फोकस भारत/जयपुर। 30 जुन 2017 को केरला के डीजीपी टी.पी. सेन कुमार ने रिटायरमेंट के दिन एक वक्तव्य जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा कि ‘क्रिमिनल आईपीएस में ज़्यादा हैं, बजाय कांस्टेबल के।’ इसके लिए उन्होंने एक प्रतिशत के लगभग कासंटेबल एंव उसके ऊपर के स्टाफ़ को अापराधिक माइंडसेट का बताया, तथा 4 प्रतिशत से अधिक आईपीएस अधिकारियों को अापराधिक माइंडसेट का बताया।
“मेरा मानना एवं अनुभव पुलिस की आठ वर्षों की सर्विस एवं केन्द्र सरकार व अन्य सर्विस के 10 वर्षों का अनुभव, कुल मिलकार 18 वर्षों के अनुभव में मैनें पाया है कि आईपीएस में लगभग 20% अापराधिक माइडंसेट एवं लगभग 10% नीचे स्तर पर अधिकारी एवं जवान अापराधिक माइडंसेट के हैं। 20% आईपीएस जो आपराधिक नेचर के हैं, उनका प्रभाव लगभग 90% अन्य आईपीएस अधिकारियों एंवं पूरी फ़ोर्स, समाज पर किसी भी तरह से पड़ता रहता है। इसके साथ ही 10% आपराधिक प्रकृति के जवानों का प्रभाव लगभग 50% जवानों एवं अन्य को प्रत्यक्ष अप्रत्याशित रुप से प्रभावित करता है।
हाल के वर्षों में राज्य के कुछ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को मैनें चिन्हित किया है, जो पूर्णत: अापराधिक नेचर, बेईमान, पद का अधिकतम दुरुपयोग करने वाले एवं हर प्रकार से भ्रष्ट हैं। कईयों के चेहरे उजागर किये गये हैं, कईयों के खिलाफ जांच विचाराधीन है। इनकी अधिक संख्या इसलिए भी है, क्योंकि इनको सत्ता से पर्याप्त संरक्षण मिला हुआ है। ये हर प्रकार की गंदगियों से पुलिस विभाग, समाज एवं अंतत: देश का नुक़सान कर रहे हैं।
एक उदाहरण से बात को रखने का प्रयास कर रहा हूं। पिछले वर्ष राज्य के एक अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के अधिकारी के तमाम अनियमितताओं, भ्रष्टाचार की गतिविधियों को मय साक्ष्यों, दस्तावेज़ों के शासन सचिवालय एवं अन्य संबंधित एजेंसी को भेजा गया, पर सरकार के पर्याप्त संरक्षण की वजह ये सभी जांच और आज भी परिवाद लंबित हैं। बिना न्यायालय के एेसे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त भ्रष्टों पर नियंत्रण संभव प्रतीत नहीं होता दिख रहा है।
इस दलाल एवं चाटुकार अधिकारी के खिलाफ इसकी पहली नियुक्ति में सीमा के एक जिले में पुलिस अधीक्षक रहते हुए तस्करी से 6 किलो सोने का ग़बन, तस्करों से सांठगांठ, तमाम भुमाफियों से मिलकर राज्य की तमाम ज़मीनों पर क़ब्ज़ा, जातिवाद का घोर प्रसार पुलिस फ़ोर्स में करने का प्रयास, अधिकारियों एवं जवानों के जाति के आधार पर बांटने का प्रयास, चाटुकारिता की सभी हदों को पार करते हुए आईपीएस पद की गरिमा को तार-तार करना, जुनियर आईपीएस अधिकारियों को एेनकेन चाटुकार एवं दलाली के संस्कार डालने का प्रयोजन आदि।
हाल में एक फ़र्ज़ी पत्रकार को इस दलाल अधिकारी ने बूंदी से जयपुर आमंत्रित किया। इस पत्रकार को मैंने पुलिस अधीक्षक बूंदी रहते हुए जेल भेजा था। इस प्रकरण से पहले एक महिला डीएम ने इसके खिलाफ मुक़द्दमा दर्ज कराते हुए इसका लाइसेंस निरस्त किया था, उस प्रकरण में यह मेरे कार्य काल में जेल गया। हाल में इस तथाकथित दलाल आईपीएस को बूंदी जिले का निरीक्षण करना है। अत: इस आपराधिक नेचर के आईपीएस ने उस पत्रकार को आमंत्रित किया, ताकि जब वह बूंदी जिले में निरीक्षण को जाये तो इस पत्रकार के माध्यम से नकारात्मक प्रयोजन के तहत कुछ गंदगी की जा सके। यह तो सिर्फ़ एक उदाहरण है, राज्य के एेसे कई दलालों के उदाहरण हैं जो राज्य पुलिस का हिस्सा हैं ।
राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी की कलम से साभार