राजस्थान के CM ने घूंघट प्रथा पर ऐसा क्या कहा कि सब तालियां बजाने लगे

राजस्थान के CM ने घूंघट प्रथा पर ऐसा क्या कहा कि सब तालियां बजाने लगे

फोकस भारत। समाज को एक महिला को घूंघट में कैद करने का अधिकार नहीं है, नारी को घूंघट में कैद नहीं कर सकते। नारी को जब दुर्गा कहते हैं तो उसकी भी देश के निर्माण में भागीदारी होनी चाहिए…अब ज़माना बदल चुका है, हिम्मत और हौसले के साथ महिलाओं को आगे बढ़ना होगा और सरकार आपको हमेशा अपने साथ खड़ी मिलेगी। ये कहना था राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का।

ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के घूंघट करने की प्रथा पर प्रहार करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीते मंगलवार को यहां कहा कि जब तक घूंघट नहीं हटेगा महिला कभी आगे नहीं बढ़ पाएगी। नारी अधिकारों के लिए काम कर रहे एक संगठन के कार्यक्रम में महिलाओं के बिना घूंघट शामिल होने की ओर इशारा करते हुए गहलोत ने कहा कि कुछ ग्रामीण इलाकों में महिलाएं अब भी घूंघट करती हैं। उन्होंने कहा, ‘समाज को किसी महिला को घूंघट में कैद करने का क्या अधिकार है?’ गहलोत ने कहा, ‘जब तक घूंघट नहीं हटेगा महिला कभी आगे नहीं बढ़ पाएगी।  जमाना गया घूंघट का.’ उन्होंने कहा- हिम्मत और हौसले के साथ आपको आगे बढ़ना पड़ेग।. सरकार आपके साथ खड़ी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जमाना बदल गया है और नारी शक्ति को घूंघट में कैद नहीं किया जा सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब महिलाओं को घूंघट में रखा जाता था। आज वक्त बदल चुका है. महिलाएं पढ़-लिखकर हर क्षेत्र में सफलता के झंड़े गाड़ रही हैं।पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण हम सबके सामने है, जिन्होंने 17 साल तक देश का सफल नेतृत्व किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम कर रहे संगठन समाज से डायन प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों व अंधविश्वासों के उन्मूलन के लिए आगे आकर राज्य सरकार का सहयोग करें।उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के इस युग में ऐसी कुप्रथाओं और अंधविश्वासों को उचित नहीं कहा जा सकता।  समाज की उन्नति में ये बाधक हैं। सामाजिक संस्थाएं इन कुप्रथाओं के खिलाफ वातावरण तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं पर अत्याचार व उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए हैं. गहलोत ने कहा-हमने सरकार बनने के बाद फैसला किया है कि सभी जिलों में डिप्टी एसपी रैंक का एक-एक अफसर इसी तरह के मामलों को देखेगा।

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