फोकस भारत। राजस्थान की राजनीति में गेम चेंजर, किंग मेकर, चाणक्य और राजनीतिक पंडित जैसे नामों से लोकप्रिय है राजनीतिज्ञ चन्द्रराज सिंघवी। स्वतंत्र पार्टी से राजनीति की शुरुआत करने वाले मारवाड़ के चन्द्रराज सिंघवी 30 निर्दलीय विधायक जीतकर लाने की कोशिश में है। वहीं सिंघवी 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय मंच के जरिए मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब बुने हुए है। फोकस भारत की संपादक कविता नरुका से कुशल राजनीतिज्ञ चन्द्रराज सिंघवी ने राजस्थान में राजनैतिक विकल्प के साथ ही तमाम मुद्दों पर बेबाक बातचीत की।

( इंटरव्यू हाईलाइट्स)
मैं चुनाव की राजनीति में असफल हूं, मैं मानसिक राजनीति करता हूं : सिंघवी
चन्द्रराज सिंघवी के तीखे बोल-
-मेरा दावा CM बनूंगा, नहीं तो CM बनाने में होगा अहम रोल।
-वसुंधरा राजे मेरी धर्म बहन है, उन पर नहीं किया कभी निजी हमला।
-कहा गए वसुंधरा के 9 रत्न ?
-वसुंधरा राजे यूज एंड थ्रो के सिद्धांत पर चलती है।
-वसुंधरा ने मुझे भी यूज किया।
-ओम माथुर वसुंधरा की पहले करते थे खिलाफत, आज चरणों के दास है।
-तिवाड़ी बडी खूटी से बंधा ‘बेल’ था ,अब छोटी ‘खूटी’ से बंध गया ।
-घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी नही ‘खूटी’ है ।
-बूढे राज नही छोड़ते, युवाओं को इन्हें ठोकर मारकर राजनीति से हटाना होगा ।

बीजेपी-कांग्रेस का गणित बिगाडेगा निर्दलीय मंच ?
55 सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी में चन्द्रराज सिंघवी
चन्द्रराज सिंघवी मुख्यमंत्री बनने की जोड़-तोड़ में
निर्दलीय मंच के जरिए सता का रिमोट कंट्रोल क्या सिंघवी के पास रहेगा ?
क्या सिंघवी सूबे में तीसरी राजनैतिक शक्ति खड़ी कर पायेंगे ?
क्या राजस्थान राजनैतिक विकल्प की राह पर ?
‘मैं CM पद का दावेदार हूं’
सिंघवी अपने निर्दलीय मंच के बैनर पर करीब 55 सीटों पर मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार उतारने जा रहे है। और बाकी सीटों पर उनकी नजर उन मजबूत नेताओं पर टिकी है। जो टिकट से महरुम होकर चुनावी मैदान में उतर सकते है। सिंघवी का साफ कहना है कि उनकी कोशिश है कि कम से कम 30 सीटो पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते। अगर ऐसा होता है तो अगली विधानसभा में उनकी भूमिका किंग मेकर की होगी। हालांकि इस कडी में सिंधवी खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी मान रहे है।

दासता स्वीकार करने से बेहतर था पार्टी छोड़ना
60 साल से राजनीति में हूं। कभी किसी पार्टी के आगे झुका नही, अपने सिद्धांतो से कभी समझौता नहीं किया। जब भी किसी पार्टी ने चाहा कि कार्यकर्ता दासता करे तभी मैंने उस पार्टी को त्याग दिया। विरोध मेरा हर जगह होता है। ऐसे में मेरा मानना है कि विरोध होना ही आदमी की पहचान है। आगे सिंघवी कहते है कि कम्यूनिस्ट के अलावा किसी भी राजनीतिक पार्टी की कोई विचारधारा नही बची है। अब तो सतातंत्र बचा है। मैंने वो जमाना देखा है जब डॉ राधाकिशन जी के साथ 16 साल की उम्र में मैं आम सभा में बोलता था । 60 साल के राजनीतिक जीवन में मेरे ऊपर एक आरोप नही है। मैंने कभी चापलूसी नहीं की इसलिए पार्टी बदलनी पड़ी।

व्यक्तित्व की राजनीति की, पद की नहीं
सिंघवी कहते है कि मैने हमेशा सच बोला। मेरा सिद्धांत है कि किसी से डरो मत हमेशा सच बोलों। मैं व्यक्तित्व की राजनीति करता हूं पद की नहीं। मेरा दावा है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा की 9 जिलों में एंट्री तक नहीं होगी। भरतपुर, सीकर, झुंझुनूं, चूरु, हनुमानगढ, बीकानेर, बाड़मेर, गंगानगर और नागौर ऐसे जिले है जो बीजेपी के हाथ से जाएंगे।
‘वसुंधरा यूज एंड थ्रो पर चलती है’
वसुंधरा राजे ने 25 हजार लोगो के बीच में मुझे राखी बांधी थी और बड़ा भाई माना था। मैं रिश्ते का मान रखता हूं। मैंने कभी राजे के खिलाफ अपशब्द नहीं कहा। लेकिन गलत संगत की वजह से गलत दिशा में है। 2003 में हम साथ थे लेकिन राजे यूज एंड थ्रो के नियम पर चलती है। सिंघवी कहते है कि मेरा भी इस्तेमाल किया गया। ओम माथुर पहले वसुंधरा की खिलाफत करते थे आज चरणों के दास बन गए है। सत्यनारायम गुप्ता, सुधांशु मितल, गोविंद मोहन को वसुंधरा नें यूज करके थ्रो किया है।
वसुंधरा मेरी धर्म बहन है, उन पर कभी नहीं लगाया निजी आरोप
चन्द्रराज सिंघवी कहते है कि मैंने कभी टिकट की राजनीति नही की। इस बार सही लोगों को राजनीति में लाएंगे। और मैं स्वंय मुख्यमंत्री बनूंगा । मैं दावे से कहता हूं कि एक रुपए में 12 आने मेरे मुख्यमंत्री बनने की संभावना है और 16 आने संभावना ये है कि मैं चाहूंगा उसको बनाऊंगा मुख्यमंत्री। हमारी 30 सीटे आएंगी। सूबे में बहुमत की सरकार नहीं बनेगी। मिली जुली सरकार राजस्थान में बनेगी। हमारी एक बहुत बड़ी भूमिका होगी। राजनीतिक रुप से भाजपा का कड़ा विरोध किया जाएगा। लेकिन निजी रुप से वसुंधरा का कभी विरोध नहीं किया जाएगा। क्योकि वो मेरी बहन है। आज भी भाजपा में वसुंधरा के मुकाबले का नेता नही है लेकिन उनके जैसा भी कोई नही है जिसके गंदे साथी नही हो।

बीजेपी-कांग्रेस ने नही दिया टिकट, तो निर्दलीय मंच करेगा स्वागत
चन्द्रराज सिंघवी ने आरोप लगाया कि मोदी और अमित शाह की पिछली 5 सभाओं के वीडियों निकालोगे तो वही चेहरे बैठे हुए नजर आएंगे। इन सभाओ में आम जनता नही है। वसुंधरा जी अकबर बनना चाहती थी तो उन्हें 9 रत्न साथ रखने चाहिए थे। सिघवी आगे कहते है कि जयपुर शहर में बीजेपी की महज 2 -3 सीटे आएंगी । जब किसी को कांग्रेस और बीजेपी से टिकट नहीं मिले तो मेरे पास आ सकते है। मैं आपके अखबार के माध्यम से घोषणा करता हूं कि जन उम्मीदवारों के टिकट पक्षपात,विश्वासघात और झूठ से कट जाए तो उनमें कोई अच्छे आदमी हो तो मेरे पास आए। मैं निर्दलीय मंच से उनका स्वागत करुंगा और उनको टिकट दूंगा। सिंघवी का कहना है कि केन्द्र सरकार ने मीडिया को भ्रष्ट बना दिया है। हर मीडिया मोदी-मोदी कर रहा है बाकि लोग कहा गए। मीडिया को खरीद लिया गया है। पत्रकारिता के गिरते स्तर को बचाने की जरुरत है।

व्यक्तित्व ऐसा बनाया कि उसके आगे कोई पद स्टेंड नहीं करता
चन्द्रराज सिंघवी बताते है कि मैं चुनाव की राजनीति में असफल हूं, मैं मानसिक राजनीति करता हूं । वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी के बीजेपी छोड़ कर नई पार्टी भारत वाहिनी बनाने के सवाल पर सिंघवी कहते है कि तिवाड़ी बडी खूटी से बंधा बेल था अब छोटी खूटी से बंध गया। ये पार्टी नही खूटी है ।सिंघवी का कहना है राजस्थान की जनता भाजपा और कांग्रेस से परेशान है। इस बार वे प्रदेश की जनता को अच्छे और सक्षम लोगो का विकल्प देने के लिए राजस्थान विधानसभा 2018 के चुनाव में 150 सीटो पर साफ छवि और दमदार लोगो को चुनाव लड़ाने की तैयारी में है और उनका दावा है कि हम 50 सीट जीतेंगे। ‘मैंने अपने जीवन के व्यक्तित्व को ऐसा बनाया है कि उसके आगे कोई पद स्टेंड ही नही करता है’। मैं चुनाव नहीं लडूंगा बल्कि लडाऊंगा। 2 लाख लोगो को राजी करके एमएलए बनने से अच्छा है कि 30 विधायकों को राजी करके मुख्यमंत्री बनूं।
बोल्ड इमेज मेरे जीवन की पूंजी
सिंघवी कहते है कि युवाओं को राजनीति में आगे आना चाहिए ये नारा पुराना हो गया है। बूढे राज नही छोड़ते है बल्कि युवाओं को तो इन्हें ठोकर मारकर राजनीति से हटाना होगा। ये सता का मोह छुटता नही है. बहुत कम लोग है जो छोड़ पाते है। हमे सता का मोह नही है बल्कि साफ कहते है कि लोकप्रियता का मोह है। मेरे मरने के बाद लोग कहे कि वो बोल्ड आदमी था बस यहीं जीवन की पूंजी है।
युवाओं को मैसेज
युवाओं को मेरा मैसेज है कि झुकों मत और रुको मत। प्रेम से मिले तो ले लो, नहीं तो छिन्न कर ले लो। हार पहनाने को तैयार रहो, तो ठोकर मारने को भी तैयार रहो।
राजनीतिक और करियर लाइफ से पहले परिवार की जिम्मेदारी निभाएं महिलाएं
सिंघवी कहते है कि राजनीति में महिलाओं को आना चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि महिलाओं को राजनीतिक और करियर लाइफ से पहले अपने परिवार की जिम्मेदारी निभानी चाहिए । बच्चा घर में रो रहा है और महिला नौकरी करे। ये ठीक नही है। पति भूखा सो रहा है और महिला कल्ब जा रही है । ये ठीक नही है। महिलाओं को पुरुषों से अलग राजनीति में चरित्र दिखाना चाहिए ।
सिंघवी ने बदले कई दल
सिंघवी लंबे अरसे तक कांग्रेस में रहे. फिर भाजपा का दामन थाम लिया. 2003 में बनी भाजपा सरकार में उन्हें बीसूका का उपाध्यक्ष बनाया गया, लेकिन पार्टी उनसे जल्द तंग आ गई और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. तब से अब तक उन्होंने कई ठिकाने बदले. अब फिर से खुद को राजनीति का आका बनाने के मकसद से सक्रिय हुए हैं. जो उम्मीदवार चुनाव जीतते दिखेंगे सिंघवी पर उन दांव लगायेंगे, निर्दलीय मंच के संयोजक सिंघवी की चुनावी बिसात किसे नुकसान पहुंचायेगी और किसे फायदा ये तो चुनावों में ही पता चलेगा।
राजनैतिक सफरनामा
1964 में जोधपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे इसी के साथ-साथ नेशनल कॉंसिल ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुने गए। नाथूरामजी मिर्धा के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता स्वीकार की। मुख्यमंत्री हरदेव जोशी ने इन्हें राजस्थान आवास वित्त विभाग के र्निदेशक पद पर मनोनयन किया एवं केबिनेट मंत्री स्तर का पद दिया। प्रदेश कार्यकारिणी में मुख्य संगठन सचिव का पद भी दिया। यह पद कांग्रेस में प्रथम बार सृजित हुआ, सिंघवी उसके बाद सक्रिय भूमिका में चर्चित रहे। प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव बने। चुनाव के दौरान इन्हें मध्यप्रदेश प्रभारी बनाया गया, जिसे निभाते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण आठ मंत्रियों को निष्कासित कर महत्वपूर्ण एवं साहसी निर्णय लिया एवं अपने परिक्षण एवं निर्णय लेने की क्षमता को उजागर किया। बाद में पार्टी में मतभेद एवं राज्य के कुछ नेताओं से राजनैतिक प्रतिस्पर्धा के कारण कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया। बाद में भारतीय जनता पार्टी में आए। भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष, नेशनल कार्यकारिणी में सदस्य, गोविंदाचार्य प्रभारी कार्यकाल में असोसिएट प्रभारी रहने के बाद राजस्थान की राजनैतिक विश्लेषण में ख्याति प्राप्त होने के परिणाम स्वरूप प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने एक विशेष पद राजनैतिक सलाहकार का सृजन किया और चन्द्रराज सिंघवी पहले राजनैतिक सलाहकार बने। इस कार्यकाल में लोकसभा व विधानसभा चुनावों में टिकट चयन, प्रचार-प्रसार और समन्वय की जिम्मेदारी दी गई। चुनाव से पूर्व 120 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को विजय का दावा करने वाले सिंघवी की बात पर किसी ने भरोसा नहीं किया, लेकिन परिणाम जब ठीक 120 सीट पर विजय होने पर आया तब सबने राजनैतिक विश्लेषण की सराहना की। इसके बाद बीजेपी छोड़कर जदयू से जुडे। सिंघवी ने जदयू छोडऩे के बाद राजस्थान में कई पार्टीयों को मिलाकर तीसरा मोर्चा बनाया।
20 सूत्री कार्यक्रम समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जो कि केबिनेट मंत्री स्तर का पद था। किन्तु पार्टी में उनके बढ़ते प्रभाव से उनका विरोध बढ़ा व पार्टी छोडऩी पड़ी। पार्टी छोड़ते ही बसपा के सहप्रभारी बने, किन्तु बसपा के हिन्दू देवी-देवता के विरूद्ध प्रचार से दुखी होकर बसपा को छोड़ दिया, इसके तुरन्त पश्चात उमा भारती की भारतीय जन शक्ति पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। कालान्तर में उमा भारती के पार्टी समाप्त करने के परिणाम स्वरूप इन्हें तुरन्त बाद जनता दल (जद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव जी ने राष्ट्रीय महासचिव पद पर नियुक्त किया। चन्द्रराज सिंघवी को जनता दल यूनाईट में अपनी सेवाएं देते हुए राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। गुजरात चुनावों में पार्टी के मुख्य मंत्री नितिश कुमार के नरेन्द्र मोदी विरोधी नितियों का सिंघवी ने जबरदस्त विरोध किया, जिसके परिणाम स्वरूप नितिश कुमार ने इन्हें पार्टी से निकाल दिया। शरद यादव ने एनडीए के संयोजक पद त्याग दिया और नितिश कुमार ने उनके साथ भी वही किया जो सिंघवी के साथ किया।