फोकस भारत। राजस्थान विधानसभा चुनाव में उतरप्रदेश उपचुनाव की तरह बसपा और सपा गठबंधन देखने को मिल सकता है। इस गठबंधन में नई बात यह देखने को मिल सकती है कि बसपा-सपा का कांग्रेस से गठबंधन हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बसपा कांग्रेस से करीब 15 सीटें मांग रही है और सपा करीब 6 सीटें मांग रही हैं। वहीं कांग्रेस बसपा को 10 और सपा को 4 सीटें देने पर राजी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक सपा भरतपुर जिले की नगर, अलवर की बानसूर और राजगढ़ और एक अजमेर की सीट पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है। बसपा पूर्वी राजस्थान और शेखावाटी क्षेत्र की कई सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयार कर रही है। इस गठबंधन की कवायद के पीछे की सबसे बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि कांग्रेस बसपा से गठबंधन कर एससी वोट बैंक को मजबूत कर सकती है और सपा के साथ गठबंधन से यादव वोटरों को अपने पाले में करने की कोशिश में जुटी हुई है। उल्लेखनीय है कि यूपी के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने जीत दर्ज की थी, इसी को मद्देनजर रखते हुए राजस्थान में भी इन दोनों दलों की कांग्रेस से गठबंधन करने को लेकर बातचीत चल रही है। वहीं बीएसपी के एक बडे नेता की मानें तो इन दोनों राजस्थान और मध्यप्रदेश राज्यों में कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़े तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए। हाल में ही एमपी का चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव कांग्रेस ने जीत लिया था। कांग्रेस के आग्रह पर बीएसपी चुनाव नहीं लड़ी थी। एमपी में बीएसपी के अब भी चार एमएलए हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में इसी साल के आखिरी में वोट डाले जाएंगे। राज्यसभा चुनाव में हार के बाद मायावती ने कहा था कि चुनाव परिणाम का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
गठबंधन से कांग्रेस को होगा नुकसान ?
राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ का कहना है कि अगर कांग्रेस राजस्थान में सपा-बसपा से गठबंधन करेगी तो कांग्रेस के लिए आगामी चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। इस गठबंधन से प्रदेश में कांग्रेस के वजूद के लिए खतरा पैदा हो सकता है। राजस्थान में 18 प्रतिशत दलित वोट बैंक है, इसका बड़ा हिस्सा अभी कांग्रेस के पास है, अगर कांग्रेस दलितों के मुद्दे सही तरीके से उठाने में नाकाम रही तो आगामी दिनों में दलित वोट का ज्यादा हिस्सा बसपा की तरफ जा सकता है। कांग्रेस ने डांगावास सहित कई इलाकों में दलितों के मुद्दे प्रमुखता से नहीं उठाए, जिसका खामियाजा कांग्रेस को चुनाव में उठाना पड़ा सकता है। मुझे इन तीनों पार्टियों का राजस्थान में गठबंधन होगा, ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आती है। क्योंकि सपा और बसपा का राजस्थान में कोई बहुत बढ़ा आधार नहीं है। कांग्रेस भी ये प्रयोग नहीं करना चाहेगी क्योंकि उतर भारत में राजस्थान ही ऐसा राज्य है जिसमें वो बेहतर स्थिति में है। अगर वो समझौता करती है तो उसकी पॉजिशन कमजोर होगी। दलितों का झुकाव कांग्रेस की तरफ है । बीएसपी को बहुत पसंद नहीं करते है। अतीत में बीएसपी ने दांव आजमाया सुविधा के लिए बीएसपी के विधायक जरुर चुने गए । लेकिन उनका वैचारिक जुड़ाव बसपा से नही रहा। तो बीएसपी ने ऐसे लोगों को टिकट देकर दलितों का विश्वास और खो दिया। मैं पुख्ता तौर पर कह सकता हूं कि ऐसा समझौता नहीं होगा। राजस्थान के दलित पिछले इन सालों में इतना समझ गए है कि बसपा को दिया हआ वोट बेकार होगा। और उससे कुछ नहीं होगा। हालांकि दलित कांग्रेस से खुश नहीं है फिर भी उन्हें संभावना लगती है कि फरियाद कर सकते है, बोल सकते है लेकिन बसपा को वोट देने से वो कारगर नहीं होगा। हां अगर क्रांग्रेस की यहीं स्थिति रही तो भविष्य में उसे इन 18 प्रतिशत लोगों से हाथ धोना पड़ सकता है।
गठबंधन होगा तो बसपा को मिलेगा फायदा
बसपा के राजस्थान प्रभारी धर्मवीर अशोक ने बताया कि हम राजस्थान की सभी 200 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। बसपा का सपा और कांग्रेस से गठबंधन होता है तो हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा। इस बारे में पार्टी के बड़े नेता फैसला करेंगे। हम गठबंधन करने को भी तैयार है और अकेले चुनाव लड़ने को भी तैयार हैं।
कांग्रेस करे सम्मानजनक गठबंधन तो बने बात
समाजवादी पार्टी के राजस्थान प्रभारी ड़ॉ. संजय लाठर का कहना है कि सपा-बसपा का यूपी की तरह राजस्थान में गठबंधन रहेगा और कांग्रेस की तरफ से सम्मानजनक प्रस्ताव आएगा तो हम जरूर गठबंधन करेंगे। सपा-बसपा का इनेलो, लोकदल और हनुमान बेनीवाल के साथ गठबंधन को लेकर भी बातचीत चल रही है। आगामी दिनों में पूरा जनता परिवार एक मंच पर एक मोर्चे की रूप में सामने आ सकता है, इस बारे में भी कवायद चल रही है।
समाजवादी पार्टी के ये 3 मजबूत चेहरे
पूर्वी राजस्थान में समाजवादी पार्टी के मजबूत उम्मीदवारों की बात करें तो किसान नेता व भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक रहे नेम सिंह फौजदार भरतपुर जिले की नगर विधानसभा सीट से मजबूत दावेदार है। जो पहले विधानसभा चुनाव में दूसरे नम्बर पर रहे थे। वहीं अलवर की बानसूर सीट से मुकेश यादव प्रबल दावेदार है सपा के। राजगढ़ सीट से सपा के टिकट पर विधायक रहे चुके सूरजभान धानका इस बार भी सपा के मजबूत दावेदार है। सूत्रों के मुताबिक सपा इन तीनों सीटों पर पूरी तैयारी के साथ विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बना रही है।
इन जिलों में बसपा की अच्छी पकड़
बसपा भरतपुर, अलवर,धौलपुर, और करौली जिलें में पिछले कई विधानसभा चुनावों में मजबूत स्थिति में रही। धौलपुर और करौली में बसपा के विधायक रह चुके है। वहीं भरतपुर जिले की वैर विधानसभा सीट से अतरसिंह पिछले 2 विधानसभा चुनावों में दूसरे नम्बर पर रहे है। जो आने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा के मजबूत नेताओं में से एक है। वही भरतपुर जिले की नदबई सीट से बसपा के प्रत्याशी पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे।