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शादी के 16 साल बाद शुरु की पढ़ाई और बनी नारी शक्ति की मिसाल

फोकस भारत। ससुराल में अब वो बहू ने बल्कि बेटा है। परिवार की एक मजबूत कड़ी है। जो तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उसने हालातों से लड़कर हौसलों को दिए पंख, पति को खोने के बाद भी हार नहीं मानी और 16 साल बाद दुबारा शुरु की पढ़ाई। जयपुर की आनन्द शेखावत ने पटवारी की परीक्षा में परचम लहराया है। लेकिन उनकी सफलता की रफ्तार यहां थमी नही बल्कि जारी है।


ना टूटी,ना हारी वो
यह कहानी आपको सोचने पर मजबूर करेगी। यह कहानी आपको बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित करेगी। यह कहानी एक नारी शक्ति की है, जिसने विपरित परस्थितियों में हार नही मानी बल्कि उसे अपनी ताकत बनाया। ये फलसफा है आनंद शेखावत की जिंदगी का। आनंद की जिंदगी में खुशियां थी। लेकिन ईश्वर को कुछ ओर मंजूर था। 2 बेटियों के जन्म के बाद पति को खो दिया। आनन्द कहती है कि जीवनसाथी को खोने का दर्द शब्दों में बयां नही कर सकती है। उस वक्त ऐसा लगा मानो सब कुछ खत्म हो गया। जिंदगी बेमानी लगने लगी। डेड साल तक उधेडबुंद में रही आखिर क्या करु। लेकिन फिर आगे पढ़ने की ठानी।

बेटियों के साथ आनंद शेखावत

ननद का मिला साथ, ससुराल बना मायका
आनन्द बताती है कि शादी से पहले मैंने आर्टस में गेजुएशन किया था। और पति को खोने के बाद मैंने फिर से 16 साल बाद पढ़ाई करने की ठानी। ये मुमकिन नही था। लेकिन मेरे ससुरजी और ननद बाईसा ने मुझे सपोर्ट किया। आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट किया। बाईसा हमेशा कहती थी भाभीसा आप कोचिंग जाओ। बाकी काम में संभाल लूंगी। मेरे दोनों भाईयों ने भी मेरी पढ़ाई में मदद की।

शिक्षा ही जिंदगी की जमापूंजी
आनन्द शेखावत की कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है कि पटवारी की परीक्षा दूसरे प्रयास में पास कर ली। लेकिन आनन्द यहीं नही रुकी है। उनके फौलादी हौसले बुलंद है। आनन्द बीएड करने के बाद सैकेंड ग्रेड की तैयारी कर रही है। साथ ही आरएएस की भी। उच्च शिक्षा हासिल करना आनन्द की जिंदगी लक्ष्य बन गया है। आनन्द कहती है कि शिक्षा ही जिंदगी की जमापूंजी है।

बेटियां पैरों पर खड़ी होगी, तब करुंगी शादी
आनंद शेखावत की 2 बेटिया है। एक 4 और दूसरा 9 वी कक्षा पढ़ रही है। आनन्द कहती है कि बेटियों को मुझ पर है गर्व। मुझे पूरा सपोर्ट करती है। बेटिया पढने में होशियार है । यह जब तक अपने पैरो पर खड़ी नही हो जाएगी तब तक इनकी शादी नहीं करुंगी।

बच्चियों के सोने के बाद करती है पढ़ाई
आनन्द घर के काम के अलावा अपने बुजुर्ग ससुर की देखभाल भी करती है। आनन्द कहती है उन्होंने एक बेटा खोया लेकिन दूसरा बेटा मैं हूं। मेरे चेहरे पर खुशी उन्हे राहत की सास देती है। मैं जानती हूं कि परिवार की कड़ी हू । अगर मैं टूट गई तो सब बिखर जाएगा। बच्चियों की भी पढ़ाई देखनी होती है। ऐसे में रात को बच्चियों के सोने के बाद ्मैं देर रात तक पढ़ाई करती हूं। बच्चियों के साथ कभी-कभी बैंडमिंटन भी खेलती हूं। उन्हें हर पल खुशी देने की कोशिश करती हूं।

आत्मविश्वास ने बदले जिंदगी के मयने
आनन्द कहती है कि पटवारी की परीक्षा पास करने के बाद मुझमें आत्मविश्वास आ गया । मुझे लगने लगा मैं कुछ कर सकती है। मेरी आवाज में खनक आ गई । मानो मैं पूरी तरह बदल गई। ईश्वर में भी दुबारा भरोसा करने लगी। भगवान किसी ना किसी रुप में हमारी जरुर मदद करते है। बस शर्त कि आपको खुद को हिम्मत और पहल करनी होगी।