फोकस भारत। देश में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी होती जा रही है कि इन्हे उखाड़ फैंकना तो कोसों दूर की बात है। अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई बोलने की हिम्मत करता है तो उन्हे तड़ीपार की सजा भूगतनी पड़ती है, मामला चाहे लोकतंत्र के किसी भी स्तम्भ से जूड़ा हो। हमारे देश में सरकारी नौकरी को ज्वाईन करने पर देश की सेवा का जज्बा लेते हुए सबसे पहले शपथ ली जाती है, परतुं उस शपथ का ठीक तरह से निर्वहन नहीं किया जाता। शपथ के उन चन्द पन्नों को धीरे-धीरे किनारे कर दिया जाता है और उनकी सोच भ्रष्टाचार के दल- दल में फंसती जाती है। इसी प्रकार हम बात करते है लोकतंत्र के सबसे मजबूत व विश्वसनिय स्तम्भ न्यायपालिका की। लेकिन न्यायपालिका के एक चर्चित एवं ईमानदार न्यायिक अधिकारी जो भ्रष्टाचार की प्रताड़ना के हाल ही में शिकार हुए है। मध्यप्रदेश में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए गए अपर सत्र न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार श्रीवास ने खास बातचीत की फोकस भारत से।

MP में न्यायिक इमरजेंसी चल रही, भ्रष्टाचारियों को प्रमोशन दे रहे है: पूर्व जज श्रीवास
न्यायिक सेवा में कुछ लोगों द्वारा भ्रष्टाचार के गंदे किचड़ में लिपटकर सरेआम गुंडागर्दी की जा रही है। न्यायिक भर्ती घोटाला और मनमाने आदेशों के खिलाफ आवाज उठाने पर दोषियों को बचाने के लिए मेरे खिलाफ कार्रवाई की गई। चार्जशीट जारी होने के बाद सुनवाई किए बगैर दंड दे दिया। जिनके खिलाफ जांच में लैंगिक शोषण और भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हुए, उन्हें प्रमोशन मिल रहे हैं। यह बात अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए गए अपर सत्र न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार श्रीवास ने मध्यप्रदेश के रतलाम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कही। ‘मुझे कोई नेता नहीं बनना, मैं गरीब परिवार से आया हूं, न्याय करना मेरा पेशा रहा है, मैं सिर्फ अन्याय और गलत नीति के खिलाफ लड़ रहा हूं, लेकिन लड़ाई बीच में नहीं छोड़ूंगा।’
सुनवाई के लिए स्वतंत्र फोरम बने
सेवानिवृत जज श्रीवास ने बताया कि न्यायपालिका में जजों की सुनवाई के लिए एक स्वंतत्र फोरम बनना चाहिए। न्यायपालिका में खामियों को उजागर करने वाले जजों को न्याय नहीं मिल पाता है।
मुझे बनाया टारगेट
सेवानिवृत जज श्रीवास ने बताया कि 13 मार्च 2018 को नियम बना कि जिस न्यायाधीश की 10 वर्ष की सेवा या 50 वर्ष की उम्र हो चुकी है उसे लोकहित में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जाएगा। मध्यप्रदेश में 1600 न्यायाधीशों में से इस नियम के दायरे में एकमात्र मुझे ही सेवानिवृत्ति दी गई। यह नियम उच्च न्यायिक सेवा शर्तें नियम में लागू है परंतु उच्च न्यायिक सेवा में दो साल तथा 16 साल लोअर कोर्ट में सेवा दी। नियम अनुसार सत्यनिष्ठा के प्रश्न पर, कार्य का स्तर या शारीरिक दक्षता कम होने पर, सीआर खराब होने पर या प्रतिकूल टिप्पणी होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति से दंडित किया जाता है। परंतु मेरे खिलाफ न तो अनियमितता या भ्रष्टाचार की शिकायत है, और न ही काम को लेकर कोई नोटिस दिया गया। एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी ने माफी मांगे बगैर उन्हें दंड स्वरूप चेतावनी दी। नियम विरुद्ध हुई कार्रवाई पर प्रिंसिपल रजिस्ट्रार ने भी कार्यवाही नहीं की। पूर्व न्यायाधीश श्रीवास ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट के पांच जजों की शिकायत की है। उन्हें बचाने के लिए ही मेरे खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई की गई। इस संबंध में अगस्त 2017 में अवमानना याचिका लगाई थी परंतु आज तक सुनवाई नहीं हुई।
ये घोटाले किये उजागर-
सन 2016 में न्यायाधीश आर.के. श्रीवास ने जबलपुर में हुए चतुर्थश्रेणी भर्ती घोटाले की शिकायत की थी जिसकी आज तक जांच नहीं हुई। अपर सत्र न्यायाधीशों की नियुक्ति में हुई गड़बड़ी को उजागर किया था। उम्मीदवार सुनील कुमार ने उत्तरपुस्तिका में चार अलग-अलग स्थानों पर अपना नाम लिखकर हस्ताक्षर किए जबकि नियमानुसार उत्तरपुस्तिका में प्रथम पृष्ठ के अलावा परीक्षार्थी का नाम कहीं भी लिखा नहीं होना चाहिए। अन्य उम्मीदवार दीपाली शर्मा, रामविलास गुप्ता, अमितसिंह परिहार ने भी नाम लिखे जिन्हें डिस्क्वालीफाई कर दिया गया। परंतु सुनील कुमार को 40 अंक मिले थे। उनकी उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन कर 60 नंबर दिए गए और अपर सत्र न्यायाधीश पद पर नियुक्त किया। इस मामले की भी जांच नहीं हुई।
मुख्य न्यायाधिपति पर भी लगाए आरोप-
मध्यप्रदेश के पूर्व न्यायधीश आर.के. श्रीवास ने बताया प्रदेश में न्यायिक इमरजेंसी चल रही है। मुख्य न्यायाधिपति हेमंत गुप्ता के परिवार के खिलाफ मनी लांड्रिंग की शिकायत पर चार साल से जांच चल रही है जो आज तक पूरी नहीं हुई। चंडीगढ़ (पंजाब-हरियाणा) हाईकोर्ट के 1029 अभिभाषकों ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। ऐसी स्थिति में उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
साइकल पर निकाल चुके है ‘न्याय यात्रा’
पूर्व जज आरके श्रीवास पिछले साल अगस्त 2017 में साइकल पर ‘न्याय यात्रा’ निकाल चुके है। 9 बिंदुओं की जांच और अनियमितता में सुधार की मांग को लेकर उन्होंने नीमच से 715 किमी दूर जबलपुर के लिए साइकल पर न्याय यात्रा निकाली थी। उसके बाद जबलपुर में 3 दिन का सत्याग्रह भी किया था।
15 महीने में किया 4 बार ट्रांसफर
पूर्व जज श्रीवास ने बताया कि 2012 में न्यायधीशों के ट्रांसफर की पॉलिसी लागू हुई थी। जिसमें 3 साल में जजों के ट्रांसफर किए जाने की बात थी, लेकिन मेरा तो 4-4 महीने के अंतर से ट्रांसफर किया गया था। 17 साल की सेवा में 11 ट्रांसफर हुए। 15 महीने में ही 4 बार ट्रांसफर किया गया था। ये पक्षपात रवैये से किया गया था।
8 मई से निकलेगें न्याय की यात्रा पर, राष्ट्रपति को देगें शिकायत-
पूर्व न्यायधीश आर.के. श्रीवास ने बताया उनके द्वारा की गई शिकायत के बाद ही प्रदेश में 45 बिंदु रोस्टर लागू हुआ। न्यायाधीशों के स्थानांतरण के लिए नई नीति बनाकर नियम लागू किए। इसके अलावा एसीआर कंटेप्ट याचिका पर कार्रवाई की गई है जो उनकी उपलब्धि है। उन्होंने बताया 8 मई से 10 मई के बीच में वे मध्यप्रदेश के नीमच या रतलाम से न्याय यात्रा शुरू करेंगे और दिल्ली जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हे पुरे मामले के एक-एक बिन्दू से अवगत करवायेगें। इसी दौरान राष्ट्रपति के सामने शिकायत पेश करेगें।
Rajendra Kumar Shrivas