदि आप हिंदी भाषा में दक्ष हैं तो यहां भी रोजगार की बिल्कुल कमी नहीं है।
टीवी चैनलों की भरमार है। हिंदी में असंख्य धारावाहिक प्रसारित हो रहे हैं। इन धारावाहिकों में पटकथा लेखक की आवश्यकता पड़ती है। विज्ञापन आज धड़ल्ले से हिंदी में बन रहे हैं। विदेशी कम्पनियां भी अब हिंदी में विज्ञापन तैयार करवा रही हैं। यदि आप विज्ञापन के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं तो नाम और शोहरत की कोई कमी नहीं है। सेंसर बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष प्रसून जोशी ने अपना करियर विज्ञापन लेखन से ही शुरू किया था।
हिंदी भाषा के जानकारों के लिए कुछ अन्य अवसर
साहित्य लेखन, फीचर लेखन, बधाई कार्ड लेखन कुछ ऐसे स्वतंत्र माध्यम हैं जिनमें दक्षता हासिल कर नाम और पैसा दोनों कमाया जा सकता है। पत्र-पत्रिकाओं एवं प्रकाशकों के यहाँ प्रूफ रीडिंग, टाइपिंग जानने वालों की बहुत मांग होती है। अंग्रेजी टाइपिंग करने वाले आपको बहुत मिल जाएंगे पर हिंदी में टाइपिंग करना आज भी लोगों के लिए दुरूह है। यदि हिंदी भाषा पर पकड़ बनाने के साथ-साथ टाइपिंग भी सीख लेते हैं तो प्रकाशकों के यहाँ पार्ट टाइम जॉब करके पैसा कमाया जा सकता है।
हिंदी भाषा में रोजगार की संभावनाएं अनंत हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हमें हिंदी को उतनी ही गंभीरता से पढ़ना होगा जितनी कि अंग्रेजी को पढ़ते हैं। हिंदी के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी। हिंदी हमारी मातृभाषा है और हमारी अस्मिता से जुड़ी है। अपनी भाषा की उपेक्षा कर कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता। हिंदी भारतीय ज्ञान-विज्ञान-अध्यात्म की वाहक है। हिंदी एक सरल एवं वैज्ञानिक भाषा है। आज पूरा विश्व हिंदी को स्वीकार करने को तैयार है। जरूरत इस बात की है कि हम भी अपनी भाषा से प्यार करें। यदि अंग्रेजी बोलने की मजबूरी न हो तो बोलचाल में ज्यादा से ज्यादा हिंदी भाषा का इस्तेमाल करें।

कँवलजीत कौर (लेखिका)
शोध छात्रा, हिंदी विभाग, बीएचयू