वसुंधरा सरकार को चुनाव में किसान दिखाएंगे आईना, गांवों में नहीं घुसने देंगे BJP मंत्रियों को : अमराराम

FACEBOOK/ALL INDIA KISAN SABHA
Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

फोकस भारत। राजस्थान में फिर से कर्ज माफ़ी को लेकर वसुंधरा सरकार और किसान आमने सामने है। दरअसल किसान ऋण माफी की सरकार की घोषणा से नाराज है। इनकी मांग है कि कर्ज माफी में सभी किसानों को शामिल किया जाए। वही सरकार की दलील है कि उसने 8,000 करोड़ रूपये के ऋण माफ़ किये हैं। ऋण माफी को लेकर किसानों ने राजस्थान में कई जगहों पर रास्ते रोक दिए हैं। जयपुर कूच के दरमियान
पुलिस ने किसान सभा जैसे संगठनों के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार नेताओं में किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक अमराराम और प्रदेशाध्यक्ष पेमाराम है। लेकिन शुक्रवार को मजबूरी में विधानसभा में राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद ने किसानों को रिहा करने का ऐलान किया। जिसके बाद किसानों को रिहा किया गया।

किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक अमराराम ने रिहाई के बाद कहा कि सरकार ने समझौते में सभी किसानों के कर्ज माफ़ करने का वादा किया था, मगर अब सरकार ने सिर्फ लघु और सीमांत किसानों को ही अपने दायरे में रखा, वो भी सहकारी क्षेत्र के किसान। हम सभी किसानों को कर्ज से निजात दिलाना चाहते हैं । लेकिन वसुंधरा सरकार ने सैकड़ों किसानों को गिरफ्तार करके सामंतवादी सोच का परिचय दिया है। जयपुर में किसानों को घुसने नहीं दिया गया। अब हम 2018 के चुनाव में वसुंधरा सरकार को आईना दिखाएंगे। गांवों में भाजपा के विधायकों और मंत्रियों को घुसने नहीं दिया जाएगा।

किसानों का कहना है कि सरकार ने वादा खिलाफी की है। ये वो वक्त है जब खेतों में रबी की फसल तैयार है। हमारे घरों में होली के मंगल गीत गाए जाते है। लेकिन अपने अधिकारों और सरकारी के रवैये के खिलाफ हमें सड़कों पर उतरना पडा है। मसलन पिछले साल सितंबर में किसान सभा और उसके सहयोगी संगठनों ने बड़ा आंदोलन किया था और सीकर से गुजरने वाले राजमार्ग को जाम कर दिया था। सरकार ने मांगे मानी लेकिन किसानों का कहना है कि अभी तक पूरी नहीं की गई है।

कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने मीडिया से कहा कि किसानो के लिए भाजपा सरकार ने बहुत कुछ किया है और आगे भी ज़रूरत पड़ी तो किया जायेगा, मगर सरकार किसी दबाव में नहीं आएगी। वहीं विधानसभा में कांग्रेस सचेतक गोविन्द डोटासरा कहते है, ”सरकार ने पहले मांगे मानने में किसानो को धोखा दिया और जब वे अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर निकले तो पुलिस बल से उन्हें रोक दिया गया, यह अनुचित है।”