फोकस भारत। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायवती ने मंगलवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है । मायावती का कहना है कि अगर वो ‘अपने समुदाय की बात सदन में नहीं रख सकतीं’ तो उनका राज्यसभा सदस्य रहने का कोई फायदा नहीं । दरअसल मायावती को राज्यसभा में बोलने का मौका नहीं मिलने से वह नाराज हो गई। मायवती ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दलितों के साथ हुई कथित हिंसा का मुद्दा उठाया था। उन्हें बोलने के लिए तीन मिनट का वक्त दिया गया था। मायावती जब इसके आगे बोलने लगीं तो उन्हें उप सभापति पीजे कुरियन ने रोका। इस पर मायावती खफा हो गईं और उन्होंने कहा कि वो इस्तीफा दे देंगी। फिर बाद में मायावती ने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा भेज दिया। मायावती ने अपने 3 पेज के पत्र में सत्ता पक्ष पर भी आरोप लगाया है और कहा है कि जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो भाजपा के सांसदों और मंत्रियों ने शोर-शराबा करना शुरू कर दिया। मायावती का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल अगले साल अप्रैल तक था।
क्या मायावती का इस्तीफा मंजूर होगा?
संसद की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए जो नियम हैं, नियम ये है कि संसद के दोनों सदनों का कोई भी सदस्य जब अपनी सदस्यता से इस्तीफा देता है तो महज एक लाइन में लिखकर संबंद्ध चेयरमैन या स्पीकर को सौंपना होता है। जबकि मायावती ने जो इस्तीफा राज्यसभा चेयरमैन के ऑफिस जाकर सौंपा वो तीन पन्नों का है। नियम के मुताबिक इस्तीफे के साथ न ही कोई कारण बताया जाता है और न ही उस पर कोई सफाई दी जाती है। यानी कोई भी संसद सदस्य इस्तीफा देते वक्त इस्तीफा देने का कारण त्यागपत्र में नहीं लिख सकता है।
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