वो ‘जांबाज महिला पुलिस ऑफिसर’ जिन्होंने आसाराम को पहुंचाया था जेल

फोटो साभार -फेसबुक
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फोकस भारत। यौन उत्पीड़न के मामले में आसाराम को कोर्ट ने दोषी करार देकर उसको उम्रकैद की सजा सुनाई है। आसाराम के साथ मामले के सह अभियुक्त शिल्पी और शरद को 20-20 साल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट का फैसला आने के बाद इस मामले को हैंडल करने वाले पुलिस अधिकारियों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है

आरपीए की पूरी ट्रनिंग होने के बाद जोधपुर में पहली पोस्टिंग थी। इतना हाईप्रोफाइल केस देखकर मन में कई सवाल आए, लेकिन अनुसंधान का जिम्मा मिलने के बाद उन बेटियों के चेहरे जेेहन में थे जिनके साथ दरिंदगी हुई। मैं उन बेटियों को न्याय दिलाना चाहती थी। ये कहना है जांबाज महिला पुलिस अधिकारी चंचल मिश्रा का। साल 2010 में राजस्थान पुलिस सेवा में शामिल होने वाली पुलिस अधिकारी चंचल मिश्रा के लिए शुरुआत से ही इस मामले की जांच आसान नहीं थी। । तब जांच के दौरान ठोस सबूत और गवाह जुटाकर कोर्ट में पेश किए। जिससे आसाराम को कड़ी सजा मिली।हालांकि आसाराम की गिरफ्तारी के बाद से ही समर्थको द्वारा चंचल मिश्रा को कई धमकिया मिली लेकिन उन्होंने परवा नही की। अपने आत्मविश्वास का बरकरार रखा।

आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार करके लाने वाली और बाद में मामले की जांच अधिकारी रही पुलिस उपाधीक्षक चंचल मिश्रा ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे पुलिस और न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है। इस केस को हैंडल करना किसी चुनौती से कम नहीं था। महिलाओं की प्रतिष्ठा के लिए यह केस नींव का पत्थर साबित होगा। आसाराम की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में चले मामले के दौरान चंचल मिश्रा का सामना देश के नामचीन वकीलों से हुआ। चंचल मिश्रा अभियोजन पक्ष की गवाह सूची में 43 नंबर पर थी। 9 जुलाई 2015 से 11 जुलाई 2016 तक चंचल मिश्रा से राम जेठमलानी, मुकुल रोहतगी, केटीएस तुलसी, सलमान खुर्शीद और सुब्रमण्यम स्वामी, सिद्धार्थ लूथरा, सीवी नागेश और केके मेनन जैसे नामचीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जिरह की थी।

जोधपुर की एसीपी चंचल ने अपने मजबूत इरादे के बल पर ही यह मामला सुलझाया, जब आसाराम ने खुद को कमरे में बंद कर लिया तो उन्होंने दरवाजा तोड़ने की धमकी दी। एसीपी ने ठान लिया था कि चाहे जो हो जाए, आसाराम की गिरफ्तारी होगी और मुकदमे को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। आखिरकार किसी भी नजर से देखें, उसके पतन का कारण एक दमदार महिला अफसर ही बनी।आसाराम को इंदौर में गिरफ़्तार किया, उन पर दिल्ली में एफ़आईआर की गई, पीड़िता उत्तर प्रदेश की रहने वाली थी और घटना के वक्त वह किसी दूसरे प्रदेश में पढ़ रही थी। इस जांच का दायरा इतना बड़ा था कि मुख्य जांच अधिकारी को दूसरे राज्यों के जांच अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने में ही बहुत समय लगता था।

इस मामले की मुख्य जांच अधिकारी चंचल मिश्रा बताती हैं, “जांच की सबसे बड़ी मुश्किल ये थी कि ये कई राज्यों में फैली हुई जांच थी। अलग-अलग राज्यों में जाकर आपको सबूत और दस्तावेज़ जुटाने थे और गवाहों की तलाश करनी थी। हमें इस जांच को समय रहते पूरा करना था। ये थी कि एफ़आईआर करने के बाद गिरफ़्तार करने की परिस्थितियों में क्या होगा। “हम आसाराम को तब तक गिरफ़्तार नहीं करना चाहते थे जब तक हमारे पास पुख़्ता सबूत न हों। जब हमारे पास पर्याप्त सबूत हो गए तब हमने गिरफ़्तारी की। इसके बाद लगभग हर रोज़ कोर्ट में पेश होना, ज़मानत की अर्ज़ी पर बहस करना। ये सारे काम एक साथ चल रहे थ।. आपको इस सबके साथ-साथ अपनी व्यक्तिगत ज़िंदगी भी मैनेज करनी थी।”

जांच अधिकारी चंचल मिश्रा जब अपनी टीम के चार अन्य सदस्यों के साथ इंदौर आश्रम पहुंचीं तो आसाराम ने प्रवचन शुरू कर दिया। इसके बाद वह आराम करने चले गए और इस दौरान चंचल मिश्रा अपनी टीम और इंदौर पुलिस के साथ गिरफ़्तार करने की कोशिश में लगी थीं। इसी प्रक्रिया में चंचल मिश्रा ने कहा कि ‘आसाराम जी दरवाज़ा खोल दीजिए नहीं तो तोड़कर अंदर आ जाऊंगी।’ “इंदौर आश्रम के बाहर बहुत भीड़ मौजूद थी। हमारी रणनीति ये थी कि जल्दी से जल्दी आसाराम को लेकर आश्रम से बाहर निकलें क्योंकि सुबह तक आश्रम के बाहर भीड़ बढ़ने वाली थी। हमारे पास दो घंटे का वक़्त था और उसमें ही हमें सारे काम करने थे क्योंकि सुबह की स्थिति में वो इतनी भीड़ जमा कर लेते कि हम वहां से निकल नहीं पाते। हम साढ़े आठ या नौ बजे के आसपास आश्रम में घुसे। इसके बाद रात डेढ़-दो बजे तक ही हम आसाराम को गिरफ़्तार कर सके। चंचल बताती है कि 31 अगस्त को आसाराम को उनके आश्रम से गिरफ़्तार करने के बाद पुलिस ने उनको तुरंत ही इंदौर एयरपोर्ट के लिए रवाना कर दिया क्योंकि उन्हें जोधपुर कोर्ट में पेश किया जाना था। ऐसे में पुलिस के पास समय की कमी थी और इंदौर से जोधपुर के बीच साढ़े छह सौ किलोमीटर की दूरी है। ऐसे में उन्हें तुरंत जोधपुर पहुंचाने के लिए एयरपोर्ट लाया गया, लेकिन जोधपुर की टीम को अगली फ़्लाइट के लिए कई घंटों का इंतज़ार करना पड़ा। “आसाराम को लेकर हम इंदौर एयरपोर्ट गए जिसके बाद हमें फ़्लाइट का इंतजार करना पड़ा. इसके बाद अगली सुबह हम लगभग साढ़े दस बजे जोधपुर पहुंचे।”

चंचल बताती है कि गिरफ्तारी के विरुद्ध में आसाराम के समर्थको ने जोधपुर में डेरा डाल दिया था। ऐसे में आगजनी -तोड़फोड होने लगी। कानून व्यवस्था बिगडने लगी। इसके चलते दिन में कानून व्यवस्था संभाली और रात में अनुसंधान किया। कई रातों तक सोई ही नही। 90 दिन में चालान पेश करना था 58 गवाहों के बयान कलमबद्ध किए । 5 राज्यों से सबूत जुटाए। चालान पेश करने में तीन उपनीरिक्षक, दो सहायक उपनीरिक्षक के साथ अन्य लोग साथ थे। इस दरमियान सुपरविजन ऑफिसर आईपीएस अजय लाम्बा का पूरा सहयोग मिला। उनके मार्गदर्शन दिन रात एक करके इसे अंजाम तक पहुंचाया।

आसाराम के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज होने के बाद जोधपुर में तत्कालीन एसीपी चंचल मिश्रा को जांच अधिकारी बनाया गया था।
– दस दिन तक गहन जांच करने और पीड़िता के बयान के आधार पर चंचल मिश्रा ने ही आसाराम को इस मामले में गिरफ्तारी करने का निर्णय किया।
– चंचल मिश्रा के नेतृत्व में जोधपुर पुलिस 31 अगस्त 2013 को इन्दौर से आसाराम को गिरफ्तार कर जोधपुर ले आई।
– इन्दौर में आसाराम के समर्थकों ने गिरफ्तारी रोकने का भरसक प्रयास किया था, लेकिन चंचल मिश्रा की सख्ती के आगे उनकी एक नहीं चली।
– जोधपुर में चंचल मिश्रा ने ही आसाराम के साथ बहुत सख्ती के साथ पूछताछ की। यह पूछताछ ही उनके अब तक जेल में रहने का आधार बनी।
– चंचल मिश्रा की ओर से तैयार की गई मजबूत जांच रिपोर्ट के कारण ही आसाराम को इस मामले में आठ बार प्रयास करने के बावजूद अब तक जमानत नहीं मिल पाई है।
– इसके अलावा जांच अधिकारी के रूप में चंचल मिश्रा ने कोर्ट में आसाराम के खिलाफ गवाही दी।
– उनकी गवाही के दौरान कोर्ट में उपस्थित आसाराम ने कई बार उनका ध्यान भंग करने का प्रयास किया।
– इसको लेकर न्यायाधीश आसाराम को कई बार शांति के साथ बैठने का आदेश दे चुके है।
– ऐसा माना जा रहा है कि इन कारणों से चंचल शुरू से ही आसाराम की नजर में खटक रही थी।
– गुजरात एटीएस की ओर से गिरफ्तार आसाराम के शिष्य रह चुके कार्तिक हलदर ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसे चंचल मिश्रा को मारने का आदेश मिला था।
– पूछताछ में हलदर ने बताया था कि चंचल मिश्रा ने आसाराम के साथ बहुत सख्ती की थी। इस कारण उसने चंचल को बम से उड़ाने की साजिश रची।
– आसाराम के खिलाफ विभिन्न मामलों में गवाही देने वाले नौ लोगों पर हमला हो चुका है। इनमें से तीन की मौत हो चुकी है।

चंचल मिश्रा कहती है की माननीय अदालत का ये फैसला मिल का पत्थर साबित होगा। महिलाएं अपने साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करे, चुप नही रहे। इसका डटकर मुकाबला करे ।न्याय जरुर मिलेगा।

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