गुलाबी नगरी में गुलज़ार हैं चाय वाले  ‘गुलाब जी’

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

चाय के दम पर मानव सेवा

अद्भुत शख्सियत गुलाबसिंह धीरावत

70 सालों से भूखों और ग़रीबों को खाना खिला रहे हैं।

आमदनी से एक अठ्ठनी नहीं बचाते, जो कमाते हैं सब जनसेवा में लगा देते हैं।

जागीदारी का किया त्याग औऱ बने स्वाबलंबी

gulab ji

 ………

समृद्ध परिवार में पैदा हुए एक शख़्स ने सुख सुविधाओं का त्याग किया और सादगी के उस रास्ते पर चल पड़े जो मुश्किलों भरा था। ये इंसान चकाचौंध की इस दुनिया में परोपकार की अनोखी मिसाल कायम कर रहे है।

…………

जयपुर। गुलाबी नगरी के बगीचे में एक गुलाब ऐसा है जो आज़ादी से पहले खिला लेकिन उसकी महक आज भी बरक़रार है। पिंकी सिटी के नाम से मशहूर राजस्थान की राजधानी जयपुर का एक बाशिंदा अपनी सादगी से वो रुतबा हासिल कर चुका है जिसे हासिल करने के लिए लोगों को कई दशक लग जाते हैं।

गुलाब से गुलाब जी चायवाले का सफ़रनामा

गुलाबी नगरी में रहने वाले गुलाब जी के हाथों में ऐसा जादू है कि जो भी उनके हाथ की बनी चाय का स्वाद चख लेता है वो दोबारा जयपुर ज़रूर आता है। आज़ादी से पहले सन 1946 में गुलाब सिंह ने चाय का एक ठेला लगाया और उसके बाद एक छोटी सी दुकान ली, उस वक़्त के गुलाब अब गुलाब जी बन चुके हैं। समृद्ध परिवार में पैदा हुए गुलाब जी का जीवन बड़ा ही सादगी भरा है।

 

जागीरी का त्याग,बने स्वावलंबी

गुलाबजी का जन्म एक जागीरदारी प्रथाओं वाले एक  परिवार में हुआ था। लेकिन गुलाबजी के मानस पटल पर कभी जागीदारी खुमार नहीं रहा। बचपन से ही गुजाबजी के मन में धार्मिक और सेवा भावी प्रवृति रही। गुरुकुल में अपने पारिवारिक जोशी से पांच वर्ष तक शिक्षा ग्रहण कर गुलाबजी ने अपनी जागीरी का त्याग कर दिया । गुलाबजी ने निश्चय किया कि वो एक स्वाबलंबी बनेंगे। और सात्विक कमाई कर उसी से समाज सेवा करेंगे। औऱ उन्होंने एक चाय की दुकान खोल ली। चाय की दुकान खोलने के बाद ही गुलाबजी सुबह सुबह निशक्त जनों को मुफ्त में चाय पिलाने लगे। शुरु में तो दो चार निशक्त व्यक्ति हर रोज आया करते थे । पर आज उनकी संख्या 200-300 है, जिन्हें गुलाबजी निशुल्क चाय, ब्रेड व कचौरी उपलब्ध कराते है। यहीं नहीं दोपहर में भी गुलाबजी की दुकान पर निशक्त जनों को मुफ्त भोजन के कूपन बांटे जाते है जिनके आधार पर लगभग 200-300 लोगो को एक सब्जी औऱ पराठा बिना किसी शुल्क के खाना दिया जाता है।

 

IMG_8880 (1)

चाय में मोहब्बत की मिठास

जयपुर के एमआई रोड स्थित गणपति प्लाज़ा के सामने छोटीसी चाय की दुकान, अक़्सर सफ़ेद कुर्ता पैजामा और सबसे विनम्रता से बात करते एक शख़्स दिखाई देंगे, उन्हीं का नाम गुलाब जी है। इनकी चाय में मोहब्बत की ऐसी मिठास है जो लोगों का मन मोह लेती है। सुबह साढ़े चार बजे से रात के आठ बजे तक क़रीब सौ किलो दूध की चाय बेचते हैं और अगर बात लजीज़ पकवानों की करें तो उनकी छोटी सी  पर देसी घी में तले समोसे और मावे के पेड़ों की बात ही निराली है।

 

 

शेखावत और शिवकुमार शर्मा भी हुए कायल

गुलाबजी की तरह उनकी चाय का स्वाद भी लाजवाब है। उनकी दुकान पर दूर दूर से लोग उनकी चाय पीने आते हैं। पूर्व उपराष्ट्रपति भौरोंसिंह शेखावत तो अक्सर उनकी दुकान पर चाय पीने आया करते थे। संतूर वादक शिवकुमार शर्मा को किसी संगीत प्रेमी ने जब गुलाबजी के कार्यों की जानकारी दी तो वे भी खुद को उनसे मिलने औऱ चाय पीने से नहीं रोक पाए।

 

 

गुलाबजी की जिजीवीषा का परिणाम

गुलाबजी की जिजीवीषा का ही परिणाम हैकि गणपति प्लाजा स्थित यंत्रेश्वर महादेव मंदिर में 40 सालों से उनके दम पर संगीत के दो बड़े समारोह होते रहे हैं। गुलाब जी ने ही इस मंदिर की स्थापना करवाई और हर साल सात फरवरी को मंदिर का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर भजन संध्या का आयोजन होता है इसके अलावा हर साल जन्माष्टमी के दिन भव्य कार्यक्रम होता है।हर साल 7 फरवरी औऱ जन्माष्टमी के दिन होने वाले इन समारोहों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां कार्यक्रम देने वाले कलाकार इतनी बड़ी संख्या में जुट जाते है कि कई कलाकारों का तो अगले दिन सुबह तक भी नंबर नहीं आता। जयपुर ही नहीं राजस्थान के बाहर से भी कलाकार बिना बुलावे यहां आते है और गायन,वादन, नृत्य की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देते हैं। खास बात ये है कि इस समारोह में कोई स्टेज नहीं होता । बिना औपचारिकता के सब कलाकार एक ही जाजम पर बैठते है।

 

आपने एक कहावत सुनी होगी, साईं इतना दीजिए जा में कुटुंब समाय, मैं भी भूखा ना रहूं और साधु भी भूखा ना जाय, भले ही ये कहावत किताबों में लिखी गई हो लेकिन इसे गुलाब जी सिद्ध कर दिखाया।