केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(amit shah) ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव ( jammu kashmir assembly election)का बिगुल बजने से पहले ही भाजपा के लिए मास्टर स्ट्रोक तैयार कर दिया है। शाह की इस रणनीति से जहां एक ओर नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस पार्टी को तगड़ा झटका लगेगा, वहीं भाजपा की सीटों का ग्राफ 40 के पार जा सकता है। शाह ने कहा, जस्टिस जीडी शर्मा कमीशन ने पहाड़ी, गुज्जर और बकरवाल समुदाय को आरक्षण देने की सिफारिश की है। प्रधानमंत्री मोदी का मन है कि प्रशासनिक कार्य पूरा कर इस सिफारिश को जल्द से जल्द लागू किया जाए। गुर्जर, बकरवाल और पहाड़ियों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। शाह ने कहा, कुछ लोग नहीं चाहते थे कि इस क्षेत्र में शांति बनी रहे। इसके लिए उन्होंने गुज्जर-बकरवाल को उकसाना शुरू कर दिया। ये भ्रम फैलाया गया कि पहाड़ी समुदाय के आने से उनका हिस्सा कम हो जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा, ‘मैं कहता हूं, पहाड़ी भी आएंगे और गुर्जर-बकरवाल का हिस्सा कम नहीं होगा। पहाड़ी आरक्षण के अमित शाह के दांव से कैसे बदल जाएंगे घाटी के सियासी समीकरण? अमित शाह के तीसरे रामबाण ने जम्मू में जहां भाजपा की जीत पुख्ता की है, वहीं कश्मीर में ‘भगवा’ को फायदा दिलाने का रास्ता बना दिया है। इससे पहले जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में नौ सीटें अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित की गई थीं। गुज्जर मुस्लिम समुदाय के गुलाम अली को राज्यसभा में भेजना, भाजपा की चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा है।
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