कांग्रेस की बूथ प्रबंधन रणनीति से आगे बीजेपी के ‘पन्ना प्रमुख’

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फोकस भारत/जयपुर। राजस्थान में दो लोकसभा सीटों अलवर और अजमेर के साथ ही एक विधानसभा मांडलगढ़ के लिए उपचुनाव होने को है। जिसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दोनों ही दलों के लिए ये उपचुनाव नाक का सवाल बना हुआ है। माना जा रहा है कि ये उपचुनाव अगले साल होने वाले राजस्थान के विधानसभा चुनावों का आईना होंगे। ऐसे में गुजरात चुनावों के साथ ही राजस्थान उपचुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के नेता पसीना बहा रहे हैं। यूपी चुनावों में जीत दिलवाने वाले पन्ना प्रमुख राजस्थान में भी जीत के सिरमौर बन सकते हैं इसे लेकर पार्टी के भीतरखाने तैयारियां जोरों पर है। बीजेपी ने उपचुनावों के लिए बूथ मैनेजमेंट को माइक्रो लेवल पर साधते हुए पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति की है।

– उपचुनावों को लेकर जमीनी रणनीति में आगे निकली बीजेपी, बूथ पर माइक्रो मैनेजमेंट के लिए नियुक्त किए पन्ना प्रमुख
-यूपी चुनावों में जीत सुनिश्चित करने वाले पन्ना प्रमुख राजस्थान उपचुनावों में खिलाएंगे कमल ?
-कांग्रेस की बूथ प्रबंधन रणनीति से आगे बीजेपी के पन्ना प्रमुख !
-क्या बूथ के माइक्रो मैनेजमेंट में कांग्रेस को मिल रही है बीजेपी से मात ?

कौन हैं ‘पन्ना प्रमुख’ ?
आम तौर पर पार्टियां बूथ लेवल तक ही सक्रिय होकर रणनीति बनाती रही है। जिसमें हर बूथ के लिए 3 से 4 कार्यकर्ता तैनात किए जाते हैं और इनका एक प्रमुख होता है। जिसमें बूथ स्तर पर उनकी जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बूथ में आने वाले सभी लोगों के वोट पार्टी के पक्ष में कर सकें। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी रणनीति बदल कर माइक्रो मैनेजमेंट पर काम किया और उसने बूथ प्रमुख की बजाए पन्ना प्रमुख बनाने का फैसला किया। जिससे पार्टी को हर वोटर तक पहुंचने में आसानी हुई और अन्य दलों के बजाय बीजेपी ज्यादा लोगों के वोट अपने पक्ष में डलवाने में कामयाब हुई। दरअसल पन्ना प्रमुख बनाने की रणनीति में एक गांव की वोटर लिस्ट के एक पन्ने को हर कार्यकर्ता को दिया गया। कहा गया कि इस पन्ने में आने वाले सभी वोटरों के वोट दिलाने की जिम्मेदारी उसकी है। यानि की हर कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दे दी गई और उस पन्ने में आने वाले सभी वोटरों को प्रतीकात्मक तौर पर उस कार्यकर्ता को ही प्रमुख बना दिया गया। निचले स्तर पर कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिलने से ना केवल उसमें उत्साह का संचार हुआ बल्कि पूरे चुनाव में कार्यकर्ता अपना पन्ना लेकर घर-घर घूम पार्टी की नीतियों का प्रचार करते रहे। अभी तक सभी पार्टियां बूथ प्रमुख बनाने की रणनीति पर ही काम करती हैं लेकिन इसमें कई बार बूथ प्रमुखों और उसके अंतर्गत कार्यकर्ताओं में ही मतभेद हो जाते हैं इसका नुकसान वोटिंग वाले दिन उठाना पड़ता है।

रिपोर्ट- कविता नरुका